दून वैली टाइम्स | पौड़ी गढ़वाल, 3 अगस्त।
उत्तराखंड की बेटियां देश और दुनिया में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। इसी कड़ी में पौड़ी गढ़वाल जिले की होनहार बेटी लेफ्टिनेंट कमांडर प्रियंका गुसाईं ने भारतीय नौसेना के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। प्रियंका ने विश्व की पहली सर्व-महिला त्रि-सेवा (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) वैश्विक समुद्री परिक्रमा अभियान में भाग लेते हुए 314 दिनों में लगभग 25,500 नॉटिकल माइल्स की समुद्री यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर उत्तराखंड ही नहीं, पूरे देश का गौरव बढ़ाया है।
मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल जिले के थलीसैंण ब्लॉक के भटकोट गांव की रहने वाली प्रियंका गुसाईं इस ऐतिहासिक अभियान का हिस्सा रहीं। उनकी इस उपलब्धि पर पूरे उत्तराखंड में खुशी की लहर है और उन्हें लगातार बधाइयां मिल रही हैं।
मुंबई से शुरू हुआ था ऐतिहासिक अभियान
भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की 9 महिला अधिकारियों का संयुक्त दल 11 सितंबर 2025 को मुंबई से स्वदेशी पाल नौका IASV-50 ‘त्रिवेणी’ पर सवार होकर विश्व समुद्री परिक्रमा के लिए रवाना हुआ था। इस अभियान को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
करीब 10 महीने तक चले इस कठिन अभियान के बाद दल 22 जुलाई 2026 को सफलतापूर्वक मुंबई लौट आया। इस दौरान टीम ने चार महासागरों की चुनौतीपूर्ण यात्रा पूरी की और भारतीय तिरंगे को विश्व के समुद्री मार्गों पर नई पहचान दिलाई।
भीषण तूफानों और 12 मीटर ऊंची लहरों का किया सामना
इस अभियान के दौरान महिला अधिकारियों ने अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना किया। दल ने चार महासागरों को पार करने के साथ-साथ भूमध्य रेखा (Equator) को दो बार लांघा। इसके अलावा विश्व के तीन प्रमुख केप—केप हॉर्न, केप ऑफ गुड होप और केप लीविन—को भी सफलतापूर्वक पार किया।
समुद्र में 12 मीटर तक ऊंची लहरों, भीषण तूफानों और प्रतिकूल मौसम के बावजूद दल ने साहस, धैर्य और अनुशासन का परिचय देते हुए मिशन को सफल बनाया।
देहरादून से इंजीनियरिंग, फिर भारतीय नौसेना तक का सफर
लेफ्टिनेंट कमांडर प्रियंका गुसाईं ने देहरादून स्थित DIT से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वर्ष 2017 में उन्होंने भारतीय नौसेना ज्वाइन की। उनके पिता हर्ष गुसाईं गढ़वाल राइफल्स से सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हैं, जबकि उनकी माता नीरजा गुसाईं गृहिणी हैं।
प्रियंका की यह उपलब्धि उत्तराखंड की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उन्होंने साबित कर दिया कि कठिन से कठिन चुनौतियों को भी दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और समर्पण के बल पर पार किया जा सकता है।
चार महासागर पार कर लौटीं पौड़ी की बेटी, लेफ्टिनेंट कमांडर प्रियंका गुसाईं ने रचा इतिहास
