मेहरकोट में सड़क को लेकर उबाल, ग्रामीणों का ऐलान—“रोड नहीं तो वोट नहीं”

विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी, 200 मीटर सड़क के लिए वर्षों से संघर्ष; बच्चों से लेकर महिलाओं तक ने उठाई आवाज

देहरादून। राजधानी से महज 15 किलोमीटर दूर पोंधा ग्राम पंचायत के मजरे मेहरकोट में सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब आंदोलन में बदलता दिखाई दे रहा है। करीब 200 मीटर सड़क के निर्माण की मांग को लेकर वर्षों से संघर्ष कर रहे ग्रामीणों ने विधानसभा चुनाव से पहले “रोड नहीं तो वोट नहीं” का नारा बुलंद करते हुए चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दी है।

ग्रामीणों के मुताबिक मेहरकोट पहुंचने वाला रास्ता बेहद खतरनाक स्थिति में है। बरसात में मलबा, भू-कटाव और पेड़ गिरने से आवाजाही मुश्किल हो जाती है। हाल ही में बारिश के बाद रास्ता क्षतिग्रस्त होने पर ग्रामीणों, महिलाओं और युवाओं ने खुद श्रमदान कर मार्ग को किसी तरह चलने लायक बनाया।

इलाज से स्कूल तक हर कदम पर संकट

सड़क के अभाव का सबसे बड़ा असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाना हो या आपात स्थिति में वाहन गांव तक पहुंचाना हो, हर बार मुश्किल खड़ी होती है। बच्चों को भी दुर्गम रास्तों से पैदल स्कूल जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते में गुलदार दिखाई देने से बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।

ग्रामीणों के अनुसार गांव का सरकारी स्कूल भी दुर्गम परिस्थितियों के चलते वर्षों पहले बंद हो चुका है। सुविधाओं के अभाव ने गांव से पलायन को भी बढ़ावा दिया है। कभी अच्छी आबादी वाले मेहरकोट में अब करीब 10-12 परिवार ही रह गए हैं।

विधायक निधि से बना हिस्सा भी जर्जर

ग्रामीणों का कहना है कि कुछ वर्ष पूर्व विधायक निधि से सड़क के एक हिस्से का निर्माण कराया गया था, लेकिन करीब 200 मीटर मार्ग आज भी अधूरा है। जो हिस्सा बना था, वह भी समय के साथ जर्जर हो चुका है। ग्रामीणों के मुताबिक वन विभाग से संबंधित अनुमति और नियमों का पेंच सड़क निर्माण में बाधा बना हुआ है।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब अन्य वन क्षेत्रों में सड़क निर्माण का रास्ता निकाला जा सकता है तो मेहरकोट के लिए समाधान क्यों नहीं निकाला जा रहा।

बच्चों ने भी लगाई सड़क की गुहार

सड़क के लिए ग्रामीणों के आंदोलन में अब गांव के मासूम बच्चे भी शामिल हो गए हैं। बच्चों का कहना है कि उन्हें सुरक्षित रास्ता चाहिए, ताकि वे स्कूल आ-जा सकें। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क उनके लिए सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और गांव के अस्तित्व का सवाल है।

चुनाव से पहले सड़क नहीं बनी तो बहिष्कार

लगातार आश्वासनों से नाराज ग्रामीणों ने अब अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उनका कहना है कि यदि विधानसभा चुनाव से पहले मेहरकोट की सड़क का निर्माण नहीं हुआ तो वे चुनाव का बहिष्कार करेंगे।

ग्रामीणों का सीधा संदेश है—“हमें आश्वासन नहीं, सड़क चाहिए।”

मेहरकोट की यह तस्वीर राजधानी के विकास के दावों के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। अब देखना होगा कि ग्रामीणों के चुनाव बहिष्कार के ऐलान के बाद शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस करीब 200 मीटर सड़क की समस्या का स्थायी समाधान कब तक निकालते हैं।

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