नेपाल में जलप्रलय से तबाही: मौतों का आंकड़ा 675 के पार, 2400 से ज्यादा लापता

करीब 30 देशों के नागरिक संकट में; भारत ने तेज किया रेस्क्यू ऑपरेशन, चीन से 120 भारतीय नेपाल पहुंचे

काठमांडू/नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने बड़े मानवीय संकट का रूप ले लिया है। मध्य नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 675 के आसपास पहुंच गई है, जबकि नेपाल सरकार के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2,400 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। आपदा से कई जिले बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।

नेपाल पुलिस के मुताबिक बाढ़ प्रभावित सभी आठ जिलों से शव बरामद किए जा चुके हैं। खराब मौसम, भारी मलबे और सड़क एवं पुलों के क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत दलों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में स्थिति इतनी गंभीर है कि वहां पहुंचने का एकमात्र रास्ता हेलीकॉप्टर रह गया है।

करीब 30 देशों के नागरिक प्रभावित

नेपाल में आई इस आपदा का असर केवल स्थानीय आबादी तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में आए हैं। करीब 30 देशों के नागरिकों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। नेपाल के विदेश मंत्री शिसिर खनाल के अनुसार अब तक 4,451 लोगों को बचाया गया है, जिनमें 187 विदेशी नागरिक शामिल हैं।

सरकार की प्राथमिकता अब भी लापता लोगों का पता लगाना और प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत पहुंचाना है। हालांकि कई इलाके दलदली जमीन में तब्दील हो गए हैं, जिससे हेलीकॉप्टरों की लैंडिंग भी मुश्किल हो रही है।

भारतीय नागरिकों के लिए भारत ने तेज किया राहत अभियान

नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत की ओर से राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार 29 अगस्त 2026 की शाम पांच बजे तक 88 भारतीय नागरिकों को रेस्क्यू किया जा चुका था, जबकि 287 भारतीय नागरिकों से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है। इसके अलावा 128 भारतीय मूल के लोग भी लापता बताए गए हैं।

शनिवार को चीन से 120 भारतीय नागरिक नेपाल पहुंचे। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों सहित बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक चीन की ओर फंसे हुए थे। सुरक्षित निकाले गए भारतीयों ने नेपाल में आई जलप्रलय की भयावह स्थिति के बारे में रोंगटे खड़े कर देने वाले अनुभव साझा किए हैं।

जलविद्युत परियोजना से चार भारतीयों का रेस्क्यू

विदेश मंत्रालय के मुताबिक 29 अगस्त को रसुवा स्थित एक जलविद्युत परियोजना से चार भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया। इनमें रिपु कुमार, चनेश्वर नरजारी, कृपा शंकर और मोहम्मद मिनहाजुद्दीन शामिल हैं। इन सभी के जल्द काठमांडू पहुंचने की उम्मीद है।

भारत की टीमें नेपाल में राहत, बचाव और मृतकों की पहचान के अभियान में नेपाली प्रशासन की मदद कर रही हैं।

डीएनए जांच के लिए भारत भेजेगा फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम

आपदा में मारे गए लोगों की पहचान में मदद के लिए भारत की ओर से छह सदस्यीय फोरेंसिक टीम नेपाल भेजी जा रही है। टीम काठमांडू पहुंचकर मृतकों के अवशेषों की पहचान के लिए डीएनए सैंपल के विश्लेषण में सहायता करेगी।

इसके अलावा भारत की एक विशेष तकनीकी टीम सुरंग बचाव अभियान की स्थिति का जायजा लेने के लिए पहले ही काठमांडू पहुंच चुकी है। तकनीकी टीम की सिफारिश के आधार पर विशेष टनल रेस्क्यू टीम और आवश्यक उपकरण नेपाल भेजे जा रहे हैं।

खरगे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

नेपाल की भयावह स्थिति को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

खरगे ने नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि संकट की गंभीरता को देखते हुए भारत को राहत और बचाव अभियान को और तेज करना चाहिए। खरगे के मुताबिक करीब 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाने की जानकारी सामने आई थी।

उन्होंने कहा कि नेपाल की जनता के साथ मजबूती से खड़ा होना और वहां फंसे भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाना इस समय सबसे महत्वपूर्ण है।

शशि थरूर ने NDRF और भारी हेलीकॉप्टर भेजने की मांग की

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर नेपाल में राहत एवं बचाव अभियान का दायरा बढ़ाने की मांग की है।

थरूर ने पूरी NDRF टीम और भारी क्षमता वाले हेलीकॉप्टर भेजने का आग्रह किया। उन्होंने मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार, थर्मल इमेजिंग तकनीक, प्रशिक्षित खोजी कुत्तों और सैटेलाइट तकनीक के इस्तेमाल की मांग की।

उन्होंने सेना की इंजीनियर टास्क फोर्स को अर्थमूविंग मशीनों के साथ तैनात करने तथा भारत की ओर से पेश किए गए बेली ब्रिजों की मदद से पसांग ल्हामू हाईवे को फिर से खोलने का सुझाव भी दिया।

राजनाथ सिंह बोले—नेपाल अकेला नहीं, भारत हरसंभव मदद को तैयार

नेपाल में आई भीषण बाढ़ पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि भारत संकट की इस घड़ी में नेपाल के साथ खड़ा है और हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि नेपाल को राहत सामग्री भेजी जा रही है और भारत लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जरूरत के मुताबिक भारत की ओर से और सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

पनबिजली सुरंगों में सैकड़ों लोगों के फंसे होने की आशंका

बाढ़ और भूस्खलन ने नेपाल की कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। त्रिशुली गलियारे में स्थित परियोजनाओं तक पहुंचना राहत एवं बचाव दलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद रसुवा सहित कई क्षेत्रों में जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों और भूमिगत बिजली संयंत्रों में सैकड़ों लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। नेपाली सेना मलबे और कीचड़ के बीच फंसे श्रमिकों को निकालने के लिए अभियान चला रही है।

कई सुरंगों के प्रवेश मार्ग मलबे से बंद हैं। भारी मशीनरी और विशेषज्ञ टीमों की मदद से रास्ते खोलने का प्रयास किया जा रहा है।

दोबारा बाढ़ का खतरा, नेपाल हाई अलर्ट पर

नेपाल सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में दोबारा बाढ़ आने की आशंका को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी है। विदेश मंत्री शिसिर खनाल के मुताबिक सरकार की तत्काल प्राथमिकता लापता लोगों को खोजने और प्रभावित नागरिकों तक राहत पहुंचाने की है।

भौगोलिक परिस्थितियों और लगातार खराब मौसम के कारण राहत अभियान में कई तरह की बाधाएं सामने आ रही हैं। कई इलाके दलदल में बदल गए हैं, जबकि क्षतिग्रस्त सड़कें और पुल बचाव दलों की राह रोक रहे हैं।

भारत के सामने बड़ी चुनौती

नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की संख्या और लगातार सामने आ रही नई जानकारी ने भारत के लिए भी चुनौती बढ़ा दी है। एक तरफ भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने का अभियान जारी है, वहीं दूसरी ओर नेपाल सरकार के साथ मिलकर मृतकों की पहचान और लापता लोगों की तलाश में तकनीकी सहयोग भी दिया जा रहा है।

नेपाल की इस भीषण आपदा ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। राहत एवं बचाव अभियान के बीच अब सबसे बड़ी उम्मीद मलबे और सुरंगों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने तथा लापता लोगों की जल्द से जल्द जानकारी मिलने पर टिकी है।

दून वैली टाइम्स | विशेष रिपोर्ट

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