उत्तराखंड के 15 छात्रावासों में बनेंगे डिजिटल क्लासरूम और आधुनिक पुस्तकालय, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को भी मिलेगा लाभ

पहले चरण में अनुसूचित जाति एवं जनजातीय छात्रावासों में होंगी आधुनिक अध्ययन सुविधाएं विकसित, एलईडी स्क्रीन, लैपटॉप, हाईस्पीड इंटरनेट और वाई-फाई से लैस होंगे छात्रावास

देहरादून, 30 अक्टूबर। उत्तराखंड सरकार प्रदेश के अनुसूचित जाति एवं जनजातीय छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा संसाधनों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। समाज कल्याण विभाग की ओर से पहले चरण में प्रदेश के 15 छात्रावासों में डिजिटल क्लासरूम, आधुनिक पुस्तकालय और रीडिंग रूम विकसित किए जाएंगे। इस पहल से विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध होने के साथ-साथ डिजिटल माध्यम से पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में भी मदद मिलेगी।

समाज कल्याण विभाग के सचिव डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी ने बताया कि प्रथम चरण में चयनित 15 अनुसूचित जाति एवं जनजातीय छात्रावासों में आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके तहत छात्रावासों में एलईडी स्क्रीन, लैपटॉप, हाईस्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी और वाई-फाई की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा पुस्तकालयों में विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम से संबंधित पुस्तकों के साथ-साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपयोगी अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को मिलेगी सुविधा

इस योजना का विशेष लाभ उन युवाओं को मिलने की उम्मीद है, जो संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), बैंकिंग तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। आधुनिक पुस्तकालय और रीडिंग रूम उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर अध्ययन सामग्री और शांत वातावरण मिल सकेगा। इससे विशेषकर ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को अपनी तैयारी बेहतर तरीके से करने का अवसर मिलेगा।

दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने की पहल

सचिव समाज कल्याण के अनुसार, प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए छात्रावासों को डिजिटल सुविधाओं से लैस करने की योजना तैयार की गई है। डिजिटल क्लासरूम के माध्यम से विद्यार्थी आधुनिक शिक्षण सामग्री तक पहुंच बना सकेंगे। खास बात यह है कि इन सुविधाओं का लाभ केवल छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में रहकर पढ़ाई करने वाले युवाओं को भी इसका लाभ मिल सकेगा।

प्रदेश में संचालित हैं 20 छात्रावास

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में उत्तराखंड में अनुसूचित जाति के 15 और अनुसूचित जनजाति के 5 छात्रावास संचालित हैं। समाज कल्याण विभाग का उद्देश्य इन छात्रावासों को केवल रहने की सुविधा तक सीमित न रखते हुए उन्हें अध्ययन, डिजिटल शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपयोगी शैक्षणिक केंद्रों के रूप में विकसित करना है।

सरकार की इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि आर्थिक रूप से कमजोर और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी। यदि योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो यह प्रदेश के युवाओं के लिए शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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