देहरादून/टिहरी। दिल्ली–यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-507) पर स्थित लखवाड़ डैम परियोजना क्षेत्र में मंगलवार सुबह करीब 9 बजे एक बार फिर पहाड़ का बड़ा हिस्सा दरक गया। घटना डैम के टॉप के समीप हुई, जिससे क्षेत्र में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया। राहत की बात यह रही कि घटना के समय किसी जनहानि की सूचना नहीं मिली, लेकिन लगातार हो रहे भूस्खलन ने परियोजना क्षेत्र की सुरक्षा और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस पहाड़ी को परियोजना के लिए सबसे मजबूत और सुरक्षित बताया जा रहा था, वहीं अब लगातार चट्टानें टूटकर गिर रही हैं। आए दिन हो रही ऐसी घटनाएं परियोजना में कार्यरत श्रमिकों, स्थानीय ग्रामीणों और एनएच-507 से गुजरने वाले हजारों यात्रियों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि यदि समय रहते पहाड़ी की स्थिरता का वैज्ञानिक आकलन, सुरक्षा उपाय और ढलानों का उचित उपचार नहीं किया गया तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने संबंधित विभागों से तत्काल भू-वैज्ञानिक जांच कराने और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
इस घटना के बाद एलएंडटी (L&T) कंपनी की कार्यप्रणाली और परियोजना के निर्माण मानकों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि परियोजना क्षेत्र में लगातार हो रही भूस्खलन की घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए, ताकि वास्तविक कारण सामने आ सकें और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
क्षेत्रवासियों ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ संबंधित विभागों से मांग की है कि परियोजना क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा कर श्रमिकों, स्थानीय निवासियों और यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।





