वायरल वीडियो ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल, जांच और कार्रवाई का इंतजार
चकराता (देहरादून)। उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। चकराता ब्लॉक के सिलामू स्कूल का बताया जा रहा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में कथित तौर पर शिक्षक की गैरमौजूदगी में बच्चे खुद ही पढ़ाई करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद स्कूल में शिक्षकों की उपस्थिति और शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी किसकी?
स्कूलों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार और शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि शिक्षक की अनुपस्थिति में बच्चे स्वयं पढ़ाई करने को मजबूर हैं, तो यह व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल यह भी है कि विद्यालय में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था है और संबंधित अधिकारी इसकी निगरानी किस प्रकार कर रहे हैं?
शिक्षा विभाग की जांच पर टिकी निगाहें
वायरल वीडियो को लेकर अब शिक्षा विभाग की ओर से जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है। विभाग को मामले की वास्तविक स्थिति की जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि वीडियो कब बनाया गया, उस समय शिक्षक विद्यालय में मौजूद थे या नहीं और यदि अनुपस्थित थे, तो इसके पीछे क्या कारण थे।
हालांकि, फिलहाल वीडियो की तारीख, शिक्षक की कथित अनुपस्थिति के कारणों और पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए वायरल वीडियो के आधार पर किसी शिक्षक को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही की मांग
चकराता जैसे दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाना आवश्यक है, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और जिम्मेदारी तय की जा सके।
अब सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग इस वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर जांच करेगा और यदि लापरवाही की पुष्टि होती है, तो क्या कार्रवाई की जाएगी?
