पाइपलाइन फटने से सड़क पर बना ‘झरना’, नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष ने मंत्री पर साधा निशाना
दून वैली टाइम्स | मसूरी
पहाड़ों की रानी मसूरी में पेयजल संकट दूर करने के उद्देश्य से तैयार की गई मसूरी-यमुना पंपिंग पेयजल योजना एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। योजना की पाइपलाइन में बार-बार लीकेज और ज्वाइंट खुलने की घटनाओं ने इसकी गुणवत्ता और तकनीकी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालिया घटनाओं में तेज दबाव के साथ पानी बाहर निकलने से सड़क और आसपास के हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा है।

पाइप फटने पर सड़क पर बहा पानी, मचा हड़कंप
मार्च 2025 में मसूरी-कैंपटी रोड पर होटल वाइल्ड फ्लावर के समीप योजना की मुख्य पेयजल लाइन का ज्वाइंट खुलने से तेज दबाव के साथ पानी बाहर निकल पड़ा था। पानी का बहाव इतना तेज था कि सड़क का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ और आसपास मलबा आने के कारण यातायात भी प्रभावित हुआ। मौके पर पहुंची जल निगम की टीम ने पंपिंग बंद कराकर स्थिति को नियंत्रित किया था।
इससे पहले जून 2024 में गांधी चौक के पास योजना की 6 इंच लाइन का वॉल्व फटने से बड़ी मात्रा में पानी बह गया था। उस समय जल निगम के अधिकारियों ने अधिक पानी के दबाव को वॉल्व फटने का कारण बताया था। रिपोर्ट के मुताबिक उस समय यह भी सामने आया था कि योजना का काम अभी पूरी तरह जल संस्थान को हैंडओवर नहीं किया गया था।
बार-बार लीकेज से योजना की गुणवत्ता पर सवाल
मसूरी-यमुना पंपिंग योजना के तहत यमुना से पानी उठाकर मसूरी तक पहुंचाने के लिए लंबी पाइपलाइन और स्टोरेज टैंकों का निर्माण किया गया है। योजना का उद्देश्य मसूरी की बढ़ती आबादी और पर्यटन सीजन में पानी की जरूरत को पूरा करना था।
लेकिन योजना से जुड़े हिस्सों में बार-बार लीकेज और पाइपलाइन के ज्वाइंट खुलने की घटनाओं ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या पाइपलाइन सिस्टम को निर्धारित दबाव के अनुसार पर्याप्त रूप से डिजाइन और टेस्ट किया गया था।
मार्च 2025 की घटना के बाद जल निगम के तत्कालीन अधिकारी की ओर से बताया गया था कि मसूरी तक करीब 17 किलोमीटर में पानी की लाइन डाली गई है और कई स्थानों पर अत्यधिक पानी के दबाव के कारण ज्वाइंट खुलने की समस्या सामने आई है।
2024 में भी उठी थी उच्चस्तरीय जांच की मांग
जून 2024 में गांधी चौक पर पाइपलाइन का वॉल्व फटने के बाद स्थानीय लोगों ने योजना के कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की थी। लोगों का कहना था कि एक ओर मसूरी के कई क्षेत्र पेयजल के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर नई बिछाई गई पाइपलाइन से पानी के लीकेज की समस्या सामने आ रही है।
यानी योजना शुरू होने के बाद से ही पाइपलाइन, सड़क खुदाई, लीकेज, ज्वाइंट और पेयजल आपूर्ति को लेकर सवाल लगातार उठते रहे हैं। 2022 में पाइपलाइन बिछाने के दौरान सड़कों की स्थिति को लेकर भी स्थानीय लोगों और दुकानदारों में नाराजगी सामने आई थी।
योजना की लागत और दावों पर भी चर्चा
उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में मसूरी-यमुना पेयजल पंपिंग योजना की लागत करीब 144 करोड़ रुपये बताई गई है। 2020 में शुरू की गई इस परियोजना का उद्देश्य मसूरी की दीर्घकालिक पेयजल जरूरत को पूरा करना था। 2026 में भी योजना के बावजूद मसूरी में पेयजल संकट को लेकर विरोध और शिकायतें सामने आईं।
हालांकि, नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष अनुज गुप्ता की ओर से वर्तमान में योजना की लागत 180 करोड़ रुपये बताते हुए गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसलिए परियोजना की स्वीकृत लागत, संशोधित लागत, वास्तविक व्यय और अब तक किए गए भुगतान का सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर सार्वजनिक होना भी महत्वपूर्ण सवाल है।
नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष अनुज गुप्ता का मंत्री पर तीखा हमला
नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष अनुज गुप्ता ने योजना को लेकर उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री एवं मसूरी विधायक गणेश जोशी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है।
अनुज गुप्ता का आरोप है कि “180 करोड़ रुपये की पंपिंग पेयजल योजना भ्रष्टाचार में डूबी हुई है और इसकी पोल दिन-प्रतिदिन खुल रही है।” उन्होंने कहा कि पाइपलाइन बार-बार फट रही है और योजना के तहत बनाए गए स्टोरेज टैंकों की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “पाइप तो रोज फट रहे हैं, लेकिन भ्रष्टाचार में डूबे मंत्रियों के पेट नहीं फट रहे।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लंबे समय तक पानी उपलब्ध कराने का दावा करने वाली योजना की हकीकत सामने आने लगी है और आने वाले समय में इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ सकता है।
इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित विभाग अथवा मंत्री का पक्ष भी इस खबर में शामिल नहीं है। इसलिए आरोपों की निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना जरूरी है।
सिर्फ पाइप फटना ही नहीं, पानी की उपलब्धता भी सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि मसूरी में गर्मियों और पर्यटन सीजन में लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है, तो योजना के वास्तविक लाभ का आकलन कैसे किया जाए?
