स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर तीन अभ्यर्थियों को मेडिकल कॉलेजों में दिलाया गया प्रवेश, SIT की जांच जारी
देहरादून। NEET UG 2025 के तहत एमबीबीएस में दाखिले के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र तैयार कराने के मामले में देहरादून पुलिस की एसआईटी ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में रूपेश पंडित और अरविंद कुमार शामिल हैं। मामले की जांच वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम (SIT) कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, 13 सितंबर 2026 को थाना रायपुर और थाना क्लेमेंटाउन में अलग-अलग अभ्यर्थियों द्वारा सरकारी पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाने और जांच में प्रस्तुत दस्तावेजों के फर्जी पाए जाने के संबंध में शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन शिकायतों के आधार पर थाना रायपुर में मुकदमा अपराध संख्या 380/26 तथा थाना क्लेमेंटाउन में मुकदमा अपराध संख्या 86/26 दर्ज किया गया।
एसएसपी ने गठित की SIT
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने निष्पक्ष और गहन जांच के लिए पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 श्रीमती जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया।
एसआईटी ने जांच के दौरान मामले से जुड़े दस्तावेजों को कब्जे में लेकर उनका परीक्षण किया। पुलिस के अनुसार, जांच में संबंधित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों पर दर्ज पते गलत पाए गए। इसके बाद एसआईटी ने संबंधित शिक्षण संस्थानों में जाकर प्रवेश से जुड़े दस्तावेजों को भी कब्जे में लिया। इन दस्तावेजों के परीक्षण से अभ्यर्थियों के वास्तविक पते और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जानकारी सामने आई।
45-45 लाख रुपये में दाखिले का आरोप
पुलिस के अनुसार, पूछताछ और अब तक सामने आए साक्ष्यों के आधार पर पता चला कि रूपेश पंडित पिछले करीब पांच वर्षों से एजुकेशन कंसल्टेंसी का काम कर रहा था। वह मेरठ में MECODO पाठशाला नाम से एक कंपनी संचालित करता था। पुलिस का कहना है कि इसके माध्यम से विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों और विदेशों में MBBS, B.Tech, BCA, BBA और B.Com सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर दाखिले कराने का काम किया जाता था।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी अरविंद कुमार रूपेश का पुराना परिचित था। अपनी पुत्री के MBBS में दाखिले के लिए अरविंद ने रूपेश से संपर्क किया था। इसके साथ ही उसने दो अन्य परिचितों के बच्चों के MBBS दाखिले की बात भी रखी।
पुलिस के अनुसार, रूपेश और उसके साथियों ने तीनों अभ्यर्थियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे के माध्यम से MBBS में दाखिला दिलाने की बात कही और प्रत्येक दाखिले के लिए 45 लाख रुपये लेने की बात तय हुई। आरोप है कि तीनों अभ्यर्थियों के परिजनों से एडवांस के रूप में 20-20 लाख रुपये लिए गए और बाकी रकम दाखिले तथा कक्षाएं शुरू होने के बाद देने की बात तय हुई।
फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर दाखिले का आरोप
पुलिस का आरोप है कि रूपेश पंडित ने अपने साथियों के साथ मिलकर तीनों अभ्यर्थियों के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए और उनके आधार पर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाए गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में MBBS पाठ्यक्रम में प्रवेश प्राप्त किया।
जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को पूछताछ के लिए थाना रायपुर लाया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों को गिरफ्तार किया गया।
इन दो आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
1. रूपेश पंडित पुत्र गोपाल पंडित
निवासी ग्राम शिवपुरी, थाना केहाट, तहसील/जनपद पूर्णिया, बिहार। वर्तमान पता प्लॉट नंबर 90, द्वारिकापुरी कॉलोनी, थाना ब्रह्मपुरी, मेरठ, उत्तर प्रदेश। उम्र करीब 30 वर्ष।
2. अरविंद कुमार पुत्र विजयपाल सिंह
निवासी ग्राम बहादरपुर खादर, थाना लक्सर, जनपद हरिद्वार।
SIT की जांच जारी
देहरादून पुलिस के अनुसार मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है। एसआईटी द्वारा दस्तावेजों, संबंधित शिक्षण संस्थानों और मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने कहा है कि विवेचना में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर मामले से जुड़े अन्य आरोपियों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
