देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून आज तेजी से बढ़ते ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रही है। पिछले कुछ वर्षों में शहर में वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, लेकिन इसके अनुपात में सड़कों का विस्तार, पार्किंग व्यवस्था और सार्वजनिक परिवहन का विकास नहीं हो सका। इसका परिणाम यह है कि शहर की अधिकांश प्रमुख सड़कें दिनभर जाम की चपेट में रहती हैं और आम लोगों का बहुमूल्य समय सड़क पर ही बर्बाद हो रहा है।

सुबह और शाम के व्यस्त समय में स्थिति सबसे अधिक गंभीर हो जाती है। प्रेमनगर–बल्लूपुर मार्ग, आईएसबीटी क्षेत्र, सहारनपुर चौक, प्रिंस चौक, दर्शनलाल चौक, घंटाघर, राजपुर रोड, परेड ग्राउंड, सर्वे चौक, चूना भट्टा, रायपुर रोड, मसूरी डायवर्जन और रिस्पना पुल जैसे प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें आम दृश्य बन चुकी हैं। कई स्थानों पर लोगों को कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में 30 मिनट से लेकर एक घंटे तक का समय लग रहा है।
शहर में लगातार बढ़ते पर्यटक दबाव, सीमित चौड़ाई वाली सड़कें, बेतरतीब पार्किंग, सड़क किनारे अतिक्रमण और चौराहों पर प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन की कमी के कारण जाम की समस्या दिन-प्रतिदिन विकराल होती जा रही है। कई स्थानों पर वाहन चालकों को घंटों तक रेंग-रेंगकर आगे बढ़ना पड़ता है।
इसका सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और पैदल चलने वालों पर पड़ रहा है। व्यस्त चौराहों पर सड़क पार करने के लिए लोगों को कई मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। वहीं एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं को भी जाम के कारण समय पर गंतव्य तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि केवल फ्लाईओवर बनाना इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। शहर को एक समग्र ट्रैफिक प्रबंधन योजना की आवश्यकता है, जिसमें मजबूत सार्वजनिक परिवहन, पर्याप्त पार्किंग स्थल, अवैध पार्किंग और अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई, स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल, बेहतर चौराहा प्रबंधन तथा वैकल्पिक मार्गों का विकास शामिल हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में देहरादून की यातायात व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है। राजधानी होने के कारण शहर में लगातार आबादी, निजी वाहनों और पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है, जिसके अनुरूप आधारभूत ढांचे का विकास भी आवश्यक है।
शहरवासी प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाई जाए, ताकि लोगों को रोजाना जाम की परेशानी से राहत मिल सके और राजधानी की यातायात व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।
आपकी राय क्या है?
क्या देहरादून के ट्रैफिक जाम का सबसे बड़ा समाधान बेहतर सार्वजनिक परिवहन, नए फ्लाईओवर, बाईपास, मल्टीलेवल पार्किंग या सख्त ट्रैफिक प्रबंधन है? अपनी राय हमें कमेंट करके जरूर बताइए।




