बदरीनाथ धाम चढ़ावा प्रकरण: प्रमोद नौटियाल को हाईकोर्ट से जमानत, जांच और सीसीटीवी फुटेज पर उठे सवाल

गिरफ्तारी के 16 दिन बाद दिखाई गई पांच हजार रुपये की बरामदगी बनी जमानत का अहम आधार, विवेचना पूरी होने और आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अदालत ने दी राहत

देहरादून। बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई जाने वाली थाली भेंट की गणना में कथित वित्तीय अनियमितता के बहुचर्चित मामले में आरोपित प्रमोद नौटियाल को उत्तराखंड हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने छह नवंबर को उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने मामले की विवेचना पूरी होने, आरोपपत्र दाखिल किए जाने, कथित बरामदगी की परिस्थितियों और न्यायिक हिरासत की अवधि सहित विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के बाद यह आदेश पारित किया। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत के स्तर पर मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की जा रही है।

इस मामले में जमानत का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पांच हजार रुपये की कथित बरामदगी को लेकर सामने आया। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि प्रमोद नौटियाल की गिरफ्तारी 12 जुलाई को हुई थी, जबकि उनके निशानदेही पर पांच हजार रुपये की बरामदगी 28 जुलाई को दिखाई गई। यानी गिरफ्तारी के 16 दिन से अधिक समय बाद बरामदगी दर्शाई गई। इसके अलावा जिस धर्मशाला के कमरे से यह रकम बरामद होना बताया गया, वहां आम लोगों और श्रद्धालुओं की आवाजाही होने की दलील भी अदालत के समक्ष रखी गई।

दो जुलाई को थाली भेंट की गणना के दौरान सामने आया था मामला

बदरीनाथ धाम में दो जुलाई 2026 को श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई गई थाली भेंट की नकदी और अन्य धार्मिक सामग्री की गणना के दौरान कथित अनियमितता का मामला सामने आया था। उस समय बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष के वैयक्तिक सहायक के रूप में कार्यरत प्रमोद नौटियाल पर आरोप लगा कि उन्होंने गणना स्थल से नकदी और अन्य भेंट सामग्री को अपने कब्जे में लिया।

प्रारंभिक विभागीय जांच में आरोप लगाया गया कि दो जुलाई को सुबह करीब नौ से साढ़े नौ बजे के बीच गणना के दौरान अनियमितता हुई। तीन जुलाई को भैरव सेना की ओर से मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी को लिखित शिकायत दी गई। इसके बाद मंदिर समिति ने चार सदस्यीय विभागीय जांच समिति गठित कर मामले की जांच शुरू कराई।

जांच के दौरान गणना कक्ष की सीसीटीवी फुटेज का भी अवलोकन किया गया। जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, फुटेज में प्रमोद नौटियाल कथित तौर पर मोबाइल फोन के नीचे नोटों की गड्डी छिपाकर गणना कक्ष से बाहर जाते दिखाई दिए। पुलिस जांच में 500 रुपये के नोटों, सोने-चांदी के सिक्कों के पैकेट, शालिग्राम शिला और केसर के पैकेट को अपने कब्जे में लेने के आरोप भी सामने आए।

विभागीय जांच में पांच दिनों के भीतर आठ बार चढ़ावे और दान सामग्री में कथित हेराफेरी किए जाने की बात भी सामने आई थी। मामले में कुछ अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। हालांकि, इन आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होना है।

निलंबन से गिरफ्तारी तक ऐसे आगे बढ़ा मामला

प्रकरण सामने आने के बाद मंदिर समिति ने प्रमोद नौटियाल को गणना और प्रोटोकॉल संबंधी जिम्मेदारियों से हटा दिया। छह जुलाई को उन्हें निलंबित कर दिया गया। वहीं, शासन की ओर से मंडलायुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की गई।

आठ जुलाई को बीकेटीसी के प्रभारी मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवान की लिखित शिकायत पर बदरीनाथ कोतवाली में एफआईआर संख्या 06/2026 दर्ज की गई। शुरुआत में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 306 और 316(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए चमोली पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया। एसआईटी ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए तथा सीसीटीवी फुटेज सहित उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की।

पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, 12 जुलाई की रात करीब 10 बजे प्रमोद नौटियाल को देहरादून स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

