32 लाख रुपये नकद, 200.5 ग्राम सोना और 12 लग्जरी घड़ियां बरामद; जब्त व फ्रीज संपत्तियों का मूल्य करीब 1.28 करोड़
देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) परीक्षा-2016 में कथित अनियमितताओं और OMR शीट में हेराफेरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED के देहरादून सब-जोनल कार्यालय ने 10 सितंबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत देहरादून में कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।
ED की कार्रवाई का एक प्रमुख केंद्र पूर्व मुख्यमंत्री हरीश सिंह रावत के पूर्व OSD चंदन सिंह जीना का आवास रहा। एजेंसी के अनुसार तलाशी के दौरान जीना के घर से 32 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी, करीब 200.5 ग्राम सोना और 12 लग्जरी कलाई घड़ियां बरामद की गईं। एजेंसी ने जीना और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े बैंक खातों को भी फ्रीज किया है।

OMR शीट में कथित हेराफेरी की जांच
ED के अनुसार VPDO परीक्षा-2016 में OMR उत्तर पुस्तिकाओं में कथित हेराफेरी की गई थी। जांच में एजेंसी को पता चला कि UKSSSC की सुरक्षित अभिरक्षा में रखी गई कुछ OMR उत्तर पुस्तिकाओं को तत्कालीन सचिव के निजी आवास तक पहुंचाया गया।
एजेंसी के मुताबिक वहां अधूरी छोड़ी गई OMR शीटों के रोल नंबर नोट किए जाते थे। इसके बाद संबंधित OMR शीटों को निजी कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों तक पहुंचाया जाता था। ED का आरोप है कि इन कर्मचारियों द्वारा उत्तरों के बुलबुले कथित तौर पर भरे या बदले जाते थे और बाद में OMR शीटों को दोबारा सील कर दिया जाता था।
जांच एजेंसी के अनुसार इस कथित हेराफेरी के बदले बिचौलियों के माध्यम से अवैध रकम के लेन-देन की व्यवस्था की गई थी।
तत्कालीन UKSSSC अधिकारियों और निजी एजेंसी से जुड़े परिसरों पर भी छापे
ED ने कार्रवाई के दौरान UKSSSC के तत्कालीन चेयरमैन, सचिव, परीक्षा नियंत्रक, OMR प्रोसेसिंग का काम करने वाली निजी कंप्यूटर एजेंसी के मालिक और कथित तौर पर साजिश से जुड़े बिचौलियों के परिसरों की भी तलाशी ली।
एजेंसी के मुताबिक इन तलाशी कार्रवाइयों का उद्देश्य परीक्षा में कथित पेपर/OMR हेराफेरी और उससे जुड़े आर्थिक लेन-देन की पूरी कड़ी को खंगालना है।
चंदन सिंह जीना के घर से क्या-क्या मिला?
ED के अनुसार चंदन सिंह जीना के आवास से—
- 32 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी
- करीब 200.5 ग्राम सोना
- 13 सोने के सिक्के
- 7 सोने की चेन
- 12 लग्जरी कलाई घड़ियां
- मोबाइल फोन, जिसे फोरेंसिक जांच के लिए जब्त किया गया
बरामद किए गए।
बरामद घड़ियों में Rolex, Rado, Piaget, Movado, Tissot और Casio Edifice जैसे ब्रांड शामिल बताए गए हैं। ED के अनुसार इन घड़ियों का मूल्यांकन अभी किया जा रहा है।
परिवार के बैंक खाते भी फ्रीज
ED ने PMLA की धारा 17(1A) के तहत चंदन सिंह जीना और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज किया है। एजेंसी के अनुसार इन खातों में कुल 52,16,312 रुपये का क्रेडिट बैलेंस था।
जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि जीना द्वारा किए गए बड़े पैमाने पर नकद खर्च की जानकारी सामने आई है, जिसका स्पष्ट स्रोत उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से मेल नहीं खाता।
1.28 करोड़ की संपत्ति जब्त और फ्रीज
ED के अनुसार चंदन सिंह जीना के आवास से जब्त तथा फ्रीज की गई संपत्तियों का मौजूदा कुल मूल्य करीब 1.28 करोड़ रुपये है। हालांकि, बरामद 12 लग्जरी घड़ियों का मूल्यांकन अभी पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में कुल मूल्य में आगे और बढ़ोतरी हो सकती है।
अन्य पूर्व अधिकारियों के ठिकानों पर भी कार्रवाई
ED की तलाशी कार्रवाई केवल एक परिसर तक सीमित नहीं रही। एजेंसी के अनुसार कई पूर्व UKSSSC अधिकारियों और मामले से जुड़े अन्य लोगों के परिसरों पर भी तलाशी ली गई।
इन स्थानों से भी बेहिसाबी नकदी और सोने के आभूषण बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। तलाशी के दौरान संबंधित व्यक्तियों के मोबाइल फोन और अन्य सामग्री को भी फोरेंसिक जांच के लिए कब्जे में लिया गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के कार्यकाल में OSD रहे थे जीना
ED के अनुसार चंदन सिंह जीना वर्ष 2014 से 2017 के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश सिंह रावत के कार्यकाल में OSD के रूप में कार्यरत रहे थे। एजेंसी के मुताबिक वर्तमान में भी वह पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के व्यक्तिगत सहायक (PA) के तौर पर कार्यरत हैं।
आगे की जांच पर टिकी नजर
VPDO परीक्षा-2016 से जुड़े इस मामले में अब ED कथित OMR हेराफेरी, UKSSSC के तत्कालीन अधिकारियों, निजी कंप्यूटर एजेंसी, बिचौलियों और कथित आर्थिक लेन-देन के बीच संबंधों की जांच कर रही है।
एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है। बरामद नकदी, सोना, बैंक खातों और अन्य संपत्तियों के स्रोत तथा कथित मनी ट्रेल को लेकर भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
नोट: उपरोक्त खबर में लगाए गए आरोप और बरामदगी संबंधी विवरण प्रवर्तन निदेशालय की जांच/दावों पर आधारित हैं। किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।
