करीब 16 करोड़ की लागत से बने पुल की एप्रोच रोड पहली ही तेज बारिश में हुई थी क्षतिग्रस्त
जांच में डिजाइन और तकनीकी निगरानी में गंभीर लापरवाही उजागर
दून वैली टाइम्स | देहरादून
प्रेमनगर-नंदा की चौकी के पास देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग पर टौंस नदी के ऊपर नवनिर्मित पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने के मामले में उत्तराखंड शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले की प्रारंभिक तकनीकी जांच में डिजाइन, पर्यवेक्षण और कार्यों की निगरानी में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता समेत तीन अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

शासन की ओर से 7 अगस्त 2026 को जारी अलग-अलग कार्यालय आदेशों के अनुसार प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग, देहरादून के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार, सहायक अभियंता अमित त्यागी और कनिष्ठ अभियंता नवीन गैरोला को निलंबित किया गया है।
जांच में डिजाइन से जुड़ी गंभीर खामियां आईं सामने
शासनादेश में कहा गया है कि नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी पर बने पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त होने की प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया यह तथ्य सामने आया कि डिजाइन कंसल्टेंट द्वारा River Diversion Work का डिजाइन दिया जाना था, लेकिन यह कार्य नहीं किया गया।

जांच में यह भी पाया गया कि नदी के River Bed के Cross Slope और नदी की Meandering Nature को ध्यान में रखते हुए River Training के जरूरी उपाय किए जाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
इसके परिणामस्वरूप नदी का प्रवाह एक ही स्थान की ओर केंद्रित हो गया। इससे पुल के Abutment के Upstream हिस्से में Heavy Scouring हुआ और एप्रोच रोड में कैविटी बन गई, जिसके चलते सड़क का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।
तकनीकी निगरानी में भी बरती गई लापरवाही
शासन के आदेश के मुताबिक प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग, देहरादून में सहायक अभियंता के रूप में कार्य देख रहे अधिकारियों की ओर से तकनीकी निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण, अनुबंधीय शर्तों के अनुपालन और वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक तकनीकी कमियों से अवगत कराने की जिम्मेदारी थी।
जांच में इन जिम्मेदारियों के समुचित निर्वहन में कमी पाई गई। शासन ने इसे शासकीय कार्यों के प्रति घोर लापरवाही, पर्यवेक्षण में शिथिलता और अपने दायित्वों के निर्वहन में गंभीर त्रुटि माना है।

डिजाइन और प्रूफ चेकिंग कंसल्टेंट पर भी होगी कार्रवाई
मामला केवल विभागीय अभियंताओं के निलंबन तक सीमित नहीं है। लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय ने प्रमुख अभियंता को संबंधित डिजाइन कंसल्टेंट और प्रूफ चेकिंग कंसल्टेंट के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
शासन ने भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुल और एप्रोच रोड को सुरक्षित रखने के संबंध में आवश्यक सुधारात्मक उपायों को कार्ययोजना में शामिल कर समयबद्ध तरीके से लागू करने के निर्देश भी दिए हैं।
करीब 16 करोड़ की लागत से तैयार हुआ था पुल
नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी पर बने इस पुल का निर्माण करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया था। पुल को हाल ही में यातायात के लिए खोला गया था, लेकिन तेज बारिश के बाद इसकी एप्रोच रोड का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद यातायात और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी तथा निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे थे।
गौरतलब है कि नंदा की चौकी का पुराना पुल वर्ष 2025 में टौंस नदी में आए तेज बहाव के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से नए पुल का पुनर्निर्माण कराया गया और 12 जुलाई 2026 से इस पर यातायात शुरू किया गया था। इसके कुछ ही दिनों बाद एप्रोच रोड के क्षतिग्रस्त होने की घटना सामने आई।
निलंबन अवधि में कार्यालय से संबद्ध रहेंगे अभियंता
शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान संबंधित अभियंताओं को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। साथ ही उन्हें संबंधित कार्यालय से संबद्ध रखा गया है और सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की जांच के दौरान यदि किसी अन्य अधिकारी, कर्मचारी या संबंधित पक्ष की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
नंदा की चौकी पुल प्रकरण में हुई यह कार्रवाई निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, तकनीकी डिजाइन और विभागीय निगरानी व्यवस्था को लेकर शासन की गंभीरता का संकेत मानी जा रही है।
