क्षमता से अधिक सवारियां ढो रहे यूटिलिटी वाहन, पहाड़ी मार्गों पर हादसों का बढ़ा खतरा

चकराता । उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों, खासकर ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में यातायात व्यवस्था की एक गंभीर तस्वीर सामने आ रही है। ग्रामीण मार्गों पर संचालित यूटिलिटी, विकर और मैक्सी कैब वाहनों में क्षमता से अधिक यात्रियों को ठूंस-ठूंसकर बैठाया जा रहा है। कई मामलों में यात्रियों को वाहन के पीछे लटककर या बेहद जोखिम भरे तरीके से सफर करते देखा जाता है। इससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।

सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि इन वाहनों में स्कूली छात्र-छात्राएं भी सफर करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल और कॉलेज आने-जाने के लिए पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को मजबूरी में ऐसे वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। क्षमता से अधिक सवारियों के बीच बच्चों का सफर करना उनके जीवन और भविष्य की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सार्वजनिक परिवहन की कमी बनी मजबूरी

जौनसार-बावर समेत कई पहाड़ी ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की पर्याप्त सुविधा नहीं है। कई गांवों के लिए नियमित बस सेवाएं या तो उपलब्ध नहीं हैं या समय पर नहीं चलतीं। ऐसे में ग्रामीणों के पास यूटिलिटी और मैक्सी कैब जैसे छोटे वाहनों पर निर्भर रहने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता।

ग्रामीणों का कहना है कि रोजमर्रा के काम, अस्पताल, बाजार, स्कूल और अन्य जरूरी कार्यों के लिए उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। सार्वजनिक परिवहन की कमी के कारण वाहन चालक भी अधिक से अधिक यात्रियों को बैठाने का दबाव महसूस करते हैं और यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर क्षमता से अधिक सवारियां बैठा लेते हैं।

संकरी और खराब सड़कों पर बढ़ जाता है खतरा

पहाड़ी क्षेत्रों में कई ग्रामीण सड़कें संकरी, घुमावदार और जगह-जगह खराब हैं। बरसात के दौरान स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऐसे रास्तों पर ओवरलोड वाहन चलने से वाहन का संतुलन बिगड़ने और दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

यदि वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्री सवार हों और कुछ लोग पीछे लटककर सफर कर रहे हों तो अचानक ब्रेक लगने, वाहन फिसलने या पहाड़ी सड़क पर नियंत्रण बिगड़ने की स्थिति में गंभीर जनहानि हो सकती है।

बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी

ओवरलोडिंग का सबसे अधिक असर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्ग यात्रियों पर पड़ता है। कम जगह में अधिक यात्रियों को बैठाए जाने के कारण उन्हें लंबे सफर के दौरान भारी शारीरिक परेशानी उठानी पड़ती है। कई बार यात्रियों को खड़े होकर या असुरक्षित स्थिति में सफर करना पड़ता है।

स्कूली छात्र-छात्राओं के मामले में यह स्थिति और गंभीर हो जाती है। सुबह और दोपहर के समय स्कूल आने-जाने वाले मार्गों पर वाहनों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में परिवहन व्यवस्था की कमी और ओवरलोडिंग उनके लिए लगातार जोखिम पैदा कर रही है।

निगरानी व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल

ग्रामीण क्षेत्रों में ओवरलोडिंग की समस्या के बावजूद नियमित चेकिंग और प्रभावी कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि परिवहन विभाग और पुलिस द्वारा यदि नियमित रूप से अभियान चलाकर ओवरलोड वाहनों की जांच की जाए तो इस पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

केवल चालान तक सीमित कार्रवाई के बजाय बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्री किसी भी स्थिति में न बैठाए जाएं और यात्रियों को वाहन के पीछे लटककर सफर करने की अनुमति न मिले।

ग्रामीण रूटों पर बढ़ाई जाए सार्वजनिक परिवहन की सुविधा

ओवरलोडिंग की समस्या का स्थायी समाधान केवल चालान और कार्रवाई से संभव नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना भी जरूरी है। परिवहन निगम को दूर-दराज के गांवों के लिए नियमित बस सेवाएं बढ़ानी चाहिए, ताकि ग्रामीणों और विद्यार्थियों को असुरक्षित निजी वाहनों पर निर्भर न रहना पड़े।

स्थानीय लोगों की मांग है कि ग्रामीण रूटों का सर्वे कर यात्री संख्या के अनुसार बसों और अन्य अधिकृत सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था की जाए। साथ ही स्कूल-कॉलेज के समय विशेष परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जाना चाहिए।

कार्रवाई नहीं हुई तो किसी बड़े हादसे का इंतजार?

पहाड़ी सड़कों पर ओवरलोडिंग कोई सामान्य यातायात उल्लंघन नहीं, बल्कि सीधे तौर पर यात्रियों की जान से जुड़ा गंभीर मामला है। सवाल यह है कि संबंधित विभाग किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा या उससे पहले प्रभावी कदम उठाएगा।

ग्रामीणों ने परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि जौनसार-बावर सहित पहाड़ी ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर यूटिलिटी, विकर और मैक्सी कैब वाहनों की क्षमता, परमिट, फिटनेस और ओवरलोडिंग की जांच की जाए। साथ ही स्कूली बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्कूल समय में विशेष निगरानी की व्यवस्था की जाए।

About The Author