जनता का प्यार, हरीश रावत की सबसे बड़ी पूंजी!

दिल्ली से उत्तराखंड लौटे हरदा, रामपुर तिराहा से देहरादून तक दिखा समर्थकों का स्नेह; जगह-जगह हुआ आत्मीय स्वागत

रामपुर तिराहा में शहीदों को नमन, हरिद्वार में मां गंगा का पूजन और देहरादून में समर्थकों से मिले हरीश रावत

देहरादून। लंबे समय बाद दिल्ली से उत्तराखंड लौटे पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत का रविवार को प्रदेश में जगह-जगह स्वागत हुआ। रामपुर तिराहा से शुरू हुआ उनका उत्तराखंड वापसी का सफर हरिद्वार होते हुए देहरादून पहुंचा। रास्ते में कांग्रेस कार्यकर्ताओं, समर्थकों और स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया।

हरीश रावत ने अपने सोशल मीडिया संदेश में इस स्वागत के लिए प्रदेशवासियों का आभार जताते हुए कहा कि पिछले करीब 60 वर्षों में उन्होंने जो सबसे बड़ी पूंजी अर्जित की है, वह जनता का प्यार और विश्वास है।

रावत के निर्धारित कार्यक्रम में रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्मारक पर उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि, हरिद्वार में मां गंगा का पूजन और मणिमाई मंदिर में दर्शन शामिल रहे। इसके बाद वह देहरादून पहुंचे।

रामपुर तिराहा में शहीदों को किया नमन

उत्तराखंड लौटते ही हरीश रावत ने सबसे पहले रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्मारक पहुंचकर राज्य आंदोलन के अमर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य के निर्माण के लिए जिन आंदोलनकारियों ने अपना बलिदान दिया, उनके संघर्ष और सपनों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनके अनुसार शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

रावत ने रामपुर तिराहा को उत्तराखंड आंदोलन के संघर्ष और बलिदान की महत्वपूर्ण स्मृति से जोड़ते हुए शहीदों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।

हरिद्वार में मां गंगा का पूजन

रामपुर तिराहा से आगे बढ़ते हुए हरीश रावत हरिद्वार पहुंचे। यहां उन्होंने स्वामी विवेकानंद पार्क के घाट पर मां गंगा का पूजन कर दुग्ध अर्पित किया और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

हरिद्वार पहुंचने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया। रावत ने इसके लिए सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लोगों का स्नेह और प्यार ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

इसके बाद उन्होंने मणिमाई मंदिर में माता के दर्शन किए और प्रदेशवासियों के लिए सुख, शांति एवं मंगल की कामना की।

रामपुर तिराहा से देहरादून तक स्वागत की तस्वीरें

रावत के साथ चल रहे काफिले के दौरान रामपुर तिराहा, नारसन, मंगलौर, रूड़की और हरिद्वार सहित विभिन्न स्थानों पर समर्थकों द्वारा स्वागत किए जाने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए।

रावत ने इन तस्वीरों को साझा करते हुए लिखा कि यह केवल स्वागत नहीं, बल्कि लोगों के दिलों का प्यार है।

देहरादून पहुंचने से पहले रास्ते में मिले इस स्वागत ने उनके समर्थकों के बीच उत्साह का माहौल बनाया।

देहरादून में भी समर्थकों ने किया स्वागत

राजधानी देहरादून पहुंचने पर भी हरीश रावत के समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। रावत ने देहरादून की सड़कों पर मिले इस स्नेह के लिए लोगों का आभार जताया।

उनके अनुसार, पिछले छह दशकों के राजनीतिक जीवन में जनता से मिला प्यार ही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी है।

हालांकि समर्थकों की मौजूदगी को किसी राजनीतिक परिणाम का सीधा संकेत मानना अलग विषय है, लेकिन रावत की वापसी ने उत्तराखंड कांग्रेस की राजनीति में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है।

कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति के बीच रावत की वापसी

हरीश रावत की उत्तराखंड वापसी ऐसे समय हुई है, जब कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक और राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। हाल ही में रावत ने अपने कुछ संगठनात्मक पदों से इस्तीफे की पेशकश की थी। उनके इस्तीफे की पेशकश का पत्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल को प्राप्त होने की खबर भी सामने आई थी। रावत ने कहा था कि उनकी वजह से पार्टी के आगामी चुनाव अभियान पर कोई असर न पड़े, इसलिए उन्होंने पद छोड़ने की पेशकश की।

इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच उत्तराखंड लौटे रावत के स्वागत में समर्थकों की मौजूदगी को लेकर कांग्रेस के भीतर और बाहर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

भाजपा ने बताया राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन

रावत की वापसी और रोड शो को लेकर भाजपा नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा विधायक विनोद चमोली तथा पार्टी के अन्य नेताओं ने इसे राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन बताते हुए रावत पर निशाना साधा है।

दूसरी ओर, रावत के समर्थक उनकी वापसी को जनता और कार्यकर्ताओं के स्नेह से जोड़कर देख रहे हैं।

अब सवाल—आगे क्या होगी हरदा की भूमिका?

उत्तराखंड की राजनीति में हरीश रावत का लंबा राजनीतिक अनुभव और पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में उनकी भूमिका उन्हें प्रदेश की सियासत का चर्चित चेहरा बनाती है। उनकी वापसी के बाद अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि आने वाले दिनों में वह कांग्रेस संगठन और प्रदेश की राजनीति में किस तरह सक्रिय होते हैं।

रामपुर तिराहा पर शहीदों को नमन से शुरू हुआ सफर, हरिद्वार में मां गंगा का आशीर्वाद और देहरादून में समर्थकों का स्वागत—हरीश रावत की उत्तराखंड वापसी ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाओं को जरूर जन्म दे दिया है।

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