सीएसआईआर के 85वें स्थापना दिवस पर सीएसआईआर-सीबीआरआई में ओपन डे कार्यक्रम आयोजित

112 छात्राओं समेत विद्यार्थियों ने देखीं अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, निर्माण तकनीकों और अनुसंधान सुविधाओं की झलक

रुड़की, 25 सितंबर 2026। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के 85वें स्थापना दिवस के अवसर पर सीएसआईआर-केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI), रुड़की में ओपन डे कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं युवाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान, भवन विज्ञान, अभियांत्रिकी तथा आधुनिक निर्माण तकनीकों से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना रहा।

इस अवसर पर देश की वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति में सीएसआईआर के आठ दशकों से अधिक के योगदान, अनुसंधान क्षमताओं, तकनीकी नवाचारों तथा उद्योगोन्मुखी समाधानों को प्रदर्शित किया गया। स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान सीएसआईआर-इंडस्ट्री कनेक्ट एग्जिबिशन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, नई तकनीकों एवं प्रकाशनों का विमोचन तथा सीएसआईआर साइ-आर्ट गैलरी का प्रदर्शन प्रमुख आकर्षण रहे। साथ ही CSIR@85 विशेष प्रकाशन भी जारी किए गए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, डॉ. जितेंद्र सिंह ने अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में सीएसआईआर की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने सीएसआईआर की 85 वर्षों की वैज्ञानिक यात्रा और राष्ट्र की वैज्ञानिक-तकनीकी प्रगति में योगदान को प्रदर्शित करने वाले स्मारक डाक टिकट का भी अनावरण किया।

इसी क्रम में सीएसआईआर-सीबीआरआई, रुड़की द्वारा 25 सितंबर को ओपन डे आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को संस्थान की प्रयोगशालाओं, अनुसंधान सुविधाओं और भवन निर्माण के क्षेत्र में विकसित की जा रही नवीन तकनीकों को करीब से देखने का अवसर मिला।

सीएसआईआर-सीबीआरआई के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार ने विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति जिज्ञासा विकसित करने और अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत मेथोडिस्ट गर्ल्स डिग्री कॉलेज की 112 छात्राओं और 3 संकाय सदस्यों ने सीएसआईआर-सीबीआरआई का भ्रमण किया। संस्थान पहुंचने पर प्रतिभागियों को सीबीआरआई की प्रमुख अनुसंधान गतिविधियों, तकनीकी क्षेत्रों और भवन विज्ञान एवं निर्माण प्रौद्योगिकी में संस्थान की भूमिका की जानकारी दी गई।

भ्रमण का समन्वय डॉ. नीरज जैन, वैज्ञानिक ‘एफ’ एवं प्रमुख, आउटरीच एंड डिसेमिनेशन सर्विसेज द्वारा किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्थान की प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियों, अनुसंधान गतिविधियों और भवन विज्ञान एवं निर्माण तकनीक के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों से अवगत कराया।

राम मंदिर मॉडल ने खींचा विद्यार्थियों का ध्यान

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने डॉ. बिलिग प्रदर्शनी दीर्घा का अवलोकन किया, जहां भवन निर्माण एवं वास्तुकला से संबंधित विभिन्न मॉडल और तकनीकें प्रदर्शित की गई थीं। इस दौरान डॉ. हेमलता, वैज्ञानिक ‘डी’ ने राम मंदिर मॉडल की वास्तुकला एवं निर्माण संबंधी विशेषताओं के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी।

उन्होंने मॉडल के माध्यम से निर्माण तकनीक, संरचनात्मक विशेषताओं और भवन निर्माण में वैज्ञानिक एवं तकनीकी दृष्टिकोण के महत्व को समझाया।

वहीं डॉ. चंदन स्वरूप मीणा, वैज्ञानिक ‘ई’ ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए संस्थान में संचालित विभिन्न अनुसंधान एवं तकनीकी परियोजनाओं की जानकारी साझा की। विद्यार्थियों ने अनुसंधान, आधुनिक निर्माण तकनीकों और भवन क्षेत्र में वैज्ञानिक नवाचार से जुड़े सवाल पूछे तथा वैज्ञानिकों से उनके उत्तर प्राप्त किए।

अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं का किया अवलोकन

ओपन डे के दौरान विद्यार्थियों ने संस्थान की महत्वपूर्ण अनुसंधान एवं परीक्षण सुविधाओं का भी भ्रमण किया। इनमें NEETF, 3D सुविधा, फायर सेफ्टी इंजीनियरिंग, रूरल पार्क तथा सोलर थर्मल टेस्टिंग फैसिलिटी लैब प्रमुख रहे।

3D सुविधा में विद्यार्थियों को निर्माण क्षेत्र में उभरती डिजिटल एवं स्वचालित तकनीकों की संभावनाओं से परिचित कराया गया। वहीं फायर सेफ्टी इंजीनियरिंग सुविधाओं के माध्यम से भवनों में अग्नि सुरक्षा, जोखिम न्यूनीकरण और सुरक्षित निर्माण के महत्व को समझाया गया।

रूरल पार्क में विद्यार्थियों ने ग्रामीण एवं किफायती निर्माण तकनीकों तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित समाधानों को देखा। वहीं सोलर थर्मल टेस्टिंग फैसिलिटी के माध्यम से ऊर्जा दक्षता और नवीकरणीय ऊर्जा आधारित तकनीकों के परीक्षण एवं उपयोग की जानकारी प्राप्त की।

वैज्ञानिक अनुसंधान को करीब से समझने का मिला अवसर

ओपन डे कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि वैज्ञानिक अनुसंधान किस प्रकार समाज की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक और तकनीकी समाधान विकसित करने में योगदान देता है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने सुरक्षित, सतत, आपदा-रोधी, ऊर्जा-कुशल एवं किफायती भवन निर्माण में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका को प्रत्यक्ष रूप से समझा। सीएसआईआर-सीबीआरआई का यह आयोजन विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा, अनुसंधान के प्रति रुचि और नवाचार की भावना को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।

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