राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की 74 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल

CCTV में 105 बार नकदी की कथित अनधिकृत निकासी/छिपाने के मामले सामने आए; आठ आरोपी न्यायिक हिरासत में

देहरादून/नई दिल्ली। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के मामले में जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने बुधवार को आठ गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ करीब 74 हजार पन्नों की चार्जशीट अयोध्या की विशेष अदालत में दाखिल कर दी। अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव ग्रोवर के अनुसार, अदालत ने चार्जशीट स्वीकार कर ली है। इसमें आपराधिक विश्वासघात समेत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप शामिल किए गए हैं। 

चार्जशीट दाखिल होने के साथ ही इस मामले में जांच का एक बड़ा चरण पूरा हो गया है। इससे पहले 21 सितंबर को उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि SIT की जांच लगभग पूरी हो चुकी है और पहली गिरफ्तारी से 90 दिन की अवधि पूरी होने से पहले चार्जशीट दाखिल की जाएगी। 

CCTV में सामने आईं 105 घटनाएं

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश SIT की स्टेटस रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर परिसर के पिलग्रिम फैसिलिटी सेंटर (PFC) स्थित काउंटिंग रूम की CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच में 105 ऐसी घटनाओं की पहचान हुई, जिनमें नकदी को कथित तौर पर अनधिकृत रूप से निकालने या छिपाने की बात सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, इन घटनाओं में काउंटिंग प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों की मदद का भी उल्लेख किया गया है। 

SIT ने CCTV फुटेज के अलावा गवाहों के बयान, बैंक एवं वित्तीय रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा, संपत्ति संबंधी दस्तावेज और फोरेंसिक जांच सहित विभिन्न साक्ष्यों का परीक्षण किया। 

चोरी का मामला काउंटिंग रूम तक सीमित होने का दावा

चार्जशीट से सामने आई जानकारी के अनुसार, जांच टीम ने कथित नकदी गबन की घटनाओं का संबंध दान की रकम की गिनती के दौरान काउंटिंग सेंटर के भीतर से जोड़ा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, SIT को मंदिर से बैंक तक रकम ले जाने की बाद की प्रक्रिया में चोरी के सबूत नहीं मिले। 

इससे मामले की जांच का फोकस दान की रकम की गिनती और उसके शुरुआती प्रबंधन की प्रक्रिया पर केंद्रित होता है।

आठ आरोपी, सात से ₹79.8 लाख की बरामदगी

मामले में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामाशंकर मिश्रा, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। 

जांच के दौरान पुलिस ने सात आरोपियों से करीब ₹79.8 लाख की नकदी बरामद करने की जानकारी दी है। आठवें आरोपी सुभाष श्रीवास्तव से नकदी या अन्य मूल्यवान वस्तु बरामद नहीं होने की बात सामने आई है। 

चांदी की ईंटों और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे पर भी जांच

SIT की सुप्रीम कोर्ट में पेश रिपोर्ट में केवल नकदी से जुड़े आरोपों की ही जांच नहीं की गई। रिपोर्ट में मंदिर को प्राप्त चांदी की ईंटों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच का उल्लेख है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में दर्ज जानकारी के मुताबिक, लगभग 200 किलोग्राम चांदी की ईंटों, 38.288 किलोग्राम चांदी की ईंटों, चांदी के हार, चरण पादुका और रामचरितमानस से संबंधित दान के संबंध में SIT को कोई विसंगति नहीं मिली। 

25 सितंबर की समयसीमा क्यों थी अहम?

21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया था कि मामले में पहली गिरफ्तारी के बाद 90 दिन की वैधानिक अवधि 25 सितंबर को पूरी हो रही थी। निर्धारित अवधि में चार्जशीट दाखिल नहीं होने पर आरोपियों को कानून के तहत डिफॉल्ट/वैधानिक जमानत का अधिकार उत्पन्न हो सकता है। इसी कारण SIT ने 25 सितंबर से पहले चार्जशीट दाखिल करने की बात अदालत को बताई थी। 

अब चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और स्थानीय अदालत ने इसे स्वीकार भी कर लिया है। करीब 74 हजार पन्नों के दस्तावेजों में शामिल साक्ष्यों के आधार पर आगे न्यायिक प्रक्रिया चलेगी। 

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ था?

सुप्रीम कोर्ट ने 21 सितंबर को SIT की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद कवर में देखी थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। अदालत ने जांच की प्रगति पर रिपोर्ट का अवलोकन किया और मामले को इस स्तर पर संबंधित सत्र अदालत के समक्ष आगे बढ़ने दिया। जरूरत पड़ने पर आगे उचित आदेश जारी करने की बात भी कही गई थी। 

अब आगे क्या होगा?

चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब अदालत में आरोपों, साक्ष्यों और बरामदगी से जुड़े दस्तावेजों की न्यायिक जांच होगी। 105 CCTV घटनाओं में प्रत्येक आरोपी की कथित भूमिका, कथित रूप से कितनी रकम का गबन हुआ और बरामद रकम से उसका क्या संबंध है, इन सभी बिंदुओं पर आगे की न्यायिक कार्यवाही में तस्वीर और स्पष्ट होगी।

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