जून 2026 में मसूरी में पानी की कमी को लेकर प्रदर्शन भी हुआ था। स्थानीय लोगों और होटल कारोबारियों ने आरोप लगाया कि यमुना-मसूरी पेयजल परियोजना शहर की जरूरत पूरी करने में अपेक्षित रूप से सफल नहीं हो रही है।
वहीं मंत्री गणेश जोशी ने भी जून 2026 में अधिकारियों के साथ बैठक में ₹144 करोड़ की योजना का उल्लेख करते हुए कहा था कि परियोजना के बावजूद पानी की समस्या बनी हुई है और विभागों के बीच समन्वय की कमी को दूर करने के निर्देश दिए थे।
अब उठ रहे हैं ये बड़े सवाल
▪️ योजना की वास्तविक कुल लागत कितनी है—144 करोड़ या 180 करोड़?
▪️ अब तक कितनी रकम खर्च और कितने भुगतान किए गए?
▪️ पाइपलाइन के ज्वाइंट बार-बार क्यों खुल रहे हैं?
▪️ क्या पाइपलाइन का प्रेशर टेस्ट और गुणवत्ता परीक्षण निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ था?
▪️ स्टोरेज टैंकों और पाइपलाइन की तकनीकी जांच कब हुई?
▪️ योजना का पूरा हैंडओवर कब और किन शर्तों पर हुआ?
▪️ बार-बार होने वाली लीकेज से कितने लीटर पानी बर्बाद हुआ?
▪️ मसूरी को 30/50 साल तक पर्याप्त पानी देने के दावे की वर्तमान स्थिति क्या है?
▪️ पेयजल संकट के बावजूद योजना का अपेक्षित लाभ जनता को क्यों नहीं मिल पा रहा है?
जनता मांग रही पारदर्शी जांच
मसूरी जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन शहर के लिए पेयजल व्यवस्था केवल स्थानीय जरूरत नहीं बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा विषय है। ऐसे में करोड़ों रुपये की इस योजना में बार-बार सामने आ रही तकनीकी समस्याओं को केवल अस्थायी मरम्मत तक सीमित रखने के बजाय स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट, गुणवत्ता परीक्षण, पाइपलाइन प्रेशर टेस्ट, स्टोरेज टैंकों की जांच और परियोजना की वित्तीय समीक्षा कराई जानी चाहिए।
यदि जांच में किसी स्तर पर निर्माण गुणवत्ता, डिजाइन, सामग्री या भुगतान में अनियमितता मिलती है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। वहीं यदि विभागीय जांच में काम मानकों के अनुरूप पाया जाता है तो सरकार और संबंधित विभाग को भी जनता के सामने स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि बार-बार पाइपलाइन फटने और लीकेज की वास्तविक तकनीकी वजह क्या है।
मसूरी की प्यास बुझाने के लिए बनी करोड़ों की योजना अब खुद सवालों के घेरे में है। सवाल सिर्फ पाइपलाइन के फटने का नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता का है जिसके भरोसे मसूरी को आने वाले दशकों तक पानी उपलब्ध कराने का दावा किया गया था।
दून वैली टाइम्स की पड़ताल का सवाल
“करोड़ों की योजना, बार-बार फटती पाइपलाइन और फिर भी पानी का संकट—आखिर मसूरी की प्यास कब बुझेगी?”
