गजब का विकास! ग्राम सभा की जमीन पर सीवर टैंक बनाने और ग्रामीणों का रास्ता बंद करने का आरोप

कुठाल गेट के पास बागरियाल गांव में विवाद, करीब 22 बीघा जमीन तक जाने का रास्ता बंद होने से ग्रामीणों में नाराजगी

पार्षद सुमेन्द्र बोहरा ने सीवर टैंक तोड़ने और रास्ता खोलने की उठाई मांग, विभागों को पत्र लिखने के बावजूद समाधान नहीं होने का दावा

मसूरी/देहरादून। विकास कार्यों की प्राथमिकताओं और ग्राम सभा की जमीन के कथित इस्तेमाल को लेकर मसूरी-देहरादून मार्ग पर कुठाल गेट के निकट स्थित बागरियाल गांव में विवाद सामने आया है। ग्रामीणों ने उत्तराखंड सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी पर ग्राम सभा की जमीन पर सीवर टैंक बनवाने और करीब 22 बीघा जमीन तक जाने वाले रास्ते को बंद करवाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस कथित कार्रवाई से आवागमन प्रभावित हो रहा है और उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्राम सभा की जमीन पर निर्माण को लेकर उठे सवाल

ग्रामीणों के अनुसार, जिस स्थान पर सीवर टैंक बनाया गया है, वह ग्राम सभा की जमीन है। उनका आरोप है कि टैंक निर्माण के कारण करीब 22 बीघा जमीन तक पहुंचने वाला रास्ता बाधित हो गया है। ग्रामीणों ने इस मामले में संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए रास्ते को पूर्ववत खोलने और कथित अतिक्रमण की जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक उपयोग की जमीन और रास्तों से जुड़े मामलों में प्रशासन को निष्पक्षता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि स्थानीय लोगों के अधिकार और आवागमन प्रभावित न हों।

अधिकारी के भवन तक सीसी मार्ग बनाने पर भी सवाल

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की ओर से संबंधित अधिकारी के आवास तक सीसी मार्ग का निर्माण कराया गया है। उनके मुताबिक, उसी स्थान पर बहुमंजिला भवन का निर्माण कार्य भी चल रहा है।

ग्रामीणों का सवाल है कि यदि क्षेत्र में सड़क निर्माण की आवश्यकता थी, तो आम लोगों की सुविधा और गांव के रास्ते को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई? उनका आरोप है कि एक ओर अधिकारी के आवास तक सड़क बनाई गई, जबकि दूसरी ओर ग्रामीणों के लिए जरूरी रास्ता बंद होने की समस्या बनी हुई है।

हालांकि, सड़क निर्माण की परिस्थितियों, सीवर टैंक की अनुमति और जमीन के स्वामित्व से संबंधित दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

मौके पर पहुंचे पार्षद, टैंक हटाने की मांग

मामले की जानकारी मिलने पर नगर निगम पार्षद सुमेन्द्र बोहरा मौके पर पहुंचे। उन्होंने संबंधित ठेकेदार से बातचीत कर सीवर टैंक हटाने और ग्रामीणों के लिए बंद रास्ता खोलने की मांग उठाई।

पार्षद बोहरा के अनुसार, इस मामले को लेकर संबंधित विभागों को कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। उन्होंने कहा कि जब बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का निस्तारण नहीं हुआ, तो मामले को सार्वजनिक रूप से सामने लाना जरूरी हो गया।

उन्होंने ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कराने और रास्ते की समस्या का शीघ्र समाधान करने की मांग की।

जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार

बागरियाल गांव का यह मामला ग्राम सभा की जमीन, निर्माण कार्यों की वैधता और ग्रामीणों के आवागमन से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। यदि सार्वजनिक जमीन पर बिना वैधानिक अनुमति निर्माण हुआ है या ग्रामीणों के पारंपरिक रास्ते को अनुचित तरीके से बंद किया गया है, तो इसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल, सामने आए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी और विभाग की ओर से इस रिपोर्ट के लिए कोई आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है। जमीन के राजस्व अभिलेखों, निर्माण की अनुमति और रास्ते की स्थिति की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

दून वैली टाइम्स का सवाल: विकास कार्यों का लाभ आम जनता तक पहुंचना चाहिए। ऐसे में संबंधित प्रशासन को ग्रामीणों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि सार्वजनिक जमीन और रास्ते को लेकर उत्पन्न विवाद का उचित समाधान हो सके।

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