देहरादून। जिले में दुर्लभ (रेयर) बीमारियों से पीड़ित बच्चों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन ने पहल तेज कर दी है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान द्वारा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत चिन्हित बच्चों के उपचार, रेफरल प्रक्रिया, आर्थिक सहायता और चिकित्सकीय प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद में अब तक 32 बच्चों का चिन्हीकरण किया गया है। इनमें से 22 बच्चों का उपचार आरबीएसके के तहत चल रहा है, जबकि 10 बच्चे ऐसे हैं जो आरबीएसके के दायरे में नहीं आते। इन 10 बच्चों के उपचार के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर सीएसआर फंड से 9.60 लाख रुपये की धनराशि मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उपलब्ध कराई गई है।
जिला प्रशासन के सहयोग से प्रेमनगर निवासी 10 वर्षीय उमेश, बैराज निवासी 13 वर्षीय आयशा, डोईवाला निवासी 9 वर्षीय वंशिका, रायपुर निवासी 2 वर्षीय अक्ष, मेहूवाला निवासी 3 वर्षीय आरिस, मांडूवाला निवासी 15 वर्षीय बाबू एवं प्रदीप, मांडूवाला निवासी 20 वर्षीय रंजीत, डोईवाला निवासी 5 वर्षीय शमशाद तथा जोगीवाला निवासी 5 वर्षीय दिव्यांश का उपचार कराया गया है। इनमें कई बच्चों को सर्जरी के साथ लंबे समय तक चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि गंभीर एवं दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित ऐसे बच्चों, जिनके परिवार महंगे उपचार का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं, उनके उपचार में आर्थिक बाधा नहीं आने दी जाए। आवश्यकता के अनुसार सीएसआर फंड के साथ राइफल क्लब फंड से भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
डीएम डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि “आर्थिक संसाधनों के अभाव में किसी भी बच्चे का उपचार प्रभावित नहीं होना चाहिए।” उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दस्तावेज, चिकित्सकीय रेफरल, अनुमोदन और वित्तीय सहायता से जुड़ी सभी औपचारिकताएं निर्धारित समय-सीमा में पूरी करने के निर्देश दिए।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, जिला कार्यक्रम अधिकारी और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सभी चिन्हित बच्चों के प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा उनके अभिभावकों से निरंतर संपर्क बनाए रखने को कहा। बैठक में बच्चों के उपचार की स्थिति, चिकित्सकीय प्रगति, रेफरल प्रक्रिया और आर्थिक सहायता सहित अन्य व्यवस्थाओं की बिंदुवार समीक्षा भी की गई।
जिलाधिकारी ने कहा कि रेयर डिजीज से पीड़ित बच्चों को समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। साथ ही जिले में ऐसे बच्चों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया लगातार जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई भी पात्र बच्चा उपचार और आवश्यक सहायता से वंचित न रहे।
