तीन महीने के भीतर दूसरी बार उठे सवाल, पहले बेटे की जानकारी देकर बाद में बेटी होने की बात बताने का आरोप
देहरादून। राजधानी देहरादून स्थित दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में नवजात शिशु बदलने के आरोप का एक और मामला सामने आया है। सोमवार को प्रसव के बाद परिजनों को पहले बेटा होने की जानकारी दी गई, लेकिन कुछ देर बाद चिकित्सकों की ओर से बेटी होने की बात बताए जाने पर विवाद खड़ा हो गया। परिजनों ने अस्पताल में करीब दो घंटे तक हंगामा किया और नवजात बदलने का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन के अनुसार प्रारंभिक जानकारी में निजी एजेंसी के कर्मचारी की ओर से गलत सूचना दिए जाने की बात सामने आई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तरकाशी जिले के मोरी क्षेत्र निवासी सुनीता राणा ने सोमवार को दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के बाद उनके पति यशपाल राणा को एक स्वास्थ्यकर्मी ने बेटा होने की जानकारी दी। परिजनों का आरोप है कि कुछ देर बाद चिकित्सकों ने उन्हें बताया कि नवजात बेटी है। पहले दी गई जानकारी और बाद में बताई गई बात में अंतर होने से परिजन नाराज हो गए। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया।
गलत जानकारी देने का आरोप
यशपाल राणा के अनुसार, उनकी पत्नी को पेट में दर्द होने पर पहले मोरी के स्थानीय अस्पताल ले जाया गया था। वहां से उन्हें देहरादून रेफर किया गया। दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के बाद उन्हें पहले बेटे के जन्म की सूचना दी गई, लेकिन बाद में बेटी होने की जानकारी दी गई। परिजनों ने इस पर सवाल उठाते हुए नवजात की पहचान और अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच की मांग की।
तीन महीने में दूसरी बार उठा मामला
दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में नवजात बदलने को लेकर इससे पहले अगस्त में भी ऐसा ही मामला सामने आया था। उस समय प्रेमनगर निवासी सुमित ने अपनी पत्नी नीरज के प्रसव के बाद नवजात बदलने की आशंका जताई थी। उनका कहना था कि पहले उन्हें बेबी बॉय होने की जानकारी दी गई, जबकि बाद में बेटी होने की बात बताई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने जांच के निर्देश दिए थे। हालांकि, समाचार रिपोर्ट के अनुसार, उस मामले की जांच रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई थी।
अस्पताल प्रबंधन ने निजी एजेंसी के कर्मचारी को ठहराया जिम्मेदार
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस बिष्ट के अनुसार, प्रारंभिक जानकारी में रेडियोलॉजी जांच से संबंधित निजी एजेंसी के कर्मचारी की ओर से परिजनों को गलत सूचना दिए जाने की बात सामने आई है। बताया गया कि अस्पताल के अभिलेखों में नवजात के रूप में बेटी का ही उल्लेख है। प्रबंधन ने संबंधित एजेंसी को नोटिस देकर कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, परिजनों से बातचीत की गई है और वे अब संतुष्ट हैं। हालांकि, मामले में सामने आए आरोपों और पहले दी गई जानकारी के बीच अंतर को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण है।
जांच और जवाबदेही पर उठे सवाल
लगातार दो मामलों में इस तरह के आरोप सामने आने से अस्पताल की सूचना व्यवस्था और नवजात की पहचान से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे मामलों में प्रसव के बाद परिजनों को सही जानकारी देना, नवजात की पहचान सुनिश्चित करना और अस्पताल के रिकॉर्ड में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है। अब देखना होगा कि अस्पताल प्रबंधन जांच के माध्यम से पूरे घटनाक्रम की स्थिति कितनी स्पष्ट कर पाता है और जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
