हरीश रावत की यात्रा से कांग्रेस में क्यों खौफ?

आलाकमान ने जताई आपत्ति, प्रदेश कांग्रेस से समानांतर कार्यक्रम न चलाने की हिदायत; चिट्ठी के बावजूद रावत ने जारी किया नया भ्रमण कार्यक्रम

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस में विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत की प्रस्तावित ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर कांग्रेस आलाकमान ने आपत्ति जताई है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा ने 1 अक्टूबर 2026 को हरीश रावत को लिखे पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा है कि राज्य में निकाली जा रही यात्रा के संबंध में न तो उनसे और न ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से चर्चा की गई है।

आलाकमान की ओर से भेजी गई चिट्ठी में यह भी कहा गया है कि रावत द्वारा हाल में कुछ विवादित बयान दिए गए हैं और अगले कुछ महीनों में प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे समय में पार्टी को एकजुट होकर चुनाव की तैयारी करने की जरूरत है।

‘समानांतर कार्यक्रम पार्टी के हित में नहीं’

कुमारी सैलजा ने अपने पत्र में लिखा कि इस समय राज्य में पार्टी को एकजुट मोर्चे के साथ आगे बढ़ना है। ऐसे में प्रदेश कांग्रेस के समानांतर कोई कार्यक्रम पार्टी के हित में नहीं होगा।

पत्र में हरीश रावत से इन कार्यक्रमों को आगे न बढ़ाने के लिए भी कहा गया है। यानी कांग्रेस आलाकमान ने रावत की प्रस्तावित यात्रा को लेकर अपनी आपत्ति स्पष्ट रूप से सामने रख दी है।

आलाकमान की चिट्ठी के बाद भी जारी हुआ कार्यक्रम

दिलचस्प बात यह है कि आलाकमान की इस आपत्ति के बीच हरीश रावत की ओर से 5 अक्टूबर का ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ कार्यक्रम जारी किया गया है। कार्यक्रम के अनुसार रावत आज कुमाऊं क्षेत्र के जसपुर से हल्द्वानी तक कई स्थानों पर जनता से संवाद करेंगे।

व्यापारी, किसान और आम जनता से संवाद का दावा

हरीश रावत की ओर से प्रस्तावित इस यात्रा का उद्देश्य व्यापारियों, किसानों और आम जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझना और उनसे सीधा संवाद स्थापित करना बताया गया है।

लेकिन पार्टी के भीतर सवाल यह उठ रहा है कि जब विधानसभा चुनाव बेहद करीब हैं और कांग्रेस संगठन को एकजुट होकर चुनावी रणनीति पर काम करना है, तब रावत की अलग यात्रा से पार्टी को राजनीतिक तौर पर क्या संदेश जाएगा?

कांग्रेस में बढ़ेगी अंदरूनी खींचतान?

हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे अनुभवी और प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। ऐसे में उनकी सक्रियता को नजरअंदाज करना पार्टी के लिए आसान नहीं है। दूसरी ओर, आलाकमान की ओर से यात्रा रोकने की सलाह और उसके बाद भी कार्यक्रम जारी होने से कांग्रेस के भीतर संगठन बनाम व्यक्तिगत जनसंपर्क कार्यक्रम को लेकर बहस तेज हो सकती है।

सियासी गलियारों में अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या हरीश रावत आलाकमान की सलाह मानकर अपनी यात्रा रोकेंगे, या फिर जनता के बीच अपना जनसंवाद कार्यक्रम जारी रखेंगे?

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड कांग्रेस में यह घटनाक्रम पार्टी की अंदरूनी राजनीति और नेतृत्व के बीच तालमेल के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दून वैली टाइम्स का सवाल

अगर यह यात्रा पार्टी के समानांतर नहीं है तो आलाकमान को आपत्ति क्यों? और अगर पार्टी नेतृत्व इसे समानांतर कार्यक्रम मान रहा है, तो क्या हरीश रावत अपनी यात्रा रोकेंगे?

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