नार्को टेस्ट से पहले अभिनेत्री उर्मिला सनावर गिरफ्तार, उत्तराखंड की सियासत में उबाल

अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित ‘VIP’ प्रकरण के बीच कार्रवाई से उठे सवाल; पूर्व विधायक की बेटी की शिकायत पर हरिद्वार पुलिस ने सहारनपुर से किया गिरफ्तार

पांच करोड़ रुपये मांगने, रविदास धाम की संपत्ति अपने नाम कराने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप; अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

दून वैली टाइम| देहरादून/हरिद्वार, उत्तराखंड

उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित ‘VIP’ प्रकरण के बीच अभिनेत्री उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। हरिद्वार पुलिस ने 25 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित उनके आवास से उन्हें गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई, जब सनावर ने 23 अक्टूबर को देहरादून में अदालत के समक्ष नार्को एनालिसिस और पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए सहमति दी थी तथा मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया 26 अक्टूबर को प्रस्तावित थी।

उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं। एक ओर पुलिस का कहना है कि कार्रवाई पूर्व विधायक सुरेश राठौर की बेटी की शिकायत पर दर्ज मुकदमे के आधार पर की गई, वहीं दूसरी ओर नार्को टेस्ट की प्रक्रिया से ठीक पहले गिरफ्तारी के समय को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है, जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि गिरफ्तारी का उद्देश्य किसी कथित VIP को बचाना था।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की बेटी दीपिका राठौर ने 24 अक्टूबर की रात हरिद्वार के रानीपुर कोतवाली में अभिनेत्री उर्मिला सनावर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक और मानहानिकारक टिप्पणियां करने, व्हाट्सऐप कॉल के जरिए रविदास धाम से संबंधित संपत्ति अपने नाम कराने तथा पांच करोड़ रुपये की मांग करने के आरोप लगाए गए।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि मांग पूरी नहीं होने पर उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया और कार्रवाई के लिए टीम गठित की। इसके बाद पुलिस टीम ने सहारनपुर स्थित आवास पर दबिश देकर सनावर को गिरफ्तार किया।

पुलिस के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं और अश्लील चित्रण निषेध अधिनियम, 1986 की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने मामले से जुड़े मोबाइल फोन की बरामदगी की भी जानकारी दी है। इन आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगा। गिरफ्तारी अपने आप में आरोपों को साबित नहीं करती।

नार्को टेस्ट पर सहमति के बाद गिरफ्तारी क्यों?

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू गिरफ्तारी का समय है। 23 अक्टूबर को उर्मिला सनावर और पूर्व विधायक सुरेश राठौर ने अंकिता भंडारी प्रकरण में नार्को एनालिसिस और पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए सहमति दी थी। रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने प्रस्तावित परीक्षणों के संबंध में आगे की प्रक्रिया के लिए 26 अक्टूबर को दोबारा उपस्थित होने को कहा था।

इसी बीच 24 अक्टूबर की रात शिकायत दर्ज हुई और 25 अक्टूबर को गिरफ्तारी कर ली गई। इस क्रम के बाद कई सवाल उठने लगे हैं:

  • नार्को टेस्ट की सहमति के तुरंत बाद दर्ज हुए अलग मुकदमे में गिरफ्तारी की आवश्यकता किन परिस्थितियों में पड़ी?
  • क्या जांच एजेंसियां स्पष्ट करेंगी कि गिरफ्तारी और प्रस्तावित परीक्षण की प्रक्रिया के बीच कानूनी स्थिति क्या है?
  • क्या नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट को लेकर अदालत में आज होने वाली कार्यवाही पर गिरफ्तारी का कोई प्रभाव पड़ेगा?
  • अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित VIP प्रकरण में सामने आए दावों की निष्पक्ष जांच कैसे सुनिश्चित की जाएगी?

इन सवालों का जवाब संबंधित पुलिस अधिकारियों और अदालत की कार्यवाही से स्पष्ट होगा। केवल घटनाओं के क्रम के आधार पर किसी साजिश या राजनीतिक संरक्षण का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

अंकिता भंडारी हत्याकांड और कथित VIP का मुद्दा फिर चर्चा में

वर्ष 2022 में पौड़ी जिले के गंगा-भोगपुर क्षेत्र स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या हुई थी। इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को अदालत ने दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

हाल के दिनों में कथित VIP की भूमिका को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित ऑडियो और सार्वजनिक बयानों ने इस मामले को फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। उर्मिला सनावर ने भी इस प्रकरण में कथित VIP से संबंधित दावे किए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और किसी व्यक्ति की कथित भूमिका का निर्धारण जांच एजेंसियों तथा न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही किया जा सकता है।

अंकिता भंडारी के परिवार और आम लोगों की प्रमुख अपेक्षा है कि मामले से जुड़े प्रत्येक तथ्य की निष्पक्ष जांच हो और यदि कोई नया साक्ष्य सामने आता है तो उसकी कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की जाए।

गिरफ्तारी पर सियासी सवाल, पुलिस का पक्ष भी अहम

उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी ने इस बहस को जन्म दिया है कि एक ओर अंकिता भंडारी प्रकरण में कथित VIP से जुड़े दावों की जांच को लेकर सार्वजनिक अपेक्षाएं बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर उनके खिलाफ एक अलग शिकायत पर पुलिस कार्रवाई हुई है।

पुलिस का आधिकारिक पक्ष है कि गिरफ्तारी दीपिका राठौर की शिकायत और दर्ज मुकदमे के आधार पर की गई। दूसरी ओर, गिरफ्तारी के समय को लेकर उठ रहे सवालों पर स्पष्टता आवश्यक है। दोनों मामलों की कानूनी प्रकृति अलग है और उन्हें एक ही निष्कर्ष से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

अब सबकी नजर 26 अक्टूबर को प्रस्तावित न्यायिक कार्यवाही, नार्को टेस्ट की प्रक्रिया की स्थिति और पुलिस जांच पर है। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित एजेंसियां सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जा सकने वाली जानकारी के माध्यम से उठ रहे सवालों पर स्थिति स्पष्ट करें।

जनता को जवाब चाहिए

अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड की जनता की भावनाओं से जुड़ा मामला है। इसलिए कथित VIP प्रकरण में उठने वाले सवालों की पारदर्शी जांच, उपलब्ध साक्ष्यों का निष्पक्ष परीक्षण और कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।

मुख्य सवाल यही है—नार्को टेस्ट के लिए सहमति के बाद गिरफ्तारी की परिस्थितियां क्या थीं, और इस गिरफ्तारी का प्रस्तावित परीक्षण पर क्या असर पड़ेगा? इसका उत्तर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि आधिकारिक तथ्यों, अदालत की कार्यवाही और निष्पक्ष जांच से सामने आना चाहिए।

दून वैली टाइम्स की नजर इस मामले में होने वाले अगले घटनाक्रम पर बनी रहेगी।

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