कनिष्ठ आईएफएस अधिकारी के तबादले पर घिरे प्रमुख सचिव सुधांशु, हाई कोर्ट में बिना शर्त माफी की पेशकश

अवमानना मामले में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु ने दाखिल किया अनुपालन शपथपत्र, कहा—कोर्ट के आदेश की अवहेलना की कल्पना भी नहीं कर सकता

देहरादून/नैनीताल। कनिष्ठ आईएफएस अधिकारी पंकज कुमार के तबादले से जुड़े मामले में उत्तराखंड सरकार के प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण आरके सुधांशु हाई कोर्ट में दायर अवमानना याचिका के चलते चर्चा में हैं। मामले में उन्होंने हाई कोर्ट के समक्ष अनुपालन शपथपत्र दाखिल करते हुए बिना शर्त माफी की पेशकश की है। हालांकि, शपथपत्र में उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि यदि अदालत यह निष्कर्ष निकालती है कि उनकी ओर से अनजाने में किसी प्रकार की अवमानना हुई है, तभी यह माफी लागू होगी।

सुधांशु ने अपने शपथपत्र में कहा है कि किसी भी कथित चूक को जानबूझकर या स्वेच्छा से हाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना के रूप में न देखा जाए। उन्होंने अदालत के आदेशों के प्रति सर्वोच्च सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि वह कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने की कल्पना भी नहीं कर सकते।

मामला अवमानना याचिका पंकज कुमार बनाम रमेश कुमार सुधांशु एवं अन्य से संबंधित है। याचिका अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 12 और उत्तराखंड हाई कोर्ट रूल्स के तहत दाखिल की गई है। विवाद का संबंध चमोली जिले में तैनात कनिष्ठ आईएफएस अधिकारी पंकज कुमार के तबादले से जुड़ा है।

तीन अधिकारी बनाए गए प्रतिवादी

अवमानना मामले में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु के अलावा मुकेश कुमार राय, वर्तमान संयुक्त सचिव, पर्यावरण एवं वन, उत्तराखंड तथा रंजन कुमार मिश्रा, वर्तमान प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स (पीसीसीएफ एवं एचओएफ) को भी प्रतिवादी बनाया गया है।

29 अगस्त 2026 को दाखिल अनुपालन शपथपत्र में सुधांशु ने स्वयं को वर्तमान में प्रमुख सचिव, वन एवं पर्यावरण, उत्तराखंड सरकार के पद पर तैनात बताया है। उन्होंने कहा है कि वह मामले में प्रतिवादी नंबर एक हैं और उन्होंने अवमानना याचिका, उसके साथ प्रस्तुत दस्तावेजों तथा संबंधित कार्यालय रिकॉर्ड का अध्ययन किया है।

4 सितंबर 2025 के अंतरिम आदेश से जुड़ा था विवाद

अवमानना मामले की मूल पृष्ठभूमि हाई कोर्ट में दायर रिट याचिका पंकज कुमार बनाम उत्तराखंड सरकार एवं अन्य से जुड़ी है। इस मामले में हाई कोर्ट ने 4 सितंबर 2025 को अंतरिम आदेश पारित किया था। इसी आदेश के अनुपालन को लेकर बाद में अवमानना याचिका दाखिल की गई।

हालांकि, अनुपालन शपथपत्र में सुधांशु की ओर से प्रारंभिक आपत्ति उठाते हुए कहा गया है कि अब अवमानना याचिका निष्प्रभावी हो चुकी है। इसका आधार यह बताया गया है कि जिस मूल रिट याचिका में अंतरिम आदेश पारित हुआ था, उसे हाई कोर्ट ने 13 जुलाई 2026 को परिस्थितियां बदल जाने के कारण निष्प्रभावी मानते हुए निस्तारित कर दिया था।

25 अगस्त 2025 और 13 अप्रैल 2026 के तबादला आदेश बने अहम कड़ी

मामले में आईएफएस अधिकारी पंकज कुमार से संबंधित दो तबादला/तैनाती आदेश महत्वपूर्ण हैं। सरकार की ओर से 25 अगस्त 2025 को एक तबादला आदेश जारी किया गया था। इसके बाद 13 अप्रैल 2026 को एक नया तबादला/तैनाती आदेश जारी किया गया।

बाद में सरकार ने इन दोनों आदेशों को वापस ले लिया। अनुपालन शपथपत्र में राज्य सरकार की ओर से जारी उन आदेशों का भी उल्लेख किया गया है, जिनके माध्यम से 25 अगस्त 2025 तथा 13 अप्रैल 2026 के तबादला/तैनाती आदेश वापस लिए जाने की जानकारी दी गई है।

7 जुलाई को दोनों तबादला आदेश वापस

हाई कोर्ट की 13 जुलाई 2026 की कार्यवाही को भी अनुपालन शपथपत्र के साथ संलग्न किया गया है। कार्यवाही के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 25 अगस्त 2025 का तबादला आदेश 7 जुलाई 2026 को वापस ले लिया गया था।

