धर्मपुर धराशायी, सिर्फ ज्वालापुर में बढ़े वोटर

SIR के बाद उत्तराखंड की मतदाता सूची में बड़ा बदलाव, 70 में से 69 विधानसभा सीटों पर घटे मतदाता; देहरादून की कई सीटों पर 30 से 57 हजार तक की कमी

देहरादून। उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद जारी मतदाता सूची ने प्रदेश के राजनीतिक और चुनावी समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले प्रदेश की 70 विधानसभा सीटों में से 69 सीटों पर मतदाताओं की संख्या कम हुई है। प्रदेश में सिर्फ हरिद्वार की ज्वालापुर विधानसभा सीट ऐसी रही, जहां मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

मतदाता सूची में सबसे बड़ा बदलाव देहरादून जिले की धर्मपुर विधानसभा सीट पर सामने आया है। यहां वर्ष 2022 के मुकाबले 57,318 मतदाता कम हुए हैं। इसके बाद देहरादून कैंट में 46,346, ऋषिकेश में 43,299, रायपुर में 39,989, राजपुर रोड में 39,046 और मसूरी में 34,113 मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है। इस तरह देहरादून जिले की कई विधानसभा सीटों पर मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट सामने आई है।

प्रदेश में करीब 11 लाख मतदाताओं की कमी

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में उत्तराखंड में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 82.66 लाख थी। SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची में यह संख्या घटकर करीब 71.58 लाख रह गई। यानी प्रदेशभर में लगभग 11 लाख से अधिक मतदाताओं की संख्या कम हुई है।

मतदाता सूची में यह बदलाव ऐसे समय सामने आया है, जब प्रदेश की राजनीति में आगामी चुनावों को लेकर तैयारियां तेज हैं। इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कम होने से राजनीतिक दलों की बूथवार रणनीति और चुनावी गणित पर इसका असर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।

धर्मपुर में सबसे ज्यादा गिरावट

विधानसभा सीटवार आंकड़ों में धर्मपुर सबसे ऊपर है। वर्ष 2022 की तुलना में यहां 57,318 मतदाता कम हुए हैं। इसके बाद:

  • देहरादून कैंट — 46,346 कम
  • ऋषिकेश — 43,299 कम
  • काशीपुर — 41,281 कम
  • रायपुर — 39,989 कम
  • हरिद्वार — 39,553 कम
  • राजपुर रोड — 39,046 कम
  • मसूरी — 34,113 कम
  • रुड़की — 31,989 कम

इन आंकड़ों से साफ है कि मतदाताओं की संख्या में सबसे बड़ी कमी वाली विधानसभा सीटों में मैदानी और शहरी क्षेत्रों की कई सीटें शामिल हैं।

ज्वालापुर बना प्रदेश का एकमात्र अपवाद

SIR के बाद जारी आंकड़ों में हरिद्वार की ज्वालापुर विधानसभा सीट प्रदेश की एकमात्र सीट है, जहां मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। वर्ष 2022 में यहां 1,16,971 मतदाता थे, जो बढ़कर 1,17,044 हो गए हैं। यानी ज्वालापुर में 73 मतदाताओं की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

पुरोला में सबसे कम कमी

वहीं, मतदाताओं की संख्या में सबसे कम गिरावट उत्तरकाशी की पुरोला विधानसभा सीट पर दर्ज हुई है। यहां करीब 983 मतदाता कम हुए हैं। इसके बाद चकराता में 2,066, यमुनोत्री में 2,583 और घनसाली में 3,470 मतदाताओं की कमी सामने आई है।

SIR में घर-घर हुआ सत्यापन

विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान निर्वाचन विभाग की ओर से मतदाता सूची का व्यापक सत्यापन कराया गया। मृतक, स्थानांतरित, डुप्लीकेट तथा अन्य कारणों से अपात्र पाए गए नामों की जांच कर उन्हें सूची से हटाया गया। साथ ही पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए भी प्रक्रिया जारी रखी गई।

निर्वाचन प्रक्रिया में मतदाता सूची सबसे महत्वपूर्ण आधार होती है। ऐसे में SIR के बाद सामने आए इन आंकड़ों को लेकर राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम मतदाताओं की भी नजर अब विधानसभा क्षेत्रवार और बूथवार आंकड़ों पर है।

नाम छूटा है तो दावा-आपत्ति का रास्ता खुला

निर्वाचन विभाग की प्रक्रिया के तहत जिन पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाया है, वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार फॉर्म-6 के माध्यम से नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। मतदाताओं से अपील की गई है कि वे अपनी और अपने परिवार के सदस्यों की मतदाता सूची में स्थिति की जांच करें।

चुनावी गणित पर पड़ेगा असर?

मतदाता सूची में इतने बड़े बदलाव के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसका आगामी चुनावों के समीकरण पर कितना प्रभाव पड़ेगा। विशेषकर धर्मपुर, देहरादून कैंट, ऋषिकेश, रायपुर और राजपुर रोड जैसी सीटों पर हजारों मतदाताओं की कमी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण विषय बन सकती है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि मतदाता संख्या में हुई इस भारी कमी का बूथवार क्या असर पड़ता है और राजनीतिक दल इसे किस तरह देखते हैं।

दून वैली टाइम्स की पड़ताल में सामने आए आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि SIR के बाद उत्तराखंड की चुनावी तस्वीर पहले की तुलना में काफी बदल गई है।

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