आयोग ने 19 से घटाकर 17% सीयूपीएफ करने की याचिका की खारिज, उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय भार डालने से इनकार
देहरादून। पहाड़ी क्षेत्रों में कम धूप और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला देकर सोलर बिजली के टैरिफ में बढ़ोतरी की मांग को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने खारिज कर दिया है। आयोग ने आरई पावर जनरेटर्स सोसाइटी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के आरई रेगुलेशंस-2023 के तहत निर्धारित 19 प्रतिशत सीयूपीएफ को घटाकर 17 प्रतिशत करने की मांग स्वीकार नहीं की।
याचिकाकर्ता संस्था का तर्क था कि उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में जटिल और ऊबड़-खाबड़ भूगोल के कारण सोलर परियोजनाओं को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती। पहाड़ों और पहाड़ियों की ओट के कारण सुबह और शाम के समय सोलर पैनल अपेक्षित क्षमता से बिजली उत्पादन नहीं कर पाते हैं। इसके चलते परियोजनाओं की उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है।
याचिका में कहा गया था कि पहाड़ी क्षेत्रों में सोलर प्लांट की क्षमता और दक्षता मैदानी क्षेत्रों की तुलना में कम रहती है। संस्था का दावा था कि 19 प्रतिशत सीयूपीएफ को आधार मानकर सरकार कम दर तय करती है, जिससे विकासकर्ताओं को अपनी लागत निकालने में कठिनाई हो रही है और परियोजनाएं घाटे में जा रही हैं।
आयोग ने कहा—नियम किसी एक परियोजना के लिए नहीं बदले जा सकते
सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य (विधि) अनुराग शर्मा और सदस्य (तकनीकी) प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने याचिका खारिज कर दी।
आयोग ने स्पष्ट किया कि नियमों में छूट देने का अधिकार किसी विशेष मामले तक सीमित है। किसी एक परियोजना की परिस्थितियों के आधार पर पूरे राज्य में लागू सामान्य नियमों को बदला नहीं जा सकता। आयोग ने सीयूपीएफ को एक सामान्य तकनीकी मानक बताते हुए कहा कि इसमें बदलाव के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।
यूपीसीएल और यूजेवीएनएल ने किया विरोध
याचिका की सुनवाई के दौरान उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) और उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) ने भी इसका विरोध किया। उनका कहना था कि यदि सीयूपीएफ घटाया जाता है तो सोलर बिजली की दरों में वृद्धि होगी, जिसका सीधा वित्तीय भार बिजली वितरण कंपनियों के माध्यम से आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
दोनों संस्थाओं ने यह भी तर्क दिया कि राज्य में कई सोलर परियोजनाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप काम कर रही हैं और केवल कुछ परियोजनाओं की परिस्थितियों को आधार बनाकर नियामक मानकों में बदलाव करना उचित नहीं होगा।
धरासू पावर हाउस परिसर में सोलर परियोजना को लेकर भी बदलाव
इसी बीच, धरासू पावर हाउस परिसर में प्रस्तावित करीब चार मेगावाट सोलर संयंत्र से जुड़ी परियोजना में भी बदलाव की स्थिति सामने आई है। परियोजना के लिए निजी भूमि पर सोलर प्लांट लगाने की योजना पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
बताया गया कि पूर्व में परियोजना के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि वन विभाग की अनुमति और पेड़ों से जुड़े मामलों के कारण परियोजना में बाधा आई। बाद में भूमि संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ने के बावजूद परियोजना के स्वरूप में बदलाव की स्थिति बनी।
आयोग के निर्देश के बाद संबंधित पक्षों के बीच बैठक भी हुई, जिसमें समाधान निकाला गया। अब विकासकर्ता को निजी जमीन पर सोलर परियोजना स्थापित करने के लिए आवेदन करना होगा। संबंधित परियोजना की तकनीकी जांच के लिए भी प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