इसके बाद 13 अप्रैल 2026 को जारी नया तबादला आदेश भी 7 जुलाई 2026 को ही वापस ले लिया गया।

राज्य की ओर से दोनों आदेश अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए। इसके बाद हाई कोर्ट की पीठ ने माना कि बदली हुई परिस्थितियों में पंकज कुमार की मूल रिट याचिका अब निष्प्रभावी हो चुकी है। इसके आधार पर रिट याचिका का निस्तारण कर दिया गया। मामले से जुड़े लंबित आवेदन भी निस्तारित कर दिए गए।

प्रमुख सचिव ने कहा—आदेशों का पालन करना हमेशा प्राथमिकता रही

अनुपालन शपथपत्र में आरके सुधांशु ने अपने पक्ष में कहा है कि वह एक जिम्मेदार सरकारी सेवक हैं और हाई कोर्ट तथा उसके आदेशों के प्रति उनके मन में सर्वोच्च सम्मान है।

उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा अदालत के आदेशों का उनके अक्षर और भावना दोनों के अनुरूप पालन करने का ईमानदार प्रयास किया है और भविष्य में भी ऐसा करते रहेंगे।

शपथपत्र में उन्होंने यह भी कहा है कि वह हाई कोर्ट के किसी आदेश को तोड़ने या उसकी अवहेलना करने की कल्पना तक नहीं कर सकते।

‘यदि अनजाने में अवमानना हुई तो बिना शर्त माफी’

मामले में सबसे अहम बात प्रमुख सचिव की ओर से की गई माफी की पेशकश है। शपथपत्र में कहा गया है कि यदि हाई कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि उनकी ओर से अनजाने में किसी भी प्रकार की अवमानना हुई है, तो वह बिना शर्त माफी मांगते हैं।

हालांकि, इसके साथ उन्होंने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि किसी कथित चूक को जानबूझकर या स्वेच्छा से की गई अवज्ञा न माना जाए।

सुधांशु ने वर्तमान अवमानना कार्यवाही को बंद करने और उनके खिलाफ जारी अवमानना नोटिस को डिस्चार्ज करने का अनुरोध भी अदालत से किया है।

सरकार का तर्क—अब आदेश उल्लंघन में नहीं

अनुपालन शपथपत्र में सरकार की ओर से मूल रूप से यह तर्क रखा गया है कि जिस अंतरिम आदेश के अनुपालन को लेकर अवमानना की कार्यवाही शुरू हुई, उससे संबंधित मूल रिट याचिका अब 13 जुलाई 2026 को निस्तारित हो चुकी है।

इसके अलावा पंकज कुमार से संबंधित 25 अगस्त 2025 और 13 अप्रैल 2026 के दोनों तबादला/तैनाती आदेश भी 7 जुलाई 2026 को वापस लिए जा चुके हैं।

इसी आधार पर शपथपत्र में कहा गया है कि वर्तमान परिस्थितियों में हाई कोर्ट के किसी आदेश की अवहेलना का प्रश्न नहीं रह गया है।

माफी की भाषा भी कानूनी तौर पर महत्वपूर्ण

मामले में प्रमुख सचिव की ओर से दाखिल शपथपत्र की भाषा भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने सीधे तौर पर अवमानना किए जाने की स्वीकारोक्ति नहीं की है। उनका कहना है कि यदि अदालत यह निष्कर्ष निकालती है कि अनजाने में अवमानना हुई है, तो वह बिना शर्त माफी मांगते हैं।

साथ ही उन्होंने यह अनुरोध किया है कि कथित चूक को जानबूझकर या स्वेच्छा से की गई अवज्ञा नहीं माना जाए।

इस तरह कनिष्ठ आईएफएस अधिकारी पंकज कुमार के तबादले से शुरू हुआ विवाद पहले हाई कोर्ट की रिट याचिका तक पहुंचा और बाद में अवमानना कार्यवाही का रूप ले गया। सरकार द्वारा दोनों तबादला आदेश वापस लिए जाने और मूल रिट के निस्तारण के बाद अब प्रमुख सचिव आरके सुधांशु ने अदालत के समक्ष अनुपालन शपथपत्र दाखिल कर अपना पक्ष रखा है तथा संभावित अनजाने उल्लंघन की स्थिति में बिना शर्त माफी की पेशकश की है।

अब हाई कोर्ट के आदेश पर नजर

फिलहाल इस मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम हाई कोर्ट की ओर से लिया जाने वाला निर्णय होगा। अदालत अनुपालन शपथपत्र, सरकार की ओर से दोनों तबादला आदेश वापस लिए जाने की स्थिति और की गई माफी की पेशकश को किस रूप में देखती है, यह आगे की कार्यवाही में स्पष्ट होगा।

दून वैली टाइम्स की नजर अब इस मामले में हाई कोर्ट के अगले आदेश पर रहेगी।

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