कार्बेट टाइगर रिजर्व में गश्त के दौरान दैनिक श्रमिक पर बाघ का हमला, साथियों की बहादुरी से टला बड़ा हादसा
रामनगर| Doon Valley Times

कार्बेट टाइगर रिजर्व में सोमवार शाम एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां जंगल में नियमित गश्त के दौरान एक बाघ ने दैनिक श्रमिक पर अचानक हमला कर दिया। लेकिन उसके साथ मौजूद चार वनकर्मियों ने अदम्य साहस, सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई का परिचय देते हुए अपने साथी को बाघ के जबड़ों से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। वनकर्मियों की बहादुरी के चलते एक बड़ा हादसा टल गया।
जानकारी के अनुसार, कार्बेट टाइगर रिजर्व की सर्पदुली रेंज में दैनिक श्रमिक के रूप में कार्यरत 30 वर्षीय पीतांबर सौनी, पुत्र मोहन राम, निवासी सुंदरखाल (रामनगर), सोमवार शाम करीब चार बजे वनकर्मी योगेंद्र रावत, नवीन, रामनाथ और मनोज कुमार के साथ नियमित गश्त पूरी कर सर्पदुली कैंप लौट रहे थे। टीम के पास सुरक्षा के लिए सरकारी बंदूकें और लाठियां मौजूद थीं।
गश्त से लौटते समय चारों वनकर्मी आगे चल रहे थे, जबकि पीतांबर सबसे पीछे था। इसी दौरान झाड़ियों में घात लगाए बैठे एक बाघ ने अचानक पीछे से उस पर हमला कर दिया। तेज झपट्टे से पीतांबर जमीन पर गिर पड़ा और बाघ उसे अपने जबड़ों में दबोचने का प्रयास करने लगा।
साथी पर हमला होते ही आगे चल रहे वनकर्मियों ने बिना समय गंवाए बचाव अभियान शुरू कर दिया। एक वनकर्मी ने सरकारी बंदूक से लगातार कई राउंड हवाई फायरिंग की, जबकि अन्य वनकर्मियों ने जोर-जोर से शोर मचाते हुए लाठियां जमीन पर फटकारीं और बाघ की ओर बढ़ गए। वनकर्मियों की इस साहसिक कार्रवाई से बाघ घबरा गया और घायल पीतांबर को छोड़कर जंगल की ओर भाग निकला।
बाघ के पीछे हटते ही वनकर्मियों ने घायल पीतांबर को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और तत्काल अधिकारियों को सूचना दी। विभागीय वाहन से उसे सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए काशीपुर के एक निजी अस्पताल रेफर कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार पीतांबर के गले के आगे वाले हिस्से के पास बाघ के पंजों के गहरे घाव हैं।
घटना की जानकारी मिलते ही पार्क वार्डन बिंदर पाल और सर्पदुली रेंज के रेंजर संजय पांडे ने पूरे मामले की जानकारी ली। पार्क वार्डन बिंदर पाल ने बताया कि वनकर्मियों ने असाधारण साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए हवाई फायरिंग और त्वरित कार्रवाई से अपने साथी की जान बचाई। उन्होंने कहा कि यदि कुछ सेकंड की भी देरी होती तो यह घटना जानलेवा साबित हो सकती थी।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि कार्बेट टाइगर रिजर्व में तैनात वनकर्मी हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा में जुटे रहते हैं। कई बार उन्हें अपने साथियों की जान बचाने के लिए भी खुद खतरे का सामना करना पड़ता है। वनकर्मियों की यह बहादुरी न केवल सराहनीय है, बल्कि वन सेवा के प्रति उनके समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का भी प्रेरक उदाहरण है।




