मुख्यमंत्री का नाम लेकर कथित वसूली का आरोप!

शराब कारोबारी दिनेश मल्होत्रा ने अरुण तोमर पर लगाए गंभीर आरोप, आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल

2.5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक कथित रकम मांगने का दावा; ओवररेटिंग के चालान और दुकान बंद कराने की धमकी के आरोप

देहरादून। शराब कारोबारी दिनेश मल्होत्रा ने अरुण तोमर नाम के व्यक्ति पर शराब कारोबारियों से कथित तौर पर रकम मांगने, दबाव बनाने और मुख्यमंत्री के नाम का इस्तेमाल करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में मल्होत्रा ने आबकारी विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।

मल्होत्रा का आरोप है कि पिछले दो-तीन वर्षों से उन्हें शराब कारोबार में लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका दावा है कि अरुण तोमर का आबकारी विभाग के अधिकारियों पर प्रभाव है और उसके कहने पर शराब कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई कराई जाती है।

पैसे नहीं देने पर ओवररेटिंग के चालान का दबाव

शराब कारोबारी ने आरोप लगाया कि शराब दुकानों पर ओवररेटिंग के मामलों को लेकर कथित रूप से दबाव बनाया जाता है। उनका दावा है कि कथित रकम नहीं देने पर दुकान के ओवररेटिंग के चालान कराने की धमकी दी जाती है।

मल्होत्रा के अनुसार, उनकी दुकानों के भी दो-तीन बार चालान किए गए। उनका आरोप है कि इन कार्रवाइयों के पीछे कथित तौर पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश की गई।

2024-25 में 2.5 प्रतिशत और 2025-26 में 10 प्रतिशत मांगने का दावा

दिनेश मल्होत्रा ने अपने बयान में दावा किया कि वर्ष 2024-25 में शराब की दुकानों के नवीनीकरण के नाम पर कथित तौर पर 2.5 प्रतिशत रकम मांगी गई थी। उनका कहना है कि वर्ष 2025-26 में यह कथित मांग बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दी गई।

मल्होत्रा का दावा है कि इस तरह शराब कारोबारियों पर लगातार आर्थिक दबाव बनाया जा रहा था। उनका कहना है कि कार्रवाई और आर्थिक नुकसान के डर से कई कारोबारी खुलकर सामने नहीं आते।

‘मुख्यमंत्री का नाम लेकर पैसे मांगे जाते थे’

मल्होत्रा ने अपने बयान में सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि उनसे कथित तौर पर रकम मांगते समय मुख्यमंत्री का नाम लिया जाता था।

हालांकि, मल्होत्रा ने यह भी कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि अरुण तोमर को वास्तव में किसी उच्च स्तर से संरक्षण प्राप्त है या नहीं।

यदि किसी व्यक्ति द्वारा मुख्यमंत्री का नाम लेकर किसी कारोबारी से कथित तौर पर रकम मांगी जा रही है, तो इसकी निष्पक्ष जांच की मांग भी उठती है।

जिला आबकारी अधिकारी पर भी लगाए गंभीर आरोप

दिनेश मल्होत्रा ने जिला आबकारी अधिकारी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, अधिकारी ने उन्हें अपने आवास पर बुलाया और अरुण तोमर के साथ चल रहे कथित पैसों के विवाद को लेकर बातचीत की।

मल्होत्रा का दावा है कि बातचीत के दौरान उनसे कथित रूप से कहा गया कि अरुण तोमर से संबंधित रकम का भुगतान कर दें।

उन्होंने यह भी दावा किया कि बातचीत के दौरान उन्हें कथित तौर पर बताया गया कि अरुण तोमर केवल एक माध्यम है और पैसा ऊपर तक जाता है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

कैबिनेट मंत्री खजान दास के नाम का भी जिक्र

मल्होत्रा ने अपनी दो शराब दुकानों से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि कथित बातचीत के दौरान कैबिनेट मंत्री खजान दास के नाम का भी उल्लेख किया गया था।

मल्होत्रा के अनुसार, उन्हें बताया गया कि मंत्री के बेटे को उनकी दो दुकानों में से दुकान चाहिए। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर खजान दास से फोन पर संपर्क किया और मुलाकात का समय मांगा।

मल्होत्रा का दावा है कि बाद में उनकी दुकानों के टेंडर को लेकर विवाद हुआ और उन्होंने इस मामले में न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

शराब कारोबारी के मुताबिक, दुकानों से संबंधित विवाद को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया। उनका दावा है कि मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय की ओर से उन्हें राहत से संबंधित आदेश मिले।

इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने का भी उन्होंने उल्लेख किया। मल्होत्रा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में मामले पर नोटिस जारी हुआ है।

इस न्यायिक मामले के आदेशों और वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि न्यायालय के रिकॉर्ड से किया जाना आवश्यक है।

