नैनीताल की ‘टायर डॉक्टर’ कमला नेगी: साइकिल के पंचर से JCB के टायर तक, हुनर ने बनाई अलग पहचान

2004 में साइकिल के पंचर से शुरू हुआ सफर, आज ट्रक, बस, डंपर और JCB तक के टायर खुद करती हैं दुरुस्त

दीवान सिंह तोमर, देहरादून। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में जहां भारी वाहनों की मरम्मत का काम आमतौर पर पुरुषों से जोड़ा जाता है, वहीं नैनीताल जिले की कमला नेगी ने अपने हुनर और मेहनत से इस सोच को चुनौती दी है। नैनीताल के ओड़ाखान गांव की रहने वाली कमला नेगी आज साइकिल से लेकर कार, ट्रक, बस, डंपर और यहां तक कि JCB जैसे भारी वाहनों के टायरों की मरम्मत करने में भी माहिर हैं।

कमला नेगी का यह सफर करीब 2004 में शुरू हुआ, जब उन्होंने बच्चों को साइकिल किराये पर देने का छोटा-सा काम शुरू किया। साइकिलों में पंचर होने पर उन्हें बार-बार मरम्मत के लिए बाहर ले जाना पड़ता था। इसके बाद उन्होंने किसी और पर निर्भर रहने के बजाय खुद पंचर बनाना सीखने का फैसला किया।

साइकिल से शुरू हुआ हुनर, JCB तक पहुंचा

शुरुआत साइकिल के टायर से हुई। धीरे-धीरे उन्होंने स्कूटर और मोटरसाइकिल के टायरों की मरम्मत सीखी। इसके बाद कार, ट्रक और बसों के टायरों की मरम्मत का काम भी सीख लिया। समय के साथ उनका हुनर इतना बढ़ा कि अब वह डंपर और JCB जैसे भारी वाहनों के टायर भी खोलने और ठीक करने का काम करती हैं।

यह काम आसान नहीं है। भारी टायरों को खोलना, उनमें से ट्यूब निकालना और पंचर की पहचान कर उसे ठीक करना शारीरिक मेहनत और अनुभव दोनों मांगता है। कमला ने वर्षों की मेहनत और अभ्यास से इस काम में अपनी अलग पहचान बनाई है।

शुरुआत में लोगों ने उड़ाया मजाक

कमला के लिए यह सफर हमेशा आसान नहीं रहा। जब उन्होंने पुरुषों के माने जाने वाले इस काम को अपने हाथ में लिया तो शुरुआत में लोगों की टिप्पणियों और तानों का भी सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने आलोचनाओं का जवाब शब्दों से नहीं, बल्कि अपने काम और हुनर से दिया।

आज यही मेहनत उनकी पहचान बन चुकी है। स्थानीय स्तर पर लोग उन्हें ‘टायर डॉक्टर’ और ‘आयरन लेडी’ जैसे नामों से भी पुकारते हैं।

रामगढ़-मुक्तेश्वर मार्ग पर मदद का भरोसा

बताया जाता है कि कमला नेगी की टायर रिपेयर की दुकान रामगढ़-मुक्तेश्वर मार्ग पर है। आसपास के वाहन चालकों और स्थानीय लोगों के लिए यह दुकान काफी उपयोगी साबित होती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी दुकान के आसपास करीब 25 किलोमीटर के दायरे में दूसरा पंचर रिपेयर सेंटर नहीं है।

यही वजह है कि रास्ते में किसी वाहन का टायर खराब होने पर लोग कमला नेगी से संपर्क करते हैं। जरूरत पड़ने पर वह मौके पर पहुंचकर वाहन का टायर ठीक करने में भी मदद करती हैं।

मेहनत से बनाई अपनी पहचान

कमला नेगी की कहानी सिर्फ एक महिला के टायर ठीक करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि सीखने की इच्छा, निरंतर अभ्यास और मेहनत किसी भी काम में पहचान बना सकती है।

करीब दो दशक पहले साइकिल के पंचर से शुरू हुआ उनका सफर आज भारी मशीनों के टायरों तक पहुंच चुका है। पहाड़ की कठिन परिस्थितियों में अपने हुनर के दम पर काम करने वाली कमला नेगी स्थानीय स्तर पर महिलाओं की आत्मनिर्भरता और पारंपरिक कामकाज की सीमाओं को चुनौती देने वाली एक मिसाल बनकर सामने आई हैं।

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