ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में उत्तराखंड इनोवेशन एंड सॉल्यूशंस हैकाथॉन-2026 का शुभारंभ, आपदा प्रबंधन से लेकर पर्यटन और सुशासन तक के लिए विकसित होंगे तकनीकी समाधान
देहरादून, 15 सितंबर। उत्तराखंड की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक चुनौतियों के तकनीकी समाधान तलाशने के उद्देश्य से मंगलवार को उत्तराखंड इनोवेशन एंड सॉल्यूशंस हैकाथॉन-2026 का शुभारंभ किया गया। ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में सूचना प्रौद्योगिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जैव प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा ने हैकाथॉन का शुभारंभ किया। 90 दिनों तक चलने वाली इस पहल में युवाओं की तकनीकी प्रतिभा और नए विचारों को राज्य की वास्तविक समस्याओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
कार्यक्रम में करीब 500 छात्र-छात्राओं, शिक्षाविदों, शिक्षकों, तकनीकी विशेषज्ञों और युवा इनोवेटर्स ने भाग लिया। हैकाथॉन के माध्यम से उत्तराखंड की स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसे तकनीकी समाधान विकसित करने का प्रयास किया जाएगा, जिन्हें भविष्य में धरातल पर लागू किया जा सके।
आपदा प्रबंधन से पर्यटन तक कई क्षेत्रों पर फोकस
हैकाथॉन में आपदा प्रबंधन, यातायात एवं भीड़ प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, वन्यजीव संरक्षण, पर्यटन और सुशासन जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियों पर काम किया जाएगा। इसके साथ ही सरकारी सेवाओं को नागरिकों तक अधिक सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचाने के लिए तकनीक आधारित समाधान भी विकसित किए जाएंगे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों में राज्य की विशिष्ट चुनौतियों के समाधान विकसित करने की क्षमता है। उन्होंने युवाओं से तकनीक और नवाचार को केवल प्रयोग तक सीमित न रखने तथा इसे आम नागरिकों की वास्तविक समस्याओं के समाधान का माध्यम बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा एनालिटिक्स, जीआईएस और ड्रोन तकनीक के प्रभावी उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इन तकनीकों के माध्यम से शासन और जनसेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने विकसित होने वाले समाधानों को व्यावहारिक, जिम्मेदार और प्रयोगशाला से धरातल तक पहुंचने योग्य बनाने की आवश्यकता बताई।
एआई और ड्रोन तकनीक से तैयार होंगे नए समाधान
हैकाथॉन के अंतर्गत एआई आधारित सरकारी नॉलेज रिपॉजिटरी, सरकारी सूचनाओं को आसानी से खोजने एवं उपयोग करने वाली प्रणालियों, डीपीआर और आरएफपी तैयार करने में एआई के इस्तेमाल, डेटा गवर्नेंस, एआई आधारित जीआईएस तथा पर्यावरणीय विश्लेषण जैसे विषयों पर भी काम किया जाएगा।
इसके अलावा आपदा प्रबंधन, बुनियादी ढांचे के आकलन और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए ड्रोन आधारित एरियल मॉनिटरिंग से जुड़े समाधान विकसित किए जाएंगे। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में निगरानी, जोखिम की पहचान और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई को बेहतर बनाने की संभावनाएं तलाशने पर जोर रहेगा।
चारधाम और पर्यटन सीजन की चुनौतियों पर भी नजर
उत्तराखंड में पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की बड़ी मौसमी आवाजाही को देखते हुए हैकाथॉन में यातायात दबाव का पूर्वानुमान, पर्यावरणीय दबाव की निगरानी, आपदा संभावित क्षेत्रों की पहचान और आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाने वाले तकनीकी समाधान तलाशे जाएंगे।
दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच आसान बनाने के उपायों पर भी युवा इनोवेटर्स काम करेंगे। इससे तकनीक के माध्यम से पहाड़ी क्षेत्रों में सेवा वितरण की चुनौतियों को कम करने की दिशा में नए विकल्प सामने आने की उम्मीद है।
आइडिएशन से प्रोटोटाइप और पायलट प्रोजेक्ट तक
90 दिवसीय हैकाथॉन की शुरुआत ऑनलाइन आइडिएशन से होगी। इसके बाद प्रतिभागियों को प्रोटोटाइप तैयार करने, विशेषज्ञों एवं मेंटर्स से मार्गदर्शन लेने और अपने समाधान को बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा। चयनित नवाचारों को आगे पायलट प्रोजेक्ट, इन्क्यूबेशन और इंडस्ट्री लिंकेज की दिशा में ले जाने का अवसर भी दिया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार हैकाथॉन में नागरिक केंद्रित और जिम्मेदार नवाचार को प्राथमिकता दी जाएगी। शासन, आपदा प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तकनीक को मानवीय निर्णय क्षमता के सहयोगी के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर रहेगा।
शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी विभागों के बीच बनेगा समन्वय
इस पहल का उद्देश्य उत्तराखंड के शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी विभागों, तकनीकी समुदाय और युवा इनोवेटर्स के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। आयोजकों का कहना है कि स्थानीय समस्याओं के लिए स्थानीय स्तर पर विकसित तकनीकी समाधानों को बढ़ावा देकर राज्य की चुनौतियों को नए अवसरों में बदला जा सकता है।
यह पहल सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) द्वारा Axolotl Emprise LLP तथा संस्थागत एवं इकोसिस्टम सहयोगियों के साथ आयोजित की जा रही है। हैकाथॉन के माध्यम से ऐसे नवाचारों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा, जो उत्तराखंड को अधिक सक्षम, लचीला और तकनीक-सक्षम बनाने में योगदान दे सकें।
