जमानतियों के सत्यापन में कथित गड़बड़ी से उलझी रिहाई की प्रक्रिया, जमानत निरस्त होने की चर्चा के बीच आधिकारिक आदेश की पुष्टि बाकी
दून वैली टाइम्स | उत्तराखंड ब्यूरो
देहरादून। अभिनेत्री उर्मिला सनावर से जुड़े ब्लैकमेलिंग और जान से मारने की धमकी देने के कथित मामले में नया मोड़ सामने आया है। अदालत से जमानत मंजूर होने के बावजूद उनकी जेल से रिहाई की प्रक्रिया अटक गई है। जमानत के लिए पेश किए गए दो जमानतियों के सत्यापन में कथित अनियमितताएं सामने आने की जानकारी मिली है। दोनों जमानतियों को फर्जी बताए जाने की खबर भी सामने आई है।
वहीं, जमानत निरस्त होने की चर्चा के बीच अभी तक इस संबंध में आधिकारिक न्यायालय आदेश की पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में उर्मिला सनावर की रिहाई और जमानत की वर्तमान स्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

किन दलीलों के आधार पर मिली जमानत?
उर्मिला सनावर की जमानत याचिका पर ACJM कोर्ट में सुनवाई हुई थी। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता प्रीति चौहान ने अदालत में दलीलें पेश कीं। उनके अनुसार, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(5) और 308(7) के प्रावधानों को लेकर अदालत के समक्ष पक्ष रखा गया कि मामले के तथ्यों के आधार पर ये धाराएं उर्मिला सनावर पर लागू नहीं होती हैं।
बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। हालांकि, जमानत मिलने के बाद भी रिहाई के लिए निर्धारित कानूनी औपचारिकताएं पूरी करना आवश्यक था।
अदालत की ओर से 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके के साथ इतनी ही राशि के दो सक्षम जमानती पेश करने की शर्त रखी गई थी। इसके बाद जमानतदारों के पहचान पत्र और अन्य दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया।
जमानतदारों के सत्यापन में क्या सामने आया?
जमानत मंजूर होने के बाद उर्मिला सनावर की जेल से रिहाई की उम्मीद बढ़ गई थी, लेकिन जमानतदारों के सत्यापन के दौरान कथित गड़बड़ी सामने आने से मामला उलझ गया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों जमानतियों की वास्तविकता पर सवाल उठे और उन्हें कथित तौर पर फर्जी बताया गया। इसके बाद जमानत निरस्त होने की खबरें भी सामने आईं।
हालांकि, सत्यापन रिपोर्ट और न्यायालय के आधिकारिक आदेश की पुष्टि के बिना जमानत रद्द होने की स्थिति को अंतिम रूप से स्पष्ट नहीं माना जा सकता। फिलहाल जमानतदारों के दस्तावेजों की जांच और अदालत के अगले कदम पर नजर बनी हुई है।
गिरफ्तारी के पीछे क्या था पूरा मामला?
उर्मिला सनावर को हरिद्वार पुलिस ने 25 अक्टूबर को सहारनपुर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की बेटी दीपिका राठौर की शिकायत के आधार पर की गई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उर्मिला सनावर ने फोन पर पांच करोड़ रुपये की मांग की और मांग पूरी नहीं होने पर जान से मारने की धमकी दी। इसके अलावा, रविदास धाम की संपत्ति अपने नाम कराने के लिए दबाव बनाने का आरोप भी लगाया गया था।
दीपिका राठौर ने सोशल मीडिया पर अपने और परिवार के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करने तथा उनकी छवि खराब करने का भी आरोप लगाया था। शिकायत के आधार पर रानीपुर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उर्मिला सनावर को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में रोशनाबाद जिला कारागार भेज दिया गया था। पुलिस ने मामले में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन की बरामदगी का दावा भी किया था।
महत्वपूर्ण: शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी है। इन्हें अदालत में साबित हुआ तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
अभियोजन पक्ष ने जमानत का क्यों किया विरोध?
उर्मिला सनावर की जमानत याचिका का अभियोजन पक्ष ने विरोध किया था। बचाव पक्ष की अधिवक्ता प्रीति चौहान के अनुसार, अभियोजन की ओर से दलील दी गई थी कि उर्मिला सनावर के खिलाफ अलग-अलग जिलों में 10 से 11 मामले दर्ज हैं।
अभियोजन पक्ष ने यह आशंका भी जताई थी कि जेल से बाहर आने के बाद वह अन्य लोगों के खिलाफ वीडियो सोशल मीडिया पर जारी कर सकती हैं।
वहीं, बचाव पक्ष ने संबंधित धाराओं को लेकर अपनी दलीलें रखीं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत अर्जी पर फैसला सुनाया। अब जमानतदारों के सत्यापन से जुड़ा विवाद इस मामले में नया कानूनी पहलू बन गया है।
अंकिता भंडारी प्रकरण से भी जुड़ा है नाम
उर्मिला सनावर का नाम अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित VIP प्रकरण को लेकर भी चर्चा में रहा है।
दिसंबर 2025 में पूर्व विधायक सुरेश राठौर के साथ बातचीत के कथित ऑडियो-वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद यह मामला सुर्खियों में आया था। इन रिकॉर्डिंग में अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित VIP को लेकर कई दावे किए गए थे।
हालांकि, वायरल ऑडियो-वीडियो की सत्यता और उनमें किए गए दावों की पुष्टि जांच का विषय है। इस प्रकरण में CBI ने उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर को नोटिस जारी किया था। दोनों 23 अक्टूबर को देहरादून स्थित CBI कोर्ट में पेश हुए थे।
वहां उर्मिला सनावर के नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट को लेकर भी सुनवाई हुई थी। उर्मिला ने पहले नार्को टेस्ट कराने की इच्छा जताई थी। हालांकि, इसके बाद 25 अक्टूबर को दूसरे मामले में उनकी गिरफ्तारी हो गई, जिससे आगे की कानूनी प्रक्रिया प्रभावित हुई।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल उर्मिला सनावर के मामले में सबसे अहम सवाल जमानतदारों के सत्यापन और उनकी रिहाई की कानूनी स्थिति को लेकर है।
अदालत से जमानत मिलना और जेल से रिहाई होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। जमानत की निर्धारित शर्तों का पालन और आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन इसके लिए जरूरी होता है।
जमानतदारों को लेकर सामने आई कथित गड़बड़ी पर आधिकारिक रिपोर्ट और न्यायालय के आदेश से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस मामले में आगे क्या निर्णय लेती है और उर्मिला सनावर की रिहाई को लेकर क्या स्थिति बनती है।