बचाव पक्ष ने बरामदगी की परिस्थितियों पर उठाए सवाल

हाईकोर्ट में प्रमोद नौटियाल की ओर से अधिवक्ता संदीप तिवारी ने जमानत याचिका दाखिल की थी। छह नवंबर को सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि उन्हें प्रारंभिक जांच के आधार पर मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है।

बचाव पक्ष ने पांच हजार रुपये की कथित बरामदगी की समय-सीमा और स्थान को लेकर सवाल उठाए। अदालत को बताया गया कि गिरफ्तारी 12 जुलाई को हुई थी, जबकि कथित बरामदगी 28 जुलाई को दिखाई गई। जिस धर्मशाला के कमरे से रकम बरामद होना बताया गया, वह सार्वजनिक रूप से सुलभ स्थान था, जहां श्रद्धालुओं और अन्य लोगों की पहुंच संभव थी।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के समय प्रमोद नौटियाल के घर से शालिग्राम मिलने का उल्लेख किया गया था, लेकिन उनके घर या कब्जे से अन्य कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई।

अधिवक्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि प्रमोद नौटियाल देहरादून के स्थायी निवासी हैं, उनके समाज में मजबूत संबंध हैं और उनके फरार होने की आशंका नहीं है। मामले की विवेचना पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है। ऐसे में मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक उन्हें जेल में रखना आवश्यक नहीं है।

सरकार ने किया जमानत का विरोध

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जमानत याचिका का विरोध किया गया। हालांकि, बचाव पक्ष की ओर से रखे गए विवेचना पूरी होने और पांच हजार रुपये की कथित बरामदगी गिरफ्तारी के काफी समय बाद दिखाए जाने संबंधी तथ्यों पर सुनवाई के दौरान विचार किया गया।

अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड, दोनों पक्षों की दलीलों, आरोपों की प्रकृति, न्यायिक हिरासत की अवधि और मामले की वर्तमान स्थिति का अवलोकन किया। विवेचना पूरी होने और आरोपपत्र दाखिल होने के साथ कथित बरामदगी की परिस्थितियों को भी जमानत पर विचार करते समय महत्वपूर्ण माना गया।

इसके बाद अदालत ने प्रमोद नौटियाल की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। हाईकोर्ट ने संबंधित न्यायालय की संतुष्टि के अनुसार निजी मुचलका और समान राशि के दो विश्वसनीय जमानतदार प्रस्तुत करने पर उन्हें रिहा करने का आदेश दिया है।

सीसीटीवी फुटेज के 32 दिन गायब होने का मामला भी चर्चा में

बदरीनाथ धाम चढ़ावा प्रकरण में सीसीटीवी रिकॉर्ड को लेकर भी पहले सवाल उठ चुके हैं। मीडिया रिपोर्टों में सामने आया था कि जांच के दौरान लगभग डेढ़ महीने की सीसीटीवी फुटेज ही उपलब्ध थी, जबकि उससे पहले के करीब 32 दिनों का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो पाया था।

इस तथ्य के सामने आने के बाद यह सवाल भी चर्चा में आया कि मंदिर में चढ़ावे की गणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य से संबंधित सीसीटीवी रिकॉर्ड किन परिस्थितियों में उपलब्ध नहीं हो पाया। क्या इस अवधि की फुटेज सुरक्षित नहीं रखी गई थी या रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के पीछे कोई अन्य तकनीकी अथवा प्रशासनिक कारण था? इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।

जमानत के बाद भी कई सवालों के जवाब बाकी

प्रमोद नौटियाल को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद इस प्रकरण में कानूनी स्तर पर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है, लेकिन इससे मामले में लगाए गए आरोप समाप्त नहीं हुए हैं। जमानत का आदेश आरोपों से दोषमुक्ति नहीं है। अब मामले का अंतिम निर्णय न्यायिक सुनवाई और प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगा।

बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े चढ़ावे और दान सामग्री की पारदर्शी गणना, सीसीटीवी रिकॉर्ड की उपलब्धता, विभागीय जांच की निष्पक्षता और कथित बरामदगी की परिस्थितियों को लेकर उठे सवालों के जवाब सामने आना भी जरूरी है। श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई जाने वाली भेंट की सुरक्षा और उसके हिसाब-किताब में पारदर्शिता बनाए रखना मंदिर प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

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