मुख्यमंत्री धामी की सख्ती को चुनौती देती यमुना की तस्वीरें, अब DM कसें शिकंजा

पट्टा बंद होने की बात, फिर नदी में खनिज से लदे ट्रैक्टर कैसे? एक वाहन पर कार्रवाई के बाद खनन विभाग की निगरानी पर उठे सवाल

विकासनगर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार अवैध खनन और सरकारी राजस्व की चोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश दे रहे हैं। इसके बावजूद विकासनगर क्षेत्र के नवाबगढ़ से सटे यमुना नदी क्षेत्र की सामने आई तस्वीरों ने प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस क्षेत्र में फिलहाल खनन पट्टा संचालित नहीं होने की बात सामने आ रही है, वहां खनिज सामग्री से लदे बताए जा रहे ट्रैक्टरों की आवाजाही कैसे हो रही है, यह अब जांच का विषय बन गया है।

मंगलवार सुबह खनन विभाग देहरादून की टीम के नवाबगढ़ क्षेत्र में पहुंचने और एक ट्रैक्टर के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह दावा भी किया जा रहा है कि विभागीय टीम की मौजूदगी के दौरान अन्य ट्रैक्टर भी नदी क्षेत्र से बाहर निकलते दिखाई दिए। यदि यह दावा सही है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि कार्रवाई केवल एक वाहन पर ही क्यों हुई? क्या अन्य वाहनों के दस्तावेजों की जांच की गई थी? यदि उनके पास वैध दस्तावेज और ई-रवन्ना थे तो उनका रिकॉर्ड सार्वजनिक जांच के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

एक वाहन पर कार्रवाई, बाकी पर निगरानी क्यों नहीं?

मामले में सबसे बड़ा सवाल खनिज के स्रोत, परिवहन और दस्तावेजों को लेकर है। यदि नदी क्षेत्र में खनन गतिविधि प्रतिबंधित या पट्टा बंद है तो वहां से खनिज सामग्री लदे वाहनों की मौजूदगी की वजह क्या है? वहीं यदि वाहनों को किसी वैध स्रोत से खनिज प्राप्त हुआ था तो संबंधित दस्तावेज, ई-रवन्ना, समय और वजन के रिकॉर्ड से स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।

ऐसे में केवल वाहन पकड़ने तक कार्रवाई सीमित रखने के बजाय पूरे मामले की कड़ी-दर-कड़ी जांच जरूरी है।

CCTV से खुल सकता है पूरा मामला

अब निगाहें जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान पर हैं। प्रशासन चाहे तो कुछ घंटों की रिकॉर्ड जांच से काफी हद तक तस्वीर साफ हो सकती है। नदी क्षेत्र और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज सुरक्षित कराकर, वीडियो में दिखाई देने वाले ट्रैक्टरों के नंबरों की पहचान की जा सकती है। इसके बाद संबंधित वाहनों के ई-रवन्ना, खनिज स्रोत, डिस्पैच रिकॉर्ड, धर्मकांटे के वजन और परिवहन के समय का मिलान कराया जा सकता है।

यदि रिकॉर्ड आपस में मेल खाते हैं तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि वाहनों का परिवहन वैध था। वहीं रिकॉर्ड में अंतर मिलने पर अवैध खनन अथवा अवैध परिवहन की दिशा में आगे की कार्रवाई का आधार तैयार हो सकता है।

कैलाश रिवर बेड माइनिंग कंपनी की निगरानी भी जांच के दायरे में

नदी क्षेत्र में कैलाश रिवर बेड माइनिंग कंपनी की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और किसी प्रकार की मिलीभगत का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

लेकिन इन सवालों का जवाब केवल स्पष्टीकरण से नहीं, बल्कि CCTV फुटेज, वाहन प्रवेश-निकासी रजिस्टर, डिस्पैच रिकॉर्ड और ई-रवन्ना के मिलान से सामने आ सकता है। प्रशासन को निष्पक्ष जांच के जरिए स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

पट्टा बंद है तो नदी क्षेत्र में प्रवेश कैसे?

यदि संबंधित क्षेत्र में वास्तव में खनन पट्टा फिलहाल बंद है, तो प्रशासन के सामने एक और महत्वपूर्ण सवाल खड़ा होता है—बंद अवधि में नदी क्षेत्र में खनिज से लदे वाहनों की आवाजाही कैसे संभव हो रही है?

ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन को पट्टा संचालन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। आवश्यकता होने पर पट्टा दोबारा शुरू होने तक नदी क्षेत्र के प्रमुख प्रवेश और निकासी मार्गों पर पर्याप्त पुलिस अथवा पीएसी बल की तैनाती पर भी विचार किया जा सकता है। प्रत्येक वाहन की आवाजाही दर्ज होने और दस्तावेजों की जांच की व्यवस्था से अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति की जमीनी परीक्षा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अवैध खनन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति की वास्तविक परीक्षा ऐसे ही नदी घाटों और संवेदनशील खनन क्षेत्रों में होती है। यदि नियमों का पालन हो रहा है तो प्रशासन को रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन मिला है तो कार्रवाई केवल वाहन चालक तक सीमित न रहकर पूरी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

नवाबगढ़ की यमुना से सामने आई तस्वीरों ने कई सवाल खड़े किए हैं। अब जरूरत आरोप-प्रत्यारोप की नहीं, बल्कि निष्पक्ष रिकॉर्ड जांच और जवाबदेही तय करने की है। एक वाहन पर कार्रवाई के बाद मामला खत्म नहीं होना चाहिए। यह पता लगना जरूरी है कि नदी क्षेत्र में कितने वाहन पहुंचे, किस स्रोत से खनिज आया, किसके नाम ई-रवन्ना जारी हुए, कितना वजन दर्ज हुआ और पूरी परिवहन श्रृंखला नियमों के अनुरूप थी या नहीं।

अगर सब वैध है तो रिकॉर्ड सामने आए और यदि नियमों का उल्लंघन मिला है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई हो। यमुना की तस्वीरें सवाल पूछ रही हैं—अब जवाब प्रशासनिक व्यवस्था को देना है।

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