सड़क के अभाव में डोली से घर पहुंची प्रसूता

बागेश्वर के थलीधार क्षेत्र में सड़क सुविधा का अभाव, चार किलोमीटर तक डोली में ले जाई गई महिला; दो माह से आंदोलन कर रहे ग्रामीण

बागेश्वर। जिले के थलीधार क्षेत्र में सड़क सुविधा नहीं होने का खामियाजा एक बार फिर ग्रामीणों और मरीजों को भुगतना पड़ा। जिला अस्पताल बागेश्वर में प्रसव के बाद छुट्टी मिलने पर थलीधार निवासी निशा देवी को सड़क के अभाव में ग्रामीणों ने करीब चार किलोमीटर तक डोली के सहारे पैदल घर पहुंचाया।

ग्रामीणों के मुताबिक, थलीधार क्षेत्र में लंबे समय से सड़क की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की आवाजाही में परेशानी के साथ ही आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और वापस घर लाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

प्रसव के बाद डोली में तय करना पड़ा रास्ता

निशा देवी की बागेश्वर जिला अस्पताल में डिलीवरी हुई। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घर तक पहुंचने के लिए जब कोई सड़क मार्ग उपलब्ध नहीं था, तो ग्रामीणों ने डोली की व्यवस्था की। इसके बाद प्रसूता को करीब चार किलोमीटर तक पैदल रास्ते से डोली में ले जाकर घर पहुंचाया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर मरीजों को होती है। सड़क सुविधा के अभाव में कई बार मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है।

दो महीने से आंदोलनरत हैं ग्रामीण

सड़क निर्माण की मांग को लेकर क्षेत्र के ग्रामीण पिछले दो महीनों से आंदोलन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार मांग और आंदोलन के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। उनका आरोप है कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में उन्हें आज भी पहाड़ी रास्तों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए थलीधार क्षेत्र में जल्द सड़क निर्माण शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क बनने से क्षेत्र के लोगों को आवागमन के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में भी बड़ी राहत मिलेगी।

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