करीब 40 दुकानों के प्रभावित होने का दावा

मल्होत्रा ने अपने बयान में दावा किया कि संबंधित न्यायिक/प्रशासनिक कार्रवाई के बाद करीब 40 शराब दुकानें प्रभावित हुईं या बंद हुईं। हालांकि, इस संख्या और कार्रवाई के वास्तविक कारणों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि उनका कारोबार प्रभावित होने के साथ-साथ बड़ी रकम भी फंस गई है।

‘करीब दो करोड़ रुपये की रकम फंसी है’

दिनेश मल्होत्रा का दावा है कि संबंधित दुकान में उनकी करीब दो करोड़ रुपये की रकम जमा/निवेश के रूप में फंसी हुई है।

उनका कहना है कि शराब की दुकान बंद होने से कारोबारी पर बैंक ऋण, वित्तीय देनदारियों और कर्मचारियों सहित पूरे व्यवसाय का आर्थिक असर पड़ता है।

FL-2 को लेकर भी लगाए गंभीर आरोप

मल्होत्रा ने शराब की थोक आपूर्ति से जुड़े FL-2 लाइसेंस/व्यवस्था को लेकर भी आरोप लगाए हैं।

उनका दावा है कि उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में संचालित कई FL-2 से जुड़े कारोबार कथित तौर पर अरुण तोमर, उसके परिचितों या रिश्तेदारों से जुड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी दुकानों पर आने वाली शराब की आपूर्ति भी कथित तौर पर इन्हीं माध्यमों से होती थी।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है और संबंधित दस्तावेजों तथा विभागीय रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।

जांच कमेटी की रिपोर्ट पर भी सवाल

मल्होत्रा ने दावा किया कि उनकी दुकान में मौजूद शराब के स्टॉक को लेकर जांच कमेटी गठित की गई थी। उनका कहना है कि उन्होंने जिलाधिकारी से भी जांच रिपोर्ट के संबंध में जानकारी मांगी, लेकिन उनके अनुसार उन्हें रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई।

मल्होत्रा का दावा है कि जिलाधिकारी की ओर से उन्हें निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिया गया था। हालांकि, उनके मुताबिक तब तक दुकान के संबंध में कार्रवाई हो चुकी थी।

‘व्यापार छीन लिया, अब सड़क पर लाने की धमकी’

दिनेश मल्होत्रा ने आरोप लगाया कि विवाद के कारण उनका कारोबार प्रभावित हुआ और उन्हें भविष्य में उनके रेस्टोरेंट तथा अन्य व्यवसायों को भी बंद कराने की धमकियां दी गईं।

उन्होंने कहा कि कारोबारी बैंक से ऋण लेकर और अपनी वित्तीय क्षमता के आधार पर व्यवसाय खड़ा करता है। ऐसे में दुकान या व्यवसाय बंद होने की स्थिति में उसका आर्थिक नुकसान बहुत बड़ा हो सकता है।

मल्होत्रा का कहना है कि कई कारोबारी कथित दबाव के कारण खुलकर सामने नहीं आते, लेकिन अब उन्होंने कैमरे के सामने अपनी बात रखने का फैसला किया है।

अब जवाबदेही का सवाल

शराब कारोबारी दिनेश मल्होत्रा द्वारा लगाए गए आरोपों ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली, शराब कारोबार में कथित आर्थिक दबाव और मुख्यमंत्री के नाम के कथित इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय, आबकारी विभाग, जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारी इन आरोपों पर क्या जवाब देते हैं। यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई का रास्ता क्या होगा, यह महत्वपूर्ण होगा।

वहीं, यदि आरोप तथ्यहीन पाए जाते हैं तो संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने और आरोपों का खंडन करने का पूरा अधिकार है।

वीडियो में क्या कहा गया?

दिनेश मल्होत्रा के पूरे बयान का वीडियो उपलब्ध है। वीडियो में उन्होंने कथित वसूली, मुख्यमंत्री के नाम के इस्तेमाल, आबकारी विभाग के अधिकारियों, ओवररेटिंग के चालान, शराब दुकानों के विवाद, टेंडर प्रक्रिया, FL-2 व्यवस्था, जांच कमेटी और अपने कारोबार को प्रभावित किए जाने सहित कई मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी है।

दून वैली टाइम्स इस वीडियो में लगाए गए आरोपों को सत्यापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करता है। ये आरोप संबंधित शराब कारोबारी के बयान पर आधारित हैं। अरुण तोमर, जिला आबकारी अधिकारी, कैबिनेट मंत्री खजान दास तथा मुख्यमंत्री/सरकार का पक्ष इस खबर के समय उपलब्ध नहीं है। संबंधित पक्षों का जवाब प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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