CSIR-CBRI की टीम ने किया बाढ़ प्रभावित घरों का सर्वे, 150 से अधिक लोगों को दी सुरक्षित और आपदा-रोधी आवास तकनीकों की जानकारी
देहरादून, 22 सितंबर 2026। असम में हाल ही में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित गांवों में पुनर्वास और सुरक्षित आवास को लेकर वैज्ञानिक पहल शुरू की गई है। जोरहाट जिले के तिताबोर क्षेत्र स्थित जुनाकीमंडल गांव, जो CSIR स्मार्ट विलेज मिशन के तहत चयनित गांवों में शामिल है, में CSIR-CBRI की बहुविषयक टीम ने मैदानी स्तर पर पहुंचकर बाढ़ से हुए नुकसान का वैज्ञानिक आकलन किया।
बाढ़ के कारण गांव में कई आवासीय भवनों, ग्रामीण आधारभूत ढांचे और सामुदायिक सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। इसके मद्देनजर टीम ने प्रभावित भवनों का विस्तृत सर्वेक्षण कर संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक क्षति का आकलन किया। साथ ही भवनों के कमजोर हिस्सों की पहचान कर उनकी मरम्मत, रेट्रोफिटिंग और सुदृढ़ीकरण के लिए आवश्यक तकनीकी उपाय सुझाए गए।

‘आवास सक्षम’ कार्यक्रम में 150 से अधिक लोगों ने लिया हिस्सा
जुनाकीमंडल गांव में ‘आवास सक्षम: PMAY-G लाभार्थियों के लिए तकनीकी जागरूकता एवं प्रौद्योगिकी प्रदर्शन’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 150 से अधिक लोगों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के लाभार्थियों को सुरक्षित, किफायती, टिकाऊ और आपदा-रोधी आवास निर्माण की तकनीकों से परिचित कराना था।
बाढ़ और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए भवन मरम्मत एवं रेट्रोफिटिंग, प्लिंथ प्रोटेक्शन वॉल, नॉन-इरोडेड मड प्लास्टर, फायर-रिटार्डेंट थैच रूफ तथा बांस से निर्मित सुरक्षित और टिकाऊ आवास जैसी तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया।

75 प्रतिशत तक ऊर्जा बचत वाली तकनीक का प्रदर्शन
कार्यक्रम में CSIR-CBRI द्वारा विकसित विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। इनमें हाइब्रिड सोलर वॉटर हीटिंग एवं स्पेस कंडीशनिंग तकनीक प्रमुख रही।
विद्यालय और आंगनवाड़ी भवनों के लिए प्रस्तावित यह तकनीक गर्म पानी उपलब्ध कराने, मौसम के अनुसार भवन के अंदर तापीय आराम बनाए रखने तथा रसोई में स्वच्छ और किफायती ऊर्जा के उपयोग में मदद कर सकती है। CSIR-CBRI के अनुसार यह प्रणाली पारंपरिक प्रणालियों की तुलना में 75 प्रतिशत तक ऊर्जा खपत में बचत कर सकती है।
इससे ग्रामीण और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ग्रिड बिजली तथा पारंपरिक तापन प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। यह तकनीक CSIR-CBRI, रुड़की में स्वदेशी रूप से विकसित और सत्यापित की गई है तथा कल्पा, किन्नौर और ITBP लेह-लद्दाख में भी स्थापित की जा चुकी है।

पोर्टेबल मशीन से स्थानीय स्तर पर ईंट-ब्लॉक उत्पादन
गांवों में निर्माण कार्य को आसान बनाने के लिए पोर्टेबल ईंट-ब्लॉक निर्माण मशीन का भी प्रदर्शन किया गया। लगभग 100 से 125 किलोग्राम वजन वाली ये मशीनें स्थानीय सामग्री से काम करती हैं और मैनुअल तथा बिजली दोनों माध्यमों से संचालित की जा सकती हैं।
CSIR-CBRI के अनुसार मशीनें आठ घंटे में लगभग 800 से 1,000 ब्लॉक अथवा 1,800 से 2,400 ईंटें तैयार कर सकती हैं। संस्थान के मुताबिक यह उत्पादन क्षमता पारंपरिक मैनुअल उत्पादन की तुलना में लगभग तीन से चार गुना अधिक हो सकती है। इस तकनीक का प्रदर्शन मध्य प्रदेश, ओडिशा और असम के गांवों में किया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने की संभावनाएं भी जुड़ी हैं।
बाढ़ के बाद एयर डिसइन्फेक्शन सिस्टम की तैयारी
बाढ़ के बाद घरों और सामुदायिक भवनों के भीतर हवा की गुणवत्ता को लेकर भी तकनीकी समाधान पर जोर दिया गया। इसके तहत गांव में स्टैंडअलोन एयर डिसइन्फेक्शन सिस्टम तैनात करने का प्रस्ताव है।
इस प्रणाली का उद्देश्य सीमित वेंटिलेशन वाले बंद स्थानों में हवा के कीटाणुशोधन में सहायता करना और बाढ़ के बाद उत्पन्न होने वाली इनडोर एयर-क्वालिटी संबंधी समस्याओं से निपटने में सहयोग देना है।
स्थानीय राजमिस्त्रियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
CSIR-CBRI की ओर से गांव और आसपास के क्षेत्रों के राजमिस्त्रियों एवं निर्माण श्रमिकों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण आयोजित करने की योजना भी बनाई गई है। प्रशिक्षण के दौरान स्थानीय श्रमिकों को सुरक्षित और वैज्ञानिक निर्माण तकनीकों के साथ आधुनिक निर्माण पद्धतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
‘प्रयोगशाला से धरातल’ तक पहुंचाने का प्रयास
CSIR स्मार्ट विलेज मिशन के तहत की गई यह पहल वैज्ञानिक तकनीकों को सीधे ग्रामीण समुदाय तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखी जा रही है। इसके माध्यम से बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित आवास, ऊर्जा दक्षता, स्थानीय रोजगार और भविष्य की आपदाओं से निपटने की क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
मिशन के अनुसार इस तरह के वैज्ञानिक एवं तकनीकी हस्तक्षेप ‘प्रयोगशाला से धरातल’ तक तकनीक पहुंचाने के उद्देश्य को आगे बढ़ाते हैं और विकसित भारत 2047 के व्यापक लक्ष्य से भी जुड़े हैं।
टीम ने किया मैदानी सर्वे
CSIR स्मार्ट विलेज मिशन के मिशन निदेशक प्रो. प्रदीप कुमार रमनचारला और नोडल वैज्ञानिक डॉ. किशोर एस. कुलकर्णी के मार्गदर्शन में CSIR-CBRI की टीम ने यह मैदानी पहल की। टीम में डॉ. चंदन स्वरूप मीणा, डॉ. आर. शिव चिदंबरम, आर्किटेक्ट निशा, डॉ. सुमित, सुश्री अरुंधती, श्री अनुज और श्री प्रीतम शामिल रहे।
