दून वैली टाइम्स | देहरादून
देहरादून। उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक मामला राजधानी देहरादून के जिला अस्पताल (कोरोनेशन अस्पताल) से सामने आया है। अस्पताल के सर्जरी वार्ड में भर्ती एक मरीज को उपचार के दौरान एक्सपायरी डेट पार कर चुका इंजेक्शन लगाए जाने की तैयारी की जा रही थी। हालांकि मरीज की सतर्कता के चलते समय रहते यह बड़ी लापरवाही पकड़ में आ गई और संभावित हादसा टल गया। घटना के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

मरीज ने खुद पकड़ी लापरवाही
जानकारी के अनुसार सहस्रधारा निवासी गौरव गुलाटी का लगभग छह दिन पहले कोरोनेशन अस्पताल में हर्निया का ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के बाद वह सर्जरी वार्ड में भर्ती होकर उपचार करा रहे हैं। आरोप है कि उपचार के दौरान वार्ड स्टाफ द्वारा उन्हें एक इंजेक्शन लगाने की तैयारी की गई।
इसी दौरान मरीज की नजर इंजेक्शन की शीशी पर अंकित एक्सपायरी डेट पर पड़ी। जांच करने पर पता चला कि इंजेक्शन जुलाई माह में ही एक्सपायर हो चुका था। यह देखते ही मरीज ने तत्काल इंजेक्शन लगवाने से इनकार कर दिया और वार्ड स्टाफ को इसकी जानकारी दी।
वीडियो वायरल होने के बाद मचा हड़कंप
घटना के दौरान मौजूद लोगों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और मामले का संज्ञान लेते हुए तत्काल जांच के आदेश जारी कर दिए।
हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित फार्मेसी और नर्सिंग स्टाफ से स्पष्टीकरण तलब किया है।
दवा प्रबंधन व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने अस्पताल में दवाओं के भंडारण, वितरण और वार्ड तक पहुंचने से पहले होने वाली जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एक्सपायर दवा या इंजेक्शन का इस्तेमाल मरीज के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए अस्पतालों में दवाओं की नियमित मॉनिटरिंग के साथ वार्ड स्तर पर भी एक्सपायरी डेट का दोबारा सत्यापन अनिवार्य किया जाना चाहिए।
अस्पताल प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. यतेंद्र सिंह ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला बेहद गंभीर प्रतीत हो रहा है। पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कराई जा रही है। फार्मेसी और नर्सिंग स्टाफ को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
यह घटना सरकारी अस्पतालों में दवा प्रबंधन और मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता का विषय बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं की खरीद से लेकर भंडारण, वितरण और उपयोग तक हर स्तर पर सख्त निगरानी और जवाबदेही तय करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो और मरीजों की जान जोखिम में न पड़े।
