जौनसार-बावर में गूंजेगा जय चालदा महासू महाराज का जयकारा!

3 दिसंबर से शुरू होगी छत्रधारी चालदा महासू महाराज की देवयात्रा, 7 दिसंबर को खत मशक मंदिर में होंगे विराजमान

पाश्मी से द्रविल, बायला, तिलोर छानी और कांडोई भरम होते हुए खत मशक पहुंचेगी देवयात्रा; महाराज के भव्य स्वागत की तैयारियों में जुटेंगे क्षेत्रवासी

दीवान सिंह तोमर|दून वैली टाइम्स

चकराता, देहरादून । जौनसार-बावर की समृद्ध लोकसंस्कृति, आस्था और सदियों पुरानी देवपरंपरा से जुड़ा एक विशेष अवसर नजदीक आ रहा है। छत्रधारी चालदा महासू महाराज के खत मशक आगमन का कार्यक्रम निर्धारित कर दिया गया है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 3 दिसंबर से महाराज की देवयात्रा शुरू होगी और पांच दिनों के विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए 7 दिसंबर को महाराज खत मशक स्थित मंदिर में विराजमान होंगे। इस धार्मिक आयोजन को लेकर क्षेत्रवासियों में उत्साह और श्रद्धा का माहौल है।

महासू देवता के प्रति जौनसार-बावर के लोगों की गहरी आस्था रही है। यहां की सामाजिक व्यवस्था, लोकजीवन और सांस्कृतिक पहचान में देवपरंपराओं का महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे में छत्रधारी चालदा महासू महाराज का आगमन केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, सामूहिक सहभागिता और पारंपरिक रीति-रिवाजों से जुड़ा विशेष अवसर माना जा रहा है।

पांच दिन, पांच पड़ाव—इस क्रम में आगे बढ़ेगी देवयात्रा

निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, 3 दिसंबर को छत्रधारी चालदा महासू महाराज पाश्मी से द्रविल पधारेंगे। 4 दिसंबर को महाराज द्रविल से बायला पहुंचेंगे। इसके बाद 5 दिसंबर को देवयात्रा बायला से तिलोर छानी के लिए आगे बढ़ेगी। 6 दिसंबर को महाराज तिलोर से कांडोई भरम पधारेंगे। देवयात्रा के अंतिम चरण में 7 दिसंबर को महाराज खत मशक स्थित मंदिर में विराजमान होंगे।

इन पड़ावों के माध्यम से देवयात्रा क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं और स्थानीय आस्था से जुड़े विभिन्न स्थानों से होकर गुजरेगी। प्रत्येक पड़ाव पर महाराज के आगमन को श्रद्धा और पारंपरिक सम्मान के साथ मनाए जाने की उम्मीद है।

स्वागत की तैयारियों में सहभागिता की अपील

महाराज के आगमन कार्यक्रम की जानकारी देते हुए सदर स्याना, खत मशक, फतेह सिंह चौहान ने समस्त क्षेत्रवासियों को इस पावन अवसर की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे एकजुट होकर महाराज के भव्य आगमन की तैयारियों में सहयोग करें और परंपरानुसार उनका स्वागत करें।

क्षेत्रवासियों से सामूहिक सहयोग की अपील इस आयोजन के महत्व को और बढ़ाती है। ऐसे अवसरों पर स्थानीय लोग मिलकर व्यवस्थाओं में योगदान देते हैं और अपनी सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में भूमिका निभाते हैं।

आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक

जौनसार-बावर की विशिष्ट देवसंस्कृति उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। छत्रधारी चालदा महासू महाराज की देवयात्रा इसी परंपरा से जुड़ी है। महाराज के खत मशक आगमन को लेकर क्षेत्रवासियों की निगाहें अब निर्धारित तिथियों पर टिकी हैं। 7 दिसंबर को मंदिर में महाराज के विराजमान होने के साथ यह यात्रा अपने प्रमुख पड़ाव पर पहुंचेगी।

समस्त क्षेत्रवासियों ने महाराज के मंगलमय आगमन की कामना करते हुए उनके आशीर्वाद की प्रार्थना की है।

देवयात्रा कार्यक्रम

  • 3 दिसंबर: पाश्मी से द्रविल
  • 4 दिसंबर: द्रविल से बायला
  • 5 दिसंबर: बायला से तिलोर छानी
  • 6 दिसंबर: तिलोर से कांडोई भरम
  • 7 दिसंबर: खत मशक स्थित मंदिर में विराजमान होंगे महाराज

जय छत्रधारी चालदा महासू महाराज की!

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