दो कर्मचारी निलंबित, तीन सदस्यीय जांच समिति गठित; 350 खाताधारकों के खातों की होगी जांच
पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के खिर्सू विकासखंड स्थित जाख डाकघर में खाताधारकों के खातों से कथित फर्जी निकासी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद डाक विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। आरोप है कि डाकघर में तैनात हरियाणा मूल के ब्रांच पोस्टमास्टर और सहायक पोस्टमास्टर ने खाताधारकों के खातों से बिना अनुमति धनराशि निकाली। मामले को लेकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है।
शिकायत के अनुसार, एक खाताधारक के खाते से करीब 80 हजार रुपये और दूसरे के खाते से लगभग एक लाख रुपये की निकासी बिना जानकारी के की गई। इसके बाद खाताधारकों और जनप्रतिनिधियों ने कोतवाली श्रीनगर में शिकायत दर्ज कराते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
क्षेत्र पंचायत सदस्य सुरजीत सिंह बिष्ट ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद पौड़ी से डाक विभाग की जांच टीम मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में खातों में जमा और निकासी से जुड़ी कई अनियमितताएं सामने आई हैं।
डाक अधीक्षक विपिन भट्ट ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। डाकघर का कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए फिलहाल एक अन्य कर्मचारी की तैनाती की गई है।
जांच अधिकारी एवं डाक निरीक्षक अवधेश कुमार ने बताया कि ग्राम प्रधान को जाख डाकघर से जुड़े सभी खाताधारकों की पासबुक विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। जाख डाकघर के अंतर्गत जाख, दोंदड़ी, चिमनियूं, थापला, संगलदर और असिंगी गांवों के करीब 350 खाताधारकों के खातों की जांच की जाएगी। सभी पासबुक और लेन-देन के रिकॉर्ड का मिलान कर यह पता लगाया जाएगा कि किन खातों से कितनी धनराशि की कथित फर्जी निकासी हुई है।
इस बीच जाख के ग्राम प्रधान मनीष रावत ने भी डाकघर के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि 6 जून को कैनरा बैंक द्वारा जारी उनका एटीएम कार्ड आज तक उन्हें नहीं मिला, जबकि उनका घर डाकघर से महज 50 मीटर दूर है। पूछताछ करने पर कर्मचारियों ने बताया कि कार्ड डाकघर में ही पड़ा हुआ है।
ग्राम प्रधान ने यह भी आरोप लगाया कि डाक कर्मचारियों ने उनकी पंजीकृत डाक स्वयं रिसीव कर ली, लेकिन उसे संबंधित व्यक्ति तक नहीं पहुंचाया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के व्यवहार और कार्यशैली को लेकर पहले भी विभागीय अधिकारियों से शिकायत की गई थी, लेकिन उस समय कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अब कथित फर्जी निकासी का मामला सामने आने के बाद विभाग ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
फिलहाल डाक विभाग और पुलिस दोनों मामले की जांच में जुटे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।




