लखवाड़ जलविद्युत परियोजना के श्रमिकों का फिर शुरू हुआ धरना-प्रदर्शन, बोले— अब आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए

तीन साल से समस्याओं से जूझ रहे श्रमिकों ने उठाई परियोजना भत्ता, धूल एवं गैस भत्ता और अन्य सुविधाएं देने की मांग

देहरादून। 300 मेगावाट की लखवाड़ जलविद्युत परियोजना में कार्यरत श्रमिकों का अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक बार फिर धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया है। श्रमिकों का कहना है कि अपनी समस्याओं के समाधान के लिए वे लंबे समय से संबंधित विभागों और अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन बार-बार बैठकें होने और आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे श्रमिकों में नाराजगी बढ़ रही है।

श्रमिकों के अनुसार, उनकी समस्याओं को लेकर उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (UJVNL), उपजिलाधिकारी (SDM), श्रम आयुक्त देहरादून और संबंधित अधिकारियों के साथ कई बार बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों के दौरान समस्याओं के समाधान के लिए समय भी दिया गया, लेकिन श्रमिकों का आरोप है कि निर्धारित समय बीतने के बाद भी उनकी मांगों पर कोई स्पष्ट एवं प्रभावी निर्णय सामने नहीं आया है।

भूमिगत टनल में काम करने वाले श्रमिकों की समस्याएं

श्रमिकों का कहना है कि वे पिछले करीब तीन वर्षों से कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। विशेष रूप से भूमिगत टनल में कार्य करने वाले श्रमिकों को काम के दौरान धूल, गैस और अन्य जोखिमपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में वे परियोजना भत्ता, धूल एवं गैस भत्ता और कार्य की परिस्थितियों के अनुरूप अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

श्रमिकों का कहना है कि भूमिगत निर्माण कार्य में सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। कार्यस्थल पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, उचित सुविधाएं और नियमानुसार मिलने वाले लाभ सुनिश्चित करना संबंधित प्रबंधन की जिम्मेदारी है।

उनका आरोप है कि इन मुद्दों को कई बार अधिकारियों के सामने उठाया गया, लेकिन अब तक अपेक्षित समाधान नहीं मिल पाया है। इसी कारण श्रमिकों को दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।

बैठकों के बाद भी समाधान नहीं, श्रमिकों में नाराजगी

श्रमिकों ने सवाल उठाया है कि जब उनकी समस्याओं को लेकर कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं, तो फिर निर्णय लेने में देरी क्यों हो रही है? उनका कहना है कि हर बार आश्वासन देकर आगे की तारीख दे देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

श्रमिकों की मांग है कि संबंधित विभाग और परियोजना प्रबंधन उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करें और सभी प्रमुख मांगों के संबंध में स्पष्ट लिखित निर्णय जारी करें। उनका कहना है कि जब तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक समस्याओं के समाधान को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी।

श्रमिकों के प्रमुख सवाल

  • कई बार बैठकें होने के बावजूद मांगों पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • भूमिगत टनल में काम करने वाले श्रमिकों को परियोजना भत्ता और धूल एवं गैस भत्ता कब मिलेगा?
  • श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यस्थल की सुविधाओं को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
  • संबंधित अधिकारी और परियोजना प्रबंधन मांगों पर लिखित निर्णय कब जारी करेंगे?
  • श्रमिकों को बार-बार आश्वासन देने के बजाय समयबद्ध समाधान कब मिलेगा?

‘अब केवल आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए’

श्रमिकों ने स्पष्ट किया है कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने अधिकारों, सम्मान, सुरक्षा और न्याय के लिए है। उनका कहना है कि वे परियोजना के निर्माण कार्य में अपनी भूमिका निभा रहे हैं और उन्हें भी नियमानुसार मिलने वाले लाभ तथा सुरक्षित कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित की जानी चाहिए।

श्रमिकों ने संबंधित विभागों, अधिकारियों और परियोजना प्रबंधन से मांग की है कि उनकी सभी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए समयबद्ध कार्रवाई की जाए। साथ ही, बैठक में लिए जाने वाले निर्णयों को लिखित रूप में उपलब्ध कराया जाए, ताकि श्रमिकों को बार-बार आश्वासन के भरोसे इंतजार न करना पड़े।

लखवाड़ जलविद्युत परियोजना से जुड़े इस मामले में अब संबंधित विभागों और परियोजना प्रबंधन की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। श्रमिकों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है और आंदोलन का आगे क्या रुख रहता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

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