भारी डंपरों की आवाजाही से ग्रामीण परेशान, खेतों में धूल की परत; स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर भी सवाल

देहरादून। सहसपुर क्षेत्र के शंकरपुर और सारना नदी के आसपास कथित अवैध खनन एवं खनन सामग्री के परिवहन को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भारी डंपरों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लगातार आवाजाही से गांव के रास्ते बदहाल हो गए हैं। वहीं सड़क से उड़ने वाली धूल का असर आसपास की फसलों पर पड़ने का भी दावा किया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में स्थित बताए जा रहे एनएस स्टोन क्रेशर के आसपास लगातार खनन सामग्री के वाहनों की आवाजाही देखी जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी संबंधित विभाग से नहीं हुई है।

मानसून में खनन पर रोक, फिर सवाल क्यों?
मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि जिला प्रशासन ने मानसून अवधि को देखते हुए 1 जुलाई से 30 सितंबर 2026 तक नदियों में खनन गतिविधियों पर रोक के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्टोन क्रशर संचालन और खनन गतिविधियों पर निगरानी के निर्देश भी दिए गए थे।
ऐसे में सवाल उठता है कि सारना नदी क्षेत्र से यदि खनन सामग्री निकाली या परिवहन की जा रही है तो उसका स्रोत क्या है? वाहनों के पास वैध ई-रवन्ना और परिवहन दस्तावेज हैं या नहीं? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
डंपरों से टूटे रास्ते, बच्चों की सुरक्षा पर चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से गांव की सड़क पर गड्ढे बढ़ गए हैं। संकरे और क्षतिग्रस्त रास्तों से स्कूल जाने वाले बच्चों को भी भारी वाहनों के बीच से गुजरना पड़ता है।
ग्रामीणों का सवाल है कि किसी हादसे के बाद जिम्मेदारी कौन लेगा? उनका कहना है कि प्रशासन को दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय अभी से वाहनों के रूट, गति और आवाजाही की जांच करनी चाहिए।
किसानों ने भी जताई नाराजगी
ग्रामीण किसानों का आरोप है कि भारी वाहनों से उड़ने वाली धूल खेतों तक पहुंच रही है और फसलों की पत्तियों पर धूल जम रही है। इससे फसल प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
क्रेशर के दस्तावेजों की जांच की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से एनएस स्टोन क्रेशर समेत क्षेत्र में खनन सामग्री से जुड़े प्रतिष्ठानों के खनिज स्रोत, ई-रवन्ना, भंडारण, पर्यावरणीय अनुमति और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।
साथ ही यह भी जांच का विषय है कि भारी वाहनों को गांव की सड़कों से गुजरने की अनुमति है या नहीं और सड़क खराब होने की स्थिति में उसकी मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी होगी।
अब प्रशासन की जांच का इंतजार
मामला सिर्फ खनन तक सीमित नहीं है। यह ग्रामीण सड़कों, किसानों की फसल, पर्यावरण और स्कूली बच्चों की सुरक्षा से भी जुड़ा है। ग्रामीणों ने मौके पर संयुक्त निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
यदि आरोप गलत हैं तो प्रशासन जांच के जरिए स्थिति स्पष्ट कर सकता है और यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
दून वैली टाइम्स इस मामले में प्रशासन, खनन विभाग और संबंधित क्रेशर संचालक का पक्ष भी सामने रखेगा।
जांच के प्रमुख सवाल
- सारना नदी में प्रतिबंध अवधि के दौरान खनन तो नहीं हो रहा?
- खनन सामग्री का स्रोत क्या है?
- वाहनों के पास वैध ई-रवन्ना हैं या नहीं?
- क्रेशर के दस्तावेज और अनुमतियां वैध हैं या नहीं?
- भारी वाहनों के लिए निर्धारित रूट क्या है?
- क्षतिग्रस्त सड़क की जिम्मेदारी किसकी है?
- किसानों और बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था है?
