लैंसडाउन वन प्रभाग में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, FIR दर्ज होने के बावजूद वर्षों से स्टोर में रखे हाथी दांतों का नहीं लग रहा सुराग
दून वैली टाइम्स | देहरादून, उत्तराखंड
लैंसडाउन वन प्रभाग की लालढांग रेंज से हाथी दांत गायब होने का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। प्रकरण सामने आने के कई दिन बीत जाने के बावजूद वन मुख्यालय अब तक गायब हाथी दांतों की संख्या और उनके कुल वजन की पूरी जानकारी जुटाने में सफल नहीं हो पाया है। विभागीय स्तर पर इस मामले में बरती जा रही ढिलाई को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वन विभाग की ओर से पुलिस में एफआईआर (FIR) भी दर्ज करवाई जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद वर्षों से स्टोर में सुरक्षित रखे गए हाथी दांतों का कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। वन विभाग के लिए यह मामला अब एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
कई साल से स्टोर में रखे थे हाथी दांत
जानकारी के अनुसार, लालढांग रेंज में हाथी दांत कई वर्षों से स्टोर में रखे हुए थे। इनकी सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी वन विभाग के पास थी। ऐसे में स्टोर से हाथी दांतों का गायब होना विभागीय निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने लंबे समय तक स्टोर में रखे हाथी दांतों का नियमित सत्यापन क्यों नहीं किया गया और यदि किया गया तो उनके गायब होने की जानकारी समय रहते सामने क्यों नहीं आ सकी।
FIR दर्ज, फिर भी नहीं मिल रही पूरी जानकारी
मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद भी वन मुख्यालय के पास गायब हाथी दांतों की संख्या और वजन का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं होना चिंता का विषय है। वन मुख्यालय की ओर से अब तक इस संबंध में पूरी जानकारी नहीं जुटा पाना विभागीय रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था की स्थिति को उजागर करता है।
हाथी दांत वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बेहद संवेदनशील सामग्री माने जाते हैं। ऐसे में इनका गायब होना केवल विभागीय लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय भी है।
जांच के बीच उठ रहे कई सवाल
इस पूरे प्रकरण में अब कई अहम सवाल सामने आ रहे हैं। स्टोर में रखे हाथी दांत आखिर कब और किन परिस्थितियों में गायब हुए? उनकी संख्या और वजन का रिकॉर्ड किस स्तर पर रखा गया था? नियमित निरीक्षण के दौरान इस कमी का पता क्यों नहीं चला? और पुलिस में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी वन मुख्यालय अब तक पूरी जानकारी क्यों नहीं जुटा पाया?
इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है, ताकि मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जा सके।
फिलहाल, लालढांग रेंज से हाथी दांत गायब होने का मामला वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और गायब हाथी दांतों का पता लगाने के लिए विभाग की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
