₹94 हजार करोड़ से अधिक के कर्ज का दावा, 2026-27 में ₹1.11 लाख करोड़ का बजट; सरकारी नौकरियों के रिक्त पदों ने बढ़ाई चिंता
दीवान सिंह तोमर, देहरादून। प्राकृतिक संसाधनों और पर्यटन की अपार संभावनाओं वाले उत्तराखंड के सामने विकास के साथ-साथ बढ़ते कर्ज और रोजगार का सवाल भी लगातार गंभीर होता जा रहा है। राज्य पर ₹94 हजार करोड़ से अधिक के कर्ज का आंकड़ा सामने आने के बीच सरकारी विभागों में 66,317 स्वीकृत पदों का खाली होना सरकार की रोजगार नीति पर सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर राज्य का बजट लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में सरकारी पद रिक्त पड़े हैं और युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उत्तराखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करीब ₹1.11 लाख करोड़ का बजट पेश किया है। बजट के आकार में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद राज्य की वित्तीय स्थिति पर कर्ज और ब्याज का दबाव बना हुआ है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि विकास के लिए लिए जा रहे कर्ज का वास्तविक लाभ आम जनता और खासकर प्रदेश के युवाओं तक कितना पहुंच रहा है।
सरकारी विभागों में हजारों पद खाली
PRS Legislative Research के उत्तराखंड बजट विश्लेषण के अनुसार मार्च 2025 तक राज्य में 2.39 लाख स्वीकृत सरकारी पदों में से 66,317 पद खाली थे। यानी स्वीकृत पदों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी भरा नहीं जा सका है। ग्रुप-ए, ग्रुप-बी, ग्रुप-सी और ग्रुप-डी सभी श्रेणियों में पद रिक्त हैं।
सरकारी विभागों में इतनी बड़ी संख्या में रिक्तियां होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया की रफ्तार और रोजगार के अवसरों को लेकर युवाओं में सवाल उठ रहे हैं। पर्वतीय जिलों से लगातार पलायन और रोजगार की तलाश में युवाओं के दूसरे राज्यों का रुख करने के बीच यह आंकड़ा सरकार के सामने बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा सकता है।
कर्ज बढ़ने के साथ ब्याज का भी दबाव
राज्य के बजट पर कर्ज के साथ ब्याज भुगतान का भार भी बढ़ रहा है। 2026-27 में ब्याज भुगतान के लिए हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका सीधा असर राज्य के विकास कार्यों और नई योजनाओं के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों पर पड़ सकता है।
ऐसे में विशेषज्ञों और आम जनता के बीच यह बहस तेज होना स्वाभाविक है कि राज्य को कर्ज लेने के साथ-साथ ऐसी आर्थिक रणनीति पर भी जोर देना चाहिए, जिससे स्थायी रोजगार, निजी निवेश, उद्योग और स्वरोजगार के अवसर तेजी से बढ़ें।
सबसे बड़ा सवाल—कर्ज बढ़ा तो रोजगार कितना बढ़ा?
उत्तराखंड के सामने अब केवल कर्ज का सवाल नहीं है, बल्कि कर्ज के बदले मिलने वाले विकास और रोजगार का सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
सरकार के सामने कई अहम प्रश्न हैं—
66,317 सरकारी पद खाली क्यों हैं?
भर्ती प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा क्यों नहीं किया जा रहा?
बढ़ते बजट का रोजगार सृजन में कितना इस्तेमाल हो रहा है?
कर्ज लेकर किए जा रहे खर्च से प्रदेश की अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत हुई?
और सबसे बड़ा सवाल—उत्तराखंड के युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार के पर्याप्त अवसर कब मिलेंगे?
दून वैली टाइम्स की यह रिपोर्ट आंकड़ों के आधार पर प्रदेश की वित्तीय स्थिति और रोजगार के बीच मौजूद इस बड़े सवाल को सामने रखती है। अब निगाहें सरकार के जवाब और आने वाले वर्षों में रोजगार सृजन की दिशा पर हैं।
