लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग के लिए सड़क पर उतरे आंदोलनकारी

गैंती-फावड़े लेकर खुद शुरू किया श्रमदान, उठी एलिवेटेड रोड की मांग

“एक ही लक्ष्य, एक ही नारा—लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग बने हमारा, रोड नहीं तो वोट नहीं”

कोटद्वार। लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग के निर्माण और इसे एलिवेटेड रोड के रूप में विकसित करने की मांग को लेकर क्षेत्रवासियों का आंदोलन लगातार जारी है। पिछले सवा साल से अधिक समय से चल रहे आंदोलन के बीच रविवार को आंदोलनकारियों का आक्रोश सड़क पर दिखाई दिया। बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी गैंती, फावड़ा, बेलचा और तसला लेकर चिल्लरखाल से आगे तेली स्रोत क्षेत्र में पहुंचे और मार्ग की साफ-सफाई एवं समतलीकरण का कार्य स्वयं शुरू किया।

आंदोलनकारियों ने कहा कि लंबे समय से मार्ग की मांग उठाई जा रही है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने के कारण क्षेत्र की जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि बरसात के दौरान मार्ग की स्थिति और अधिक खराब हो जाती है तथा कई स्थानों पर आवागमन प्रभावित होता है।

खुद सड़क सुधारने को मजबूर हुए लोग

आंदोलनकारियों ने कहा कि जब जिम्मेदार व्यवस्था की ओर से अपेक्षित समाधान नहीं मिल रहा है तो क्षेत्र की जनता खुद सड़क सुधारने के लिए मैदान में उतरने को मजबूर है। मौके पर लोगों ने गड्ढे भरने, रास्ते को समतल करने और पुश्ता बनाने का काम किया।

ताजा रिपोर्ट के अनुसार, आंदोलनकारियों ने सिगड्डी स्रोत नदी क्षेत्र में निर्माण कार्य शुरू करने से पहले पूजा-अर्चना की और इसके बाद श्रमदान करते हुए पत्थरों की चिनाई कर पुश्ता बनाया तथा मार्ग को समतल किया।

एलिवेटेड रोड की मांग

आंदोलन में शामिल एक व्यक्ति ने कहा कि पिछले 26 वर्षों में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों की सरकारें आती-जाती रही हैं, लेकिन क्षेत्र की इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि मार्ग केवल सड़क के रूप में नहीं, बल्कि एलिवेटेड रोड के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, ताकि बरसात के दौरान भी यातायात प्रभावित न हो।

उन्होंने कहा कि इस मार्ग का संबंध केवल सामान्य यातायात से नहीं है, बल्कि कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों, अस्पताल जाने वाले मरीजों, स्थानीय व्यापारियों और आम लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही से भी है। इसलिए सरकार को इस मामले में जल्द ठोस कदम उठाना चाहिए।

26 साल बाद भी सड़क की समस्या का सवाल

आंदोलनकारियों ने सवाल उठाया कि उत्तराखंड राज्य गठन को 26 वर्ष होने जा रहे हैं, लेकिन आज भी क्षेत्र के लोगों को बेहतर और सुरक्षित सड़क सुविधा के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है।

उनका कहना है कि बरसात के समय मार्ग की स्थिति खराब होने से चारपहिया वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है। ऐसे में क्षेत्रवासियों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

लंबे समय से वन क्षेत्र और अनुमति का मुद्दा

लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग का मामला लंबे समय से वन क्षेत्र और पर्यावरणीय अनुमति से जुड़ा रहा है। फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट से परियोजना को लेकर राहत मिलने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसके बाद जुलाई 2026 में वन विभाग ने लोक निर्माण विभाग को मार्ग के निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था नामित किए जाने की जानकारी सामने आई।

मार्ग को लेकर आंदोलन कर रहे लोगों का कहना है कि अब जब निर्माण का रास्ता आगे बढ़ा है, तो जमीनी स्तर पर काम भी जल्द दिखाई देना चाहिए।

“रोड नहीं तो वोट नहीं” का नारा

आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि अब उनकी मांग केवल आश्वासन तक सीमित नहीं है। उन्होंने नारा दिया—

“एक ही लक्ष्य, एक ही नारा,
लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग बने हमारा।”

इसके साथ ही आंदोलनकारियों ने “रोड नहीं तो वोट नहीं” का नारा लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि लालढांग से चिल्लरखाल तक बेहतर सड़क संपर्क होने से क्षेत्र के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और सामाजिक, शैक्षिक तथा आर्थिक गतिविधियों को भी लाभ होगा। फरवरी में सामने आई रिपोर्टों में भी इस मार्ग से करीब 18 गांवों और 40 हजार से अधिक आबादी को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की बात कही गई थी।

आंदोलनकारियों की सरकार से मांग

आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की है कि मार्ग निर्माण की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाए और बरसात में आवागमन की समस्या को देखते हुए स्थायी समाधान किया जाए। उनका कहना है कि एलिवेटेड रोड वन क्षेत्र, यातायात और वर्षभर की कनेक्टिविटी की समस्या के समाधान का बेहतर विकल्प हो सकता है।

आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक मार्ग को लेकर ठोस प्रगति जमीन पर दिखाई नहीं देती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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