चांदी में ऐतिहासिक गिरावट: एक महीने में ₹50 हजार सस्ती हुई चांदी, आज फिर ₹8 हजार की भारी टूट

नौ महीने में 58 फीसदी से ज्यादा लुढ़के दाम, क्या अब आएगी तेजी? ₹1.72 लाख के आसपास खरीदारी और ₹1.99 लाख का शॉर्ट टर्म टार्गेट

दून वैली टाइम्स | दीवान सिंह तोमर

देहरादून। चांदी की कीमतों में लगातार जारी गिरावट ने निवेशकों और सर्राफा बाजार में हलचल मचा दी है। घरेलू वायदा बाजार में मंगलवार को चांदी के भाव में एक बार फिर जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर चांदी की कीमतें दोपहर तक करीब 8,000 रुपये प्रति किलोग्राम टूट गईं। बीते एक महीने में चांदी लगभग 50,000 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो चुकी है। वहीं, अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर से चांदी की कीमतों में 58 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।

चांदी में लगातार आ रही इस गिरावट ने निवेशकों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मौजूदा स्तर खरीदारी का अच्छा अवसर है या अभी कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है?

एमसीएक्स पर चांदी में 4.26 फीसदी की गिरावट

मंगलवार दोपहर 2 बजकर 25 मिनट पर एमसीएक्स एक्सचेंज में 4 दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी 4.26 फीसदी यानी 7,835 रुपये की गिरावट के साथ 1,75,994 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखाई दी।

वायदा बाजार में चांदी की कीमतों में आई इस भारी गिरावट का असर निवेशकों की कारोबारी रणनीति पर भी पड़ रहा है। लगातार कमजोर होते भाव के कारण बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है।

एक महीने में 49,883 रुपये सस्ती हुई चांदी

चांदी की कीमतों में गिरावट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते एक महीने में ही इसके भाव में करीब 50 हजार रुपये प्रति किलोग्राम की कमी आ चुकी है।

3 अक्टूबर 2026 को एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव 2,25,877 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो मंगलवार को घटकर 1,75,994 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गया।

इस प्रकार एक महीने में चांदी की कीमतों में 49,883 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई है।

पांच महीने में एक लाख रुपये से ज्यादा टूटे भाव

चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला पिछले कई महीनों से जारी है। 3 जून 2026 को एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव 2,80,445 रुपये प्रति किलोग्राम था।

मंगलवार के भाव के मुकाबले देखें तो पांच महीने में चांदी की कीमत 1,04,451 रुपये प्रति किलोग्राम नीचे आ चुकी है।

यह गिरावट बताती है कि चांदी के बाजार में तेजी का दौर फिलहाल कमजोर पड़ गया है और निवेशकों को भारी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ रहा है।

ऐतिहासिक उच्चतम स्तर से 58 फीसदी से अधिक की गिरावट

चांदी ने 29 जनवरी 2026 को एमसीएक्स एक्सचेंज पर 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक उच्चतम स्तर छुआ था।

इसके बाद से चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिली है। मंगलवार के 1,75,994 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव के आधार पर चांदी अपने रिकॉर्ड स्तर से 2,44,054 रुपये प्रति किलोग्राम नीचे आ चुकी है।

इसका मतलब है कि करीब नौ महीने में चांदी की कीमतों में 58 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।

मई के बाद से तीन लाख रुपये के नीचे कारोबार

घरेलू वायदा बाजार में चांदी की कीमतें मई 2026 के बाद से तीन लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से नीचे बनी हुई हैं।

14 मई 2026 को आखिरी बार 4 दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी का वायदा भाव 3,10,090 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था। इसके बाद चांदी की कीमतों में लगातार कमजोरी देखने को मिली।

आखिर क्यों लगातार गिर रही है चांदी?

चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण सामने आ रहे हैं। चांदी की कुल मांग का बड़ा हिस्सा औद्योगिक क्षेत्र से आता है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और विभिन्न तकनीकी उपकरणों के निर्माण में चांदी का इस्तेमाल किया जाता है।

औद्योगिक मांग में कमी की आशंका: उच्च ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण औद्योगिक गतिविधियों में सुस्ती आने की आशंका बढ़ी है। इससे चांदी की औद्योगिक मांग प्रभावित होने का अनुमान है।

सोलर पैनल में चांदी का कम इस्तेमाल: सोलर पैनल निर्माता कंपनियां उत्पादन लागत कम करने के लिए चांदी की खपत घटाने पर काम कर रही हैं। इस प्रक्रिया को ‘थ्रिफ्टिंग’ कहा जाता है। इससे भविष्य में चांदी की औद्योगिक मांग पर दबाव पड़ सकता है।

महंगाई और ब्याज दरों का असर: कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, महंगाई का दबाव और अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाएं भी कीमती धातुओं के बाजार को प्रभावित कर रही हैं।

इन सभी कारणों के चलते चांदी की कीमतों में तेजी से गिरावट देखने को मिल रही है।

आगे कहां जा सकते हैं चांदी के भाव?

चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट के बीच बाजार विशेषज्ञों की नजर अब इसके अगले संभावित स्तरों पर है।

मास्टर कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड के चीफ रिसर्च ऑफिसर डॉ. रवि सिंह ने पत्रिका डॉट कॉम को बताया कि मौजूदा स्तर पर चांदी शॉर्ट टर्म खरीदारी का अवसर दे सकती है।

उनके अनुसार, निवेशक 1,72,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास चांदी खरीदने पर विचार कर सकते हैं। इसके लिए शॉर्ट टर्म टार्गेट 1,99,000 रुपये प्रति किलोग्राम बताया गया है।

हालांकि, विशेषज्ञ ने चांदी के बाजार में मौजूद जोखिमों को भी रेखांकित किया है।

2027 में सप्लाई सरप्लस रहने की आशंका

विशेषज्ञ के मुताबिक, वर्ष 2027 में चांदी की सप्लाई मांग से अधिक रहने की आशंका है। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्र से कमजोर मांग और ज्वेलरी की मांग में कमी भी कीमतों की रिकवरी को सीमित कर सकती है।

उच्च ब्याज दरें चांदी के लिए एक प्रमुख जोखिम बनी हुई हैं। ऐसे में कीमतों में तेजी आने के बावजूद बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट के बाद बाजार में खरीदारी के अवसर और जोखिम दोनों मौजूद हैं। एक ओर कीमतें अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ चुकी हैं, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक मांग में कमजोरी और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां आगे भी कीमतों पर दबाव बना सकती हैं।

ऐसे में निवेशकों को केवल गिरावट देखकर जल्दबाजी में निवेश करने से बचना चाहिए। बाजार की दिशा, जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखकर ही कोई निर्णय लेना उचित होगा।

डिस्क्लेमर: यह समाचार केवल जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। इसमें व्यक्त बाजार संबंधी विचार और मूल्य लक्ष्य विशेषज्ञ के हवाले से दिए गए हैं। यह किसी प्रकार की निवेश सलाह नहीं है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।

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