ब्लॉक प्रमुख डॉ. आरती किरौला ने अतिथि सूची, प्रोटोकॉल और राजनीतिक निष्पक्षता पर मांगा जवाब
अल्मोड़ा। उत्तराखंड के द्वाराहाट में आयोजित तृतीय पंचायती राज व्यवस्था के प्रशिक्षण कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक निष्पक्षता, पारदर्शिता और सरकारी प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े हो गए हैं। द्वाराहाट की ब्लॉक प्रमुख डॉ. आरती किरौला ने कार्यक्रम में अतिथियों के चयन और मंच व्यवस्था पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं से जुड़ा विषय बताया है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था लोकतंत्र की जमीनी नींव है और इससे संबंधित सरकारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में पारदर्शिता एवं निष्पक्षता का पालन किया जाना चाहिए।
डॉ. आरती किरौला के अनुसार, द्वाराहाट के पुष्कर मैदान में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिस प्रकार अतिथियों का चयन किया गया और मंच पर विभिन्न लोगों को स्थान दिया गया, उससे कई सवाल उत्पन्न हुए हैं। उन्होंने खंड विकास कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक पत्र का हवाला देते हुए कहा कि उसमें मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं थे। ऐसे में सवाल उठता है कि जिला स्तर पर जिन लोगों को आमंत्रित अतिथि बताया गया और कार्यक्रम के दौरान मंच पर स्थान दिया गया, उनकी जानकारी पंचायत प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराए गए आधिकारिक पत्र में क्यों नहीं दी गई?
अतिथि सूची को लेकर उठाए सवाल
ब्लॉक प्रमुख डॉ. किरौला ने सवाल किया कि यदि जिला स्तर पर अतिथियों की सूची पहले से निर्धारित थी, तो उसे आधिकारिक पत्र में स्पष्ट रूप से शामिल क्यों नहीं किया गया? सरकारी कार्यक्रमों में आमंत्रित अतिथियों की सूची और उनकी भूमिका को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार का भ्रम या पक्षपात की आशंका पैदा न हो।
उन्होंने कहा कि इस मामले में संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट करना चाहिए कि अतिथियों का चयन किस प्रक्रिया के तहत किया गया और कार्यक्रम की आधिकारिक सूची में नाम शामिल करने के क्या मानदंड निर्धारित थे।
मेयर, प्रभारी मंत्री और भाजपा पदाधिकारियों की मौजूदगी पर सवाल
डॉ. आरती किरौला ने कार्यक्रम में मेयर, प्रभारी मंत्री और पूर्व जनप्रतिनिधियों को मंच पर स्थान दिए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विशेष रूप से उन पूर्व जनप्रतिनिधियों का उल्लेख किया, जो वर्तमान में भाजपा के संगठनात्मक पदों पर कार्यरत हैं।
उन्होंने सवाल किया कि क्या कार्यक्रम में मंचासीन इन लोगों में से सभी वर्तमान में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की किसी इकाई—ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत या जिला पंचायत—के निर्वाचित सदस्य अथवा आधिकारिक प्रतिनिधि हैं? यदि नहीं, तो उन्हें पंचायती राज व्यवस्था से संबंधित आधिकारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में अतिथि बनाने और मंच पर स्थान देने का आधार क्या था?
ब्लॉक प्रमुख ने मंडल अध्यक्ष और भाजपा महामंत्री को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि ये पदाधिकारी आधिकारिक आमंत्रित अतिथियों की सूची में शामिल नहीं थे, तो उन्हें सरकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम के मंच पर किस प्रोटोकॉल के तहत बैठाया गया? उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
‘किसी व्यक्ति का विरोध नहीं, सरकारी कार्यक्रम की निष्पक्षता पर सवाल’
डॉ. किरौला ने स्पष्ट किया कि उनका सवाल किसी व्यक्ति विशेष की उपस्थिति का विरोध करना नहीं है। उनके अनुसार, यह मुद्दा सरकारी कार्यक्रम की निष्पक्षता, पारदर्शिता और निर्धारित प्रोटोकॉल के पालन से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि पंचायती राज किसी राजनीतिक दल की व्यवस्था नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की महत्वपूर्ण आधारशिला है। ऐसे कार्यक्रमों में पंचायत प्रतिनिधियों को उनके अधिकारों, जिम्मेदारियों और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के संबंध में प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। यदि इसी मंच की व्यवस्था पर राजनीतिक निष्पक्षता को लेकर प्रश्न उठते हैं, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
सरकार से मांगा जवाब, 2027 की राजनीतिक तैयारी को लेकर भी उठाया प्रश्न
ब्लॉक प्रमुख ने राज्य सरकार से सवाल किया कि जिन लोगों को प्रशिक्षण कार्यक्रम में अतिथि बनाया गया, क्या वे पंचायती राज व्यवस्था की किसी इकाई का हिस्सा थे? यदि नहीं, तो उन्हें अतिथि बनाने का निर्णय किस आधार पर लिया गया और इसके लिए कौन-सा आधिकारिक प्रोटोकॉल अपनाया गया?
उन्होंने यह भी पूछा कि क्या प्रदेश के अन्य जिलों में आयोजित किए जा रहे पंचायती राज प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी इसी प्रकार की व्यवस्था अपनाई जा रही है। डॉ. किरौला ने सवाल उठाया कि यदि सरकारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में राजनीतिक पदाधिकारियों को इसी तरह मंच पर स्थान दिया जा रहा है, तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देना है या इनके माध्यम से आगामी वर्ष 2027 की राजनीतिक तैयारी भी की जा रही है?
हालांकि, राजनीतिक तैयारी को लेकर उठाया गया यह सवाल डॉ. किरौला की आशंका और आरोप के रूप में सामने आया है। इस संबंध में संबंधित विभाग या शासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
‘लोकतंत्र की जमीनी व्यवस्था पर सवाल उठना चिंताजनक’
डॉ. आरती किरौला ने कहा कि एक ब्लॉक प्रमुख के रूप में उन्हें इस बात से शर्मिंदगी महसूस हो रही है कि जिस पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने की जिम्मेदारी निर्वाचित प्रतिनिधियों की है, उसी व्यवस्था से जुड़े सरकारी मंच पर निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाने पड़ रहे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में सरकारी मर्यादा, पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोपरि होनी चाहिए। प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन निर्धारित नियमों और प्रोटोकॉल के अनुरूप किया जाना चाहिए, ताकि पंचायत प्रतिनिधियों का विश्वास लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रशासनिक व्यवस्था में बना रहे।
अब सवाल यह है कि अतिथियों के चयन और मंच व्यवस्था को लेकर उठाए गए इन प्रश्नों पर संबंधित विभाग और शासन क्या स्पष्टीकरण देते हैं। इस मामले में खंड विकास कार्यालय, जिला प्रशासन और शासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
