चंपावत में पूर्व महिला ग्राम प्रधान को जूतों की माला पहनाने के मामले में 5 महिलाओं समेत 10 दोषियों को 5-5 साल की कैद

एससी-एसटी कोर्ट ने सुनाई सजा, सभी दोषियों पर 37-37 हजार रुपये का जुर्माना; पीड़िता को मिलेगी 2 लाख रुपये की प्रतिकर राशि

चंपावत। बनबसा क्षेत्र के गुदमी गांव में अनुसूचित जनजाति वर्ग से ताल्लुक रखने वाली पूर्व महिला ग्राम प्रधान विनीता राणा के साथ अभद्रता, जातिसूचक गाली-गलौज और जूतों की माला पहनाने के मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। विशेष सत्र न्यायालय (एससी-एसटी कोर्ट) के विशेष सत्र न्यायाधीश/जिला जज अनुज कुमार संगल ने मामले में 5 महिलाओं समेत सभी 10 आरोपियों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को पांच वर्ष के साधारण कारावास और 37 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

यह मामला जुलाई 2024 में क्षेत्र में आई बाढ़ और आपदा के बाद राहत सामग्री वितरण के दौरान सामने आया था। अदालत के फैसले के बाद मामले में दोषियों को सजा मिलने से पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है।

राहत सामग्री वितरण के दौरान हुई थी घटना

अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे जिला शासकीय अधिवक्ता विद्याधर जोशी के अनुसार, घटना 10 जुलाई 2024 की है। उस समय बनबसा क्षेत्र में बाढ़ और आपदा की स्थिति के बाद प्रशासन की ओर से राहत सामग्री वितरित की जा रही थी।

तत्कालीन ग्राम प्रधान विनीता राणा को भी आपदा प्रभावित लोगों के बीच राहत सामग्री वितरण में सहयोग के लिए बुलाया गया था। आरोप है कि उनके मौके पर पहुंचने से पहले ही कुछ ग्रामीणों के उकसावे पर 10 लोगों ने उनके साथ धक्का-मुक्की और अभद्रता की।

अभियोजन के अनुसार, आरोपियों ने पूर्व ग्राम प्रधान के साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और उन्हें अपमानित करते हुए जूतों की माला पहना दी। घटना के बाद मामले को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू हुई और प्रकरण एससी-एसटी कोर्ट में पहुंचा।

5 महिलाओं समेत 10 आरोपी दोषी करार

अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद पांच महिलाओं समेत सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया। दोषी ठहराए गए सभी आरोपी गुदमी, बनबसा, चंपावत के निवासी बताए गए हैं।

दोषियों में हेमा खड़ायत (48), लीला दिगारी (45), जानकी कलौनी (50), दिनेश कलौनी (53), रोहित जेम्स (35), पिंकी जेम्स उर्फ सारिका (43), निखिल जेम्स उर्फ अमन (23), संजीव सिंह (45), निर्मला दिगारी (47) और संदीप लॉरेंस (54) शामिल हैं।

एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में सजा

अदालत ने दोषियों को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई है।

धारा 3(1)(D) के तहत प्रत्येक दोषी को पांच वर्ष का साधारण कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

इसके अलावा धारा 3(1)(M), 3(1)(R) और 3(1)(S) के तहत प्रत्येक धारा में दो-दो वर्ष के साधारण कारावास और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

वहीं भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115, 126, 192, 351, 352 और 221 के तहत प्रत्येक धारा में दो-दो हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।

इस तरह प्रत्येक दोषी पर कुल 37 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त सजा

अदालत के आदेश के अनुसार यदि दोषी निर्धारित अर्थदंड की राशि जमा नहीं करते हैं तो उन्हें अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। BNS की संबंधित धाराओं में अर्थदंड नहीं चुकाने पर 15-15 दिन तथा एससी-एसटी एक्ट की प्रत्येक संबंधित धारा में एक-एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

पीड़िता को मिलेगी 2 लाख रुपये की प्रतिकर राशि

अदालत ने पीड़िता विनीता राणा को प्रतिकर राशि दिलाने का भी आदेश दिया है। दोषियों से वसूल किए जाने वाले जुर्माने में से एक लाख रुपये पीड़िता के बैंक खाते में दिए जाएंगे।

इसके अतिरिक्त राज्य सरकार की ओर से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चंपावत के माध्यम से पीड़िता को एक लाख रुपये की प्रतिकर धनराशि प्रदान की जाएगी। इस तरह पीड़िता को कुल दो लाख रुपये की प्रतिकर राशि मिलने का प्रावधान किया गया है।

अदालत के इस फैसले को सामाजिक सम्मान और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों के साथ होने वाले कथित भेदभाव एवं अपमान के मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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