नियामक आयोग ने जारी किए नए नियम, यूपीसीएल को 10 साल का एडवांस प्लान देना होगा
देहरादून। उत्तराखंड में बिजली संकट को कम करने और उपभोक्ताओं को अघोषित बिजली कटौती से राहत दिलाने की दिशा में उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने रिसोर्स एडिक्वेसी रेगुलेशंस-2026 को अंतिम रूप देते हुए नए गाइडलाइंस जारी किए हैं। नए नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में प्रदेश की बिजली जरूरत के अनुरूप पर्याप्त बिजली की उपलब्धता पहले से सुनिश्चित रहे और बिजली कटौती की स्थिति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि तय नियमों और टाइमलाइन का पालन नहीं करने पर यूपीसीएल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। आयोग के मुताबिक उपभोक्ताओं के हित में यह व्यवस्था बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने और बिजली संकट के समय बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए लागू की जा रही है।
24 घंटे काम करेगा समर्पित सेल
नई व्यवस्था के तहत बिजली आपूर्ति में किसी भी तरह की रुकावट से निपटने के लिए यूपीसीएल को दो विशेष सेल गठित करने होंगे। इनमें पहला प्लानिंग सेल होगा, जो तीन महीने के भीतर गठित किया जाना है। यह सेल मौसम, बिजली की मांग और उपभोक्ताओं की जरूरतों के आधार पर बिजली की उपलब्धता और मांग का आकलन करेगा।
दूसरा 24 घंटे रियल टाइम सेल होगा, जो सातों दिन चौबीसों घंटे काम करेगा। अचानक बिजली की मांग बढ़ने या आपात स्थिति पैदा होने पर यह सेल तत्काल बाजार से बिजली खरीदने सहित आवश्यक कदम उठाएगा।
आयोग का जोर इस बात पर है कि बिजली संकट आने के बाद इंतजाम करने के बजाय पहले से बिजली की पर्याप्त व्यवस्था की जाए।
10 साल का एडवांस रोडमैप तैयार करना होगा
आयोग ने यूपीसीएल को बिजली की जरूरत के लिए केवल तत्कालीन मांग पर निर्भर रहने के बजाय एक साल, पांच साल और 10 साल की अवधि का एडवांस डिमांड फोरकास्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
इसके आधार पर प्रदेश में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करनी होगी। यूपीसीएल को अपनी कुल जरूरी बिजली का 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा दीर्घकालिक समझौतों के माध्यम से सुरक्षित रखने और 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा मध्यम अवधि के समझौतों के जरिए सुनिश्चित करने की व्यवस्था करनी होगी।
आयोग का मानना है कि पावर एक्सचेंज पर पूरी तरह निर्भर रहना उचित नहीं है। पहले से तय अनुबंध होने से पीक डिमांड के समय बिजली की कमी की स्थिति से बचने में मदद मिलेगी।
पहले साल 100%, दूसरे साल 90% टाइम-अप जरूरी
नई व्यवस्था के अनुसार पहले साल की बिजली मांग के लिए यूपीसीएल को 100 प्रतिशत बिजली का पुख्ता टाइम-अप दिखाना होगा। दूसरे साल के लिए कम से कम 90 प्रतिशत बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।
इसका सीधा उद्देश्य यह है कि बिजली की मांग बढ़ने पर उपभोक्ताओं को अचानक बिजली कटौती का सामना न करना पड़े और वितरण कंपनी के पास पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध रहे।
ग्रीन एनर्जी और बैटरी स्टोरेज पर जोर
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों और जलविद्युत क्षमता को देखते हुए आयोग ने ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत करने के साथ ग्रीन एनर्जी और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम को बढ़ावा देने पर जोर दिया है।
आयोग ने यूपीसीएल को बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम तथा पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स (PSP) से करार करने के लिए भी प्रोत्साहित किया है। इससे बारिश या पीक सीजन में उपलब्ध होने वाली अतिरिक्त बिजली को स्टोर कर जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सकेगा।
स्मार्ट मीटर की होगी निरंतर निगरानी
नई व्यवस्था में स्मार्ट मीटरिंग को भी महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत और मांग का रियल टाइम डाटा उपलब्ध होने से बिजली की वास्तविक जरूरत का आकलन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
इससे बिजली वितरण व्यवस्था की निगरानी बेहतर होने और उपभोक्ताओं को अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अघोषित कटौती पर उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद
नए नियमों का सबसे बड़ा असर उपभोक्ताओं पर पड़ने की उम्मीद है। बिजली की मांग का पूर्वानुमान, दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौते, 24 घंटे रियल टाइम निगरानी सेल और ऊर्जा भंडारण की व्यवस्था मजबूत होने से अचानक बिजली संकट की स्थिति को कम किया जा सकेगा।
साथ ही, नियमों और निर्धारित टाइमलाइन का पालन नहीं होने पर यूपीसीएल पर कार्रवाई और जुर्माने की व्यवस्था होने से बिजली आपूर्ति को लेकर उसकी जवाबदेही भी बढ़ेगी।
