ढकरानी क्षेत्र में जुलाई में खनन सामग्री से भरा ट्रक पलटा, चालक घायल; जांच के बाद कार्रवाई पर उठे सवाल
दून वैली टाइम्स | विकासनगर
उत्तराखंड में मानसून के दौरान 1 जुलाई से 30 सितंबर तक नदी क्षेत्रों से रेत, बजरी और बोल्डर के चुगान पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है। इसके बावजूद विकासनगर के डाकपत्थर-ढालीपुर नदी मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही और जुलाई में खनन सामग्री से भरे ट्रक के पलटने की घटना ने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है।
जानकारी के अनुसार, जुलाई माह में इसी मार्ग पर खनन सामग्री से भरा एक ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें चालक घायल हुआ था। घटना के बाद जिलाधिकारी ने जिला खान अधिकारी को जांच के निर्देश दिए थे। अब स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि जांच में क्या सामने आया और क्या किसी प्रकार की कार्रवाई की गई।
मानसून के दौरान नदी का जलस्तर और बहाव लगातार बढ़ा रहता है। ऐसे में नदी क्षेत्र से होकर भारी वाहनों की आवाजाही सुरक्षा की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। यदि प्रतिबंध अवधि में खनन सामग्री का परिवहन हुआ है, तो उसकी परिस्थितियां और नियमों का पालन जांच का विषय है।
उत्तराखंड में खनन के नियम स्पष्ट हैं। 1 अक्टूबर से 30 जून तक निर्धारित शर्तों के तहत खनन की अनुमति रहती है, जबकि 1 जुलाई से 30 सितंबर तक मानसून अवधि में नदी क्षेत्रों में चुगान और खनन गतिविधियां प्रतिबंधित रहती हैं। ऐसे में इस अवधि में होने वाली किसी भी गतिविधि की वैधता की पुष्टि संबंधित विभाग की जांच से ही हो सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जोखिम वाले मार्गों की समीक्षा नहीं की गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने जिला प्रशासन, खान विभाग और संबंधित एजेंसियों से डाकपत्थर-ढालीपुर मार्ग का संयुक्त निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।
यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों के उल्लंघन या लापरवाही की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन और खान विभाग की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
क्या कहते हैं नियम?
- 1 अक्टूबर – 30 जून: निर्धारित शर्तों के तहत खनन की अनुमति।
- 1 जुलाई – 30 सितंबर: मानसून अवधि में नदी से रेत, बजरी और बोल्डर के चुगान पर पूर्ण प्रतिबंध।
