हिम्मत की ऐसी मिसाल, जिसे सुनकर हर कोई करेगा सलाम

दून वैली टाइम्स | रुद्रप्रयाग

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले से साहस और सूझबूझ की मिसाल पेश करने वाली एक घटना सामने आई है। अगस्त्यमुनि विकासखंड के कोटी पठालीधार गांव में घास काटने गई 65 वर्षीय महिला पर अचानक गुलदार ने हमला कर दिया। लेकिन महिला ने घबराने के बजाय हाथ में मौजूद दरांती से गुलदार का डटकर मुकाबला किया। महिला के लगातार जवाबी वार से गुलदार पीछे हट गया और जंगल की ओर भाग निकला। इस बहादुरी के चलते महिला की जान बच गई।

झाड़ियों से अचानक निकला गुलदार

जानकारी के अनुसार बसुकेदार तहसील के कोटी पठालीधार गांव निवासी नारायणी देवी, पत्नी पुष्कर सिंह रावत, बुधवार सुबह करीब 11:45 बजे मवेशियों के लिए घास काटने जंगल गई थीं। वह रोज की तरह खेत और जंगल की सीमा पर घास काट रही थीं कि तभी झाड़ियों में छिपे गुलदार ने अचानक उन पर हमला बोल दिया।

हमला इतना तेज था कि महिला के हाथ, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों में गहरे घाव हो गए। अचानक हुए हमले के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और हाथ में मौजूद दरांती से लगातार गुलदार पर वार करती रहीं।

साहस के आगे पीछे हटा गुलदार

जीवन और मौत के बीच चल रही इस जंग में नारायणी देवी ने असाधारण साहस का परिचय दिया। उनके जवाबी हमले से गुलदार घबरा गया और जंगल की ओर भाग निकला। ग्रामीणों का कहना है कि यदि महिला ने साहस नहीं दिखाया होता तो यह घटना जानलेवा साबित हो सकती थी।

गंभीर घायल होने के बावजूद खुद पहुंचीं घर

हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद नारायणी देवी ने हिम्मत नहीं छोड़ी। उन्होंने अपनी घास की कंडी उठाई और किसी तरह स्वयं घर तक पहुंचीं। खून से लथपथ मां को देखकर उनके बेटे पंकज सिंह तुरंत उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अगस्त्यमुनि लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उनका उपचार शुरू किया।

महिला खतरे से बाहर

अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार महिला के हाथ, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों में गहरे घाव हैं। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई गई है और वह खतरे से बाहर हैं। डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है।

वन विभाग हरकत में आया

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम अस्पताल पहुंची और घायल महिला का हालचाल जाना। दूसरी टीम घटनास्थल पर पहुंचकर गुलदार की गतिविधियों का निरीक्षण करने और आवश्यक कार्रवाई में जुट गई। विभाग ने क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

ग्रामीणों में दहशत

घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश परिवार पशुपालन पर निर्भर हैं और उन्हें प्रतिदिन जंगल से घास व चारा लाना पड़ता है। ऐसे में गुलदार की बढ़ती गतिविधियां लोगों के लिए बड़ा खतरा बन गई हैं।

ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाने, गुलदार की निगरानी करने और स्थायी सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष बना बड़ी चुनौती

रुद्रप्रयाग समेत उत्तराखंड के कई पर्वतीय जिलों में पिछले कुछ समय से गुलदार के हमलों की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। खेतों, गांवों और जंगलों के आसपास वन्यजीवों की बढ़ती आवाजाही के कारण ग्रामीणों, किसानों और महिलाओं को रोजमर्रा के कार्यों के दौरान भी जान का खतरा बना रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए प्रभावी निगरानी, त्वरित कार्रवाई और जागरूकता अभियान बेहद जरूरी हैं।

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