देहरादून।
उत्तराखंड में मानसून की दस्तक के साथ ही राजधानी देहरादून में पहली तेज बारिश ने शहर की व्यवस्थाओं की हकीकत सामने ला दी। महज एक घंटे की बारिश के बाद शहर के कई प्रमुख मार्ग, चौराहे और निचले इलाके जलमग्न हो गए। सड़कों पर पानी भरने से यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ और लोगों को लंबा जाम व भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
करोड़ों रुपये की लागत से विकसित की जा रही स्मार्ट सिटी परियोजना, मानसून से पहले नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को लेकर किए गए सरकारी दावे पहली ही बारिश में सवालों के घेरे में आ गए। शहर के कई इलाकों में नालियां उफान पर दिखीं, जबकि सड़कों पर जलभराव के कारण वाहन रेंगते नजर आए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष मानसून शुरू होते ही देहरादून में यही स्थिति देखने को मिलती है। बारिश के साथ जलभराव, जाम और बदहाल ड्रेनेज सिस्टम आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है। लोगों ने सवाल उठाया कि जब राजधानी की यह स्थिति है तो प्रदेश के अन्य शहरों और कस्बों में हालात कैसे होंगे।
इधर मौसम विभाग ने आगामी दिनों में उत्तराखंड के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के आसपास न जाने, अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष मानसून सामान्य रहने की संभावना है, हालांकि प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो जैसी जलवायु परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। यदि इसका प्रभाव बढ़ता है तो मानसून की गतिविधियों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
पहली ही बारिश ने राजधानी की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग जलभराव और जल निकासी की समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं।




