पूर्ण रूप से प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने रखी अपनी पीड़ा, अधिकारों की रक्षा और समस्याओं के समाधान की उठाई मांग
ग्राम प्रधान सुनीता पंवार, जिला पंचायत सदस्य जोत सिंह रावत और UJVNL के अधिकारी रहे मौजूद
टिहरी। देहरादून । लखवाड़ बांध परियोजना से पूर्ण रूप से प्रभावित ग्राम रणोगी और कूंणा के ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के समक्ष अपनी बात रखी। इस दौरान ग्रामीणों ने परियोजना से प्रभावित परिवारों की समस्याओं, उनके अधिकारों और लंबित मांगों को प्रमुखता से उठाते हुए प्रशासन से गंभीरता के साथ समाधान सुनिश्चित करने की अपेक्षा जताई।
ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर आयोजित इस मुलाकात के दौरान ग्राम प्रधान श्रीमती सुनीता पंवार, जौनपुर क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य श्री जोत सिंह रावत तथा उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL) के अधिकारी भी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने अपनी परेशानियों और अपेक्षाओं से अधिकारियों को अवगत कराते हुए कहा कि बांध परियोजना से पूर्ण रूप से प्रभावित गांवों के लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाना चाहिए।
प्रभावित ग्रामीणों के अधिकारों का हो सम्मान
लखवाड़ बांध परियोजना से प्रभावित रणोगी और कूंणा के ग्रामीणों ने अपने मुद्दों को प्रशासन के समक्ष रखते हुए प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा और उनकी समस्याओं के उचित निस्तारण पर जोर दिया। ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग उनकी परिस्थितियों को समझते हुए प्रत्येक समस्या पर गंभीरता से विचार करें और समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाएं।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवारों की बात सुनना और उनकी जायज मांगों पर कार्रवाई करना बेहद जरूरी है। परियोजना से प्रभावित लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े, इसके लिए प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्य किए जाने की आवश्यकता है।
प्रशासन और संबंधित विभागों से ठोस कार्रवाई की अपेक्षा
उपजिलाधिकारी के समक्ष अपनी बात रखने पहुंचे ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी उचित कार्रवाई करेंगे। वहीं, जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने प्रभावित ग्रामीणों के मुद्दों को प्रशासन तक पहुंचाने के प्रयास को महत्वपूर्ण बनाया।
लखवाड़ बांध से पूर्ण रूप से प्रभावित रणोगी और कूंणा के ग्रामीणों की मांग है कि उनकी आवाज को गंभीरता से सुना जाए, उनके अधिकारों का सम्मान किया जाए और उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने के लिए ठोस पहल की जाए।
ग्रामीणों का संदेश साफ है—विकास परियोजनाओं से प्रभावित लोगों की समस्याओं और अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। प्रभावित परिवारों को न्यायसंगत समाधान मिले और उनकी आवाज जिम्मेदार अधिकारियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचे।
