पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड के पौड़ी जिले में कई दिनों से दहशत का कारण बना कथित आदमखोर गुलदार आखिरकार वन विभाग के लगाए पिंजरे में कैद हो गया। गुलदार के पकड़े जाने से क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, लेकिन वन विभाग के फैसले को लेकर नाराजगी भी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि आदमखोर घोषित किए जाने के बावजूद गुलदार को मारने के बजाय जीवित क्यों पकड़ा गया।
गौरतलब है कि 27 जून को नैनीडांडा विकासखंड की ग्रामसभा सत्खोलू के तोक बणासी तल्ली निवासी 65 वर्षीय सुशीला देवी पर जंगल में घास काटने के दौरान गुलदार ने हमला कर उन्हें अपना शिकार बना लिया था। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भय और आक्रोश का माहौल बन गया था। ग्रामीणों ने गुलदार को आदमखोर घोषित कर तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए सल्ड महादेव के पास बुआखाल–रामनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम भी लगाया था।
ग्रामीणों के विरोध के बाद वन विभाग ने गुलदार को आदमखोर घोषित करते हुए शिकारी तैनात किए और घटनास्थल के आसपास पिंजरा लगाया। शनिवार को गुलदार पिंजरे में कैद हो गया। वन विभाग की टीम ने उसे बेहोश कर सुरक्षित रेंज कार्यालय पहुंचाया, जहां स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया।
वन विभाग अब महिला के शव से मिले बालों की फोरेंसिक जांच कराएगा, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पकड़ा गया यही गुलदार सुशीला देवी की मौत के लिए जिम्मेदार था या नहीं।
हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि यदि यही आदमखोर गुलदार है तो उसे शूट किया जाना चाहिए था। उनका कहना है कि उन्हें आशंका है कि वन विभाग भविष्य में इस गुलदार को किसी अन्य जंगल में छोड़ सकता है, जिससे फिर किसी क्षेत्र में खतरा पैदा हो सकता है।
वन विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।




