भोजखड़क से आगे नहीं बढ़ पा रहीं रेस्क्यू टीमें, निम और एसडीआरएफ की विशेष टीम को हेलीकॉप्टर से भेजा गया
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में केदारताल ट्रैक पर लापता सात ट्रैकर्स और एक गाइड की तलाश में चलाया जा रहा खोज एवं बचाव अभियान लगातार चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में खराब मौसम, भारी बर्फबारी और जगह-जगह हो रहे हिमस्खलन के कारण रेस्क्यू टीमों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

भोजखड़क से आगे तीन बड़े हिमस्खलन क्षेत्र रेस्क्यू टीमों के रास्ते में बाधा बने हुए हैं। इसके चलते एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें भोजखड़क से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। वहीं, भोजखड़क से कच्ची ढांग तक का रास्ता भी बेहद खतरनाक बना हुआ है। ऐसे में लापता आठ लोगों की तलाश के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रेस्क्यू का अनुभव रखने वाली नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) और एसडीआरएफ की विशेष टीम को हेलीकॉप्टर के माध्यम से केदारताल क्षेत्र में भेजा गया है।
तीन बड़े हिमस्खलन बने रेस्क्यू अभियान में बाधा
बीते दिन एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम ने केदारताल ट्रैक पर भोजखड़क तक पहुंचकर खोजबीन अभियान चलाया। इस दौरान टीमों को रास्ते में कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। भोजखड़क से पहले ही तीन बड़े हिमस्खलन क्षेत्रों को पार करना पड़ा। इसके बाद आगे का रास्ता और अधिक जोखिम भरा होने के कारण टीमें भोजखड़क से आगे नहीं बढ़ सकीं।
पर्वतारोहण से जुड़े जानकारों के अनुसार, भोजखड़क से पहले ही ट्री लाइन समाप्त हो जाती है। इसके बाद रास्ता खड़ी चट्टानों और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र से होकर गुजरता है। यहां जगह-जगह भारी हिमस्खलन होने के कारण पैदल आगे बढ़ना बेहद कठिन हो गया है।
भोजखड़क से कच्ची ढांग तक रास्ता बेहद जोखिम भरा
स्थानीय ट्रैकर्स के अनुसार, भोजखड़क से कच्ची ढांग के बीच का रास्ता सामान्य परिस्थितियों में भी काफी चुनौतीपूर्ण रहता है। इस हिस्से में भूस्खलन और हिमस्खलन के कारण कई जगह ट्रैक क्षतिग्रस्त हो चुका है। रास्ते में कई स्थानों पर बर्फ के बड़े-बड़े ढेर जमा हैं।
कच्ची ढांग के आसपास बड़े हिमस्खलन क्षेत्र होने से यहां से गुजरना भी जोखिम भरा है। इसके अलावा केदारगंगा को पार करना रेस्क्यू टीमों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
क्षेत्र में लगातार हिमस्खलन की स्थिति को देखते हुए खोजबीन अभियान में जुटे जवानों की सुरक्षा भी प्रशासन के लिए अहम बनी हुई है। ऐसे में रेस्क्यू टीमों को मौसम और परिस्थितियों का आकलन करते हुए आगे बढ़ना पड़ रहा है।
हेलीकॉप्टर से भेजी गई विशेष टीम
लापता आठ लोगों की तलाश को तेज करने के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों के बीच खोज एवं बचाव अभियान चलाने का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त निम और एसडीआरएफ की टीम को हेलीकॉप्टर से केदारताल क्षेत्र में भेजा गया है।
हेलीकॉप्टर के माध्यम से टीम को दुर्गम क्षेत्र में पहुंचाने का उद्देश्य रास्ते की बाधाओं को कम करते हुए अभियान को आगे बढ़ाना है। हालांकि, क्षेत्र में जगह-जगह बने हिमस्खलन और खराब भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विशेष टीम के सामने भी चुनौतियां बनी हुई हैं।
27 अक्टूबर से लापता हैं सात ट्रैकर्स और एक गाइड
जानकारी के अनुसार, बीते 27 अक्टूबर को सात ट्रैकर्स और उनके साथ गए एक गाइड के लापता होने की सूचना मिली थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने खोज एवं बचाव अभियान शुरू कराया। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और निम की टीमें लगातार उनकी तलाश में जुटी हुई हैं।
दुर्गम पहाड़ी रास्तों, भारी बर्फबारी और हिमस्खलन के कारण अभियान को अपेक्षित गति नहीं मिल पा रही है। फिलहाल भोजखड़क तक पहुंचकर टीमें संभावित स्थानों पर तलाश कर रही हैं, जबकि इससे आगे के क्षेत्र में पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
हेलीकॉप्टर से भेजी गई विशेष टीम से अभियान को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विशेष प्रशिक्षित टीम हिमस्खलन प्रभावित दुर्गम क्षेत्र में किस तरह आगे बढ़कर लापता सात ट्रैकर्स और एक गाइड की तलाश कर पाती है